Bhopal South-West Constituency: जहां ‘..शाह’* की मर्जी ही अहम

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” Bhopal South-West Constituency : मुख्यमंत्री निवास और राज्य मंत्रालय से लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रदेश कार्यालय भी इसी क्षेत्र में हैं.. इसके चलते कालांतर में यह इलाका प्रदेश की सियासत का गढ़ बन गया..यहां बैठकर प्रदेश के हुक्मरान समूचे सूबे की व्यवस्था संभालते  हैं..लेकिन इस सीट पर चुनाव के दौरान यदि किसी की तूती बोलती है तो वह यहां के ‘नौकरशाह’ * मतदाताओं की..”

रवि अवस्थी ,भोपाल। Vidhan Sabha Parikrama 2023 वक्त के साथ मप्र की विधानसभा सीटों के स्वरूप में कई बदलाव आए..भोपाल की दक्षिण-पश्चिम Bhopal South-West Constituency सीट भी इनमें एक है..जिसका एक बड़ा हिस्सा कभी भोपाल दक्षिण विधानसभा के नाम से जाना जाता रहा..

पुराने दौर में  ‘जर्दा,पर्दा और गर्दा ‘ की छाप वाले इस शहर को 60 के दशक में नई पहचान बाबुओं यानी सरकारी कर्मचारियों Government employees की इसी बस्ती ने दी.. साल 2008 में जिले में सीटों की संख्या बढ़ी तो भोपाल दक्षिण के साथ पश्चिमी क्षेत्र के कुछ हिस्सों को जोड़कर इसे यह नया नाम मिला..

‘पश्चिम’ का साथ मिला तो यह क्षेत्र अब स्मार्ट सिटी Smart City बनने की राह पर है..कुछ नहीं बदला तो वह यहां के मतदाताओं Voters का मिजाज..ये अब तक उन्हीं के रहे..जो उनके साथ हैं। वर्ष 2023 के चुनाव में यहां किसे मिलेगा बहुमत,यह समझने से पहले एक नजर सीट के इतिहास History पर..
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                                 2008 में बनी भोपाल दक्षिण-पश्चिम सीट
                                1972 तक थी भोपाल जिले में चार सीटें
                                1977 में बनी भोपाल दक्षिण विधानसभा
                                बाबूलाल गौर चुने गए थे पहले विधायक
                                80 के दशक में यहां 2 बार जीता ‘पंजा’
                               पिछले 7 चुनावों में 5 बार जीती बीजेपी
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यहां ‘..शाह’ तय करते हैं कौन होगा उनका प्रतिनिधि
यदि आप भोपाल के नक्शे से वाकिफ हैं तो चूना भट्टी,चार इमली,मालवीय नगर व श्यामला हिल्स जैसे नाम आपके लिए नए नहीं होंगे। जी हां,यही क्षेत्र भोपाल दक्षिण पश्चिम सीट का हिस्सा हैं..इनमें एमपी नगर,गौतम नगर,MACT, टी.टी. नगर T.T.Nagar सहित कई छोटे-बड़े झुग्गी क्षेत्र भी शामिल हैं.. मुख्यमंत्री निवास व मंत्रालय से लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रदेश कार्यालय भी इसी क्षेत्र में हैं..इसके चलते कालांतर में यह इलाका एक ऐसा केंद्र बन गया..

जहां से प्रदेशभर की राजनीति चलती है.. विविध संस्कृति Culture वाले इस क्षेत्र में प्राय: हर वर्ग का मतदाता निवास करता है..लेकिन बड़ी संख्या उन सरकारी कर्मचारियों ( नौकरशाह ) की है.. जिन्हें मिलाकर चुनाव आयोग ने हाल ही में अपनी नई मतदाता सूची Voter list में इस क्षेत्र के मतदाताओं की संख्या 2 लाख 26​ ​हजार 11 बताई है.

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.इनके अलावा एक बड़ी संख्या कायस्थ मतदाताओं की है..जो एक संगठित समाज के रूप में अपनी पहचान रखते हैं..तीसरी बड़ी संख्या ब्राह्मण मतदाताओं की है..भोपाल दक्षिण-पश्चिम में मतदाताओं के यही वर्ग अपने प्रतिनिधि के चयन में अहम भूमिका अदा करते रहे हैं..
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                                     कुल मतदाता          2,26,011
                                   सरकारी कर्मचारी  70 से 80 हजार
                                   कायस्थ मतदाता    20 से 25 हजार
                                   ब्राह्मण  वोटर्स       25 से 30 हजार
                                   मुस्लिम मतदाता    05 से 10 हजार
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भोपाल दक्षिण-पश्चिम के ज्यादातर मतदाता बाहरी हैं…जो लंबे समय से निवास करते हुए यहां के मतदाता बने.. लिहाजा विविध संस्कृति वाले इस क्षेत्र में किसी भी उम्मीदवार के लिए मतदाताओं का मानस टटोल पाना आसान नहीं रहा..

