Khilchipur Assembly : BJP की आकांक्षी सीटों में शामिल है यह विधानसभा ,बिछी चुनावी बिसात

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“मप्र के राजगढ़ जिले की​ खिलचीपुर सीट (The Khilchipur seat of Rajgarh district of MP)वर्ष 1962 में अस्तित्व में आई। राजस्थान सीमा से सटे होने के कारण यहां की सियासत में पड़ोसी राज्य का ट्रेंड देखा गया। इस सीट के लिए अब तक हुए 13 चुनाव में कांग्रेस 8 बार तो बीजेपी 3 बार ही चुनाव जीती..एक बार जनता पार्टी ने भी जीत का स्वाद चखा। हालांकि इस सीट से जीत की शुरुआत निर्दलीय हरि सिंह पंवार ने की थी। जातिगत समीकरण की बात करें तो दांगी बाहुल्य खिलचीपुर में इस वर्ग का दबदबा रहा। इसके चलते यहां से ज्यादातर विधायक इसी वर्ग से चुने गए।यह कभी चित्तौड़ के राणा सांगा परिवार के खींची राजा उग्रसेन की रियासत रही। उन्हीं के नाम पर खिलचीपुर नाम पड़ा । पूर्व रियासत के किले का प्रभाव अब भी इस सीट पर देखा जा सकता है..”

रवि अवस्थी ,भोपाल। आजादी के 75 साल बाद भी यदि राजा रजवाडे परिवार के लोग अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रभाव रखते हैं तो ऐसी सीटों में राजगढ़ जिले की खिलचीपुर विधानसभा सीट भी एक है..तत्कालीन दौर में यह मध्य क्षेत्र की एक प्रमुख रियासत थी..जहाँ खींची राजाओं का शासन रहा..इसी आधार पर इस रियासत का नाम भी खिलचीपुर पडा..इस रियासत के वारिस कहे जाने वाले कांग्रेस के युवा नेता प्रियव्रत सिंह यहां से मौजूदा एवं तीन बार के विधायक हैं..दांगी बाहुल्य इस सीट का मिजाज हालांकि वक्त.वक्त पर बदलता रहा..तो आइए पहले जानते हैं इस सीट के सियासी सफर के बारे में…
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खिलचीपुर में रहा राजा उग्रसेन खींची का शासन
 चित्तौड़ के महाराणा सांगा के परिवार से ​थी खीची
 इन्हीं के उपनाम पर पड़ा शहर व सीट का नाम
 विस क्षेत्र में किले की सियासत अब भी है प्रभावी
 पूर्व रियासत से जुड़े प्रियव्रत 3 बार हुए निर्वाचित
 474 साल पुराना है खिलचीपुर नगर का इतिहास
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खिलचीपुर सीट पर दांगी वोटरों का दबदबा
खिलचीपुर 1962 में अस्तित्व में आई। यहां अब तक हुए 13 चुनाव में कांग्रेस 8 बार तो बीजेपी 3 बार चुनाव जीती..एक बार जनता पार्टी ने जीत का स्वाद चखा तो शुरुआती चुनाव में निर्दलीय हरि सिंह पंवार ने विजय हासिल की….2 लाख 25 हजार 370 मतदाताओं वाले खिलचीपुर में दांगी वोटरों की संख्या 45 से 50 हजार बताई जाती है..दूसरा बड़ा तबका सोंधिया समाज का है…

इस वर्ग के करीब 35 हजार मतदाता इस क्षेत्र में हैं..इनके अलावा गुर्जर 15 हजार,ब्राह्मण 9 से 10 हजार,राजपूत,मुस्लिम करीब 5.5 हजार के आसपास हैं..जातिगत समीकरण की बात करें तो साफ है कि खिलचीपुर में दांगी मतदाताओं का दबदबा है..यही वजह है कि इस सीट से अब तक ज्यादातर विधायक इसी वर्ग से चुने गए..मौजूदा कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह भी इस वर्ग से हैं..जिन्होंने पिछले चुनाव में भाजपा के पूर्व विधायक हजारीलाल दांगी को करीब 30 हजार मतों से हराया था..
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खिलचीपुर में सवा दो लाख से अधिक मतदाता
 दांगी मतदाता बाहुल्य सीट है खिलचीपुर विस
 अब तक ज्यादातर विधायक इसी वर्ग से बने
 सोंधिया,गुर्जर,ब्राह्मण वोटरों को साधने पर जोर
 सभी को साधने बीजेपी ने बनाई नई रणनीति
 निकाय चुनाव नतीजों ने बदला क्षेत्रीय गणित
 बीजेपी की आकांक्षी सीटों में शामिल खिलचीपुर
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बीजेपी के लिए कठिन सीट रही खिलचीपुर