इस सीट पर अब तक हुए चार चुनावों की ही बात करें तो इसी क्षेत्र से विधायक रहते हुए वर्ष 2008 में बीजेपी के उम्मीदवार उमाशंकर गुप्ता को पहले से कम वोट मिले..

बावजूद इसके वह चुनाव जीत कर विधायक और बाद में मंत्री भी बने..वहीं कांग्रेस के दीपचंद यादव महज 14 प्रतिशत वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे..कांग्रेस के वोट बैंक में यहां सेंध लगाई MACT के छात्र नेता रहे संजीव सक्सेना ने ..तब वह बसपा से चुनाव लड़े और करीब 24 प्रतिशत वोट हासिल किए..

ऐसे ही ,इसी क्षेत्र से दो बार के विधायक रहे भाजश उम्मीदवार शैलेंद्र प्रधान,इस चुनाव में  सिर्फ 6 हजार वोट पा सके..वर्ना ,एक दौर था जब 93 के चुनाव में प्रधान ने कांग्रेस के मानक अग्रवाल को इसी सीट पर 43 हजार से अधिक मतों से मात दी थी ..

वर्ष 2013 के चुनाव में भी बीजेपी BJP के उमाशंकर गुप्ता इस सीट से तीसरी बार विधायक चुने गए… तब उन्होंने कांग्रेस Congress उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे संजीव सक्सेना को 18 हजार से अधिक मतों से हराया..

पिछले यानी 2018 के चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर उमाशंकर पर दांव लगाया लेकिन कांग्रेस के पूर्व विधायक पीसी शर्मा ने करीब साढ़े हजार मतों से उन्हें शिकस्त दी.. कहा जाता है- गुप्ता इस चुनाव में अपनों की ही सियासत Politics का शिकार हुए।

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                               मप्र की सियासत का गढ़ रही यह सीट
                               बीजेपी के अधिक प्रभाव वाला रहा क्षेत्र
                               सीट से अब तक 6  बार खिला ‘कमल’
                               कांग्रेस ने चार बार चखा जीत का स्वाद
                               तीसरे मोर्चे को मिलता रहा यहां समर्थन

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पूर्व की भोपाल दक्षिण सीट के लिए हुए चुनावों की बात करें तो यहां 77 में जनता पार्टी के बाबूलाल गौर,85 में कांग्रेस के हसनात सिद्दीकी,90 में इसी दल के सत्यनारायण अग्रवाल,90 व 93 में बीजेपी के शैलेंद्र प्रधान,98 में कांग्रेस के पी.सी. शर्मा व 2003 में बीजेपी के उमाशंकर गुप्ता विधायक रहे..

अर्थात भोपाल दक्षिण व दक्षिण-पश्चिम सीट के लिए अब तक हुए 10 चुनाव में 4 बार कांग्रेस तो 6 बार बीजेपी (एक बार जनता पार्टी ) ने जीत का परचम फहराया..ये परिणाम बताते हैं कि यह सीट बीजेपी के प्रभाव वाली रही है..लेकिन सही उम्मीदवार या उम्मीदों पर खरे नहीं उतरने पर यहां के मतदाता बदलाव करने से भी गुरेज नहीं करते।

उम्मीदवारी को लेकर बड़े फेरबदल के संकेत

2023 के चुनाव को लेकर भी दोनों ही प्रमुख दलों की ओर से इस सीट पर टिकट को लेकर अनेक लोग सक्रिय हैं..बीजेपी हो,कांग्रेस या तीसरा मोर्चा… हर कोई इस सीट को अपने लिए सुरक्षित मान रहा है..

इसके चलते बीजेपी से ही जहां एक दिग्गज नेता के यहां चुनाव लड़ने की चर्चा है तो पूर्व विधायक उमाशंकर गुप्ता व कुछ अन्य नेता भी टिकट Ticket की दौड़ में शामिल हैं..वहीं कांग्रेस से मौजूदा विधायक पीसी शर्मा P.C Sharma के अलावा दो बार चुनाव हार चुके संजीव सक्सेना व कुछ अन्य नेता टिकट के दावेदारों में शामिल बताए जाते हैं..

इनके अलावा तीसरा मोर्चा भी इस सीट से उम्मीद लगाए हुए है.. सूत्रों की मानें तो भोपाल दक्षिण​-​पश्चिम में 2023 के चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर बड़े फेरबदल के संकेत हैं… बहरहाल,किसके सिर सजेगा इस सीट का अगला ताज ..इसके लिए करना होगा चुनाव तक इंतजार..।

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