बीते दो दशक में चौथी बार सत्ता में लौटी बीजेपी के लिए खिलचीपुर कठिन सीट रही है..लेकिन अपनी 103 आकांक्षी सीटों की रणनीति के तहत उसने खिलचीपुर में भी नई बिसात बिछा दी है..मसलन, क्षेत्र के 15 हजार गुर्जरों को अपने पाले में लाने उसने ज्ञान सिंह गुर्जर का अपना जिलाध्यक्ष बनाया..पूर्व विधायक हजारीलाल दांगी अपने समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर ताकतवर नेता के तौर पर उभरे हैं..2013 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के ही प्रियव्रत सिंह को साढ़े 11 हजार मतों से शिकस्त दी थी..

साल 1998 में वह कांग्रेस से इस सीट पर विधायक रह चुके हैं बाद में कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थामा..ऐसे में पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच भी उनकी गहरी पैठ है..दूसरी ओर सोंधिया मतदाताओं को रिझाने में भी बीजेपी सफल नजर आती है..इसके चलते बीते साल हुए नगरीय निकाय चुनाव में क्षेत्र के अधिकांश निकायों में उसका कब्जा हुआ…

राज्य सरकार की नई योजना लाडली बहना भी क्षेत्र में मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकती है..

वहीं कांग्रेस के मौजूदा विधायक प्रियव्रत अपनी पुरानी रियासती साख के भरोसे हैं..पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार में उन्हें पहली बार मंत्री बनने का अवसर मिला..उर्जा जैसा अहम विभाग मिलने के बाद अपने क्षेत्र को ही बिजली संकट से निजात नहीं दिला सके..
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बदले हुए हैं क्षेत्र के सियासी समीकरण 

सूत्रों का दावा है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस के राजस्थान से नेता सचिन पायलट व मौजूदा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रचार का मोर्चा संभाला था..लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं..सिंधिया अब भाजपा में हैं तो राजस्थान में सचिन पायलट अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं.. लेकिन बीते 4 – 5 सालों में क्षेत्र की गाड़ गंगा कही जाने वाली नदी में काफी पानी बह चुका है—-.

इधर,पिछले चुनाव में अपने ही कार्यकर्ताओं को नाराज कर बैठे हजारीलाल दांगी ने भी वक्त की नजाकत को समझ कार्यकर्ताओं को साधा है..इस तरह देखा जाए तो 2023 के आगामी चुनाव के लिहाज से क्षेत्र के सियासी समीकरण बदले हुए हैं..बाकी खिलचीपुर का चुनावी  ऊंट किस करवट बैठेगा..इसके लिए चुनाव परिणाम तक इंतजार करना होगा

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खिलचीपुर विधानसभा सीट पर होती रही है बंपर वोटिंग
 2018 में सिंधिया,पायलट ने किया था कांग्रेस का प्रचार
 2023 में बदले हालात,सिंधिया अब भाजपा में,बने मंत्री
 सचिन पायलट भी हैं अपनी ही पार्टी कांग्रेस से नाराज
 खिलचीपुर की सियासत में राजस्थान ट्रेंड का रहा असर
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विकास के मुद्दों से अधिक चेहरों व दल का प्रभाव

क्षेत्र के मुद्दों की बात करें तो क्षेत्र में पेयजल एक बड़ी समस्या है… शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के मामले में भी यह क्षेत्र फिसड्डी है…स्कूली शिक्षा तो बदहाल है ही उच्च शिक्षा की स्थिति भी खराब है.. उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी के चलते छात्र बड़े शहरों का रुख करने को मजबूर हैं… शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल है…इसके अलावा बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है…लेकिन खिलचीपुर के अब तक के चुनाव परिणाम बताते हैं कि यहां विकास के मुद्दों से  अधिक चेहरों व दल का प्रभाव रहा है..बहरहाल,खिलचीपुर के मतदाता,अपने मताधिकार को लेकर काफी जागरूक हैं..पिछले यानी  2018 के चुनाव में ही इस सीट पर 85.94% मतदान हुआ..इसी तरह 2013 में 82.8% तो 2008 में 82.16% वोट पडे..

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कौन कब किस दल से जीता

1962 हरि सिंह पंवार              निर्दलीय

1967 प्रभु दयाल                  कांग्रेस

1972 प्रभु दयाल                  कांग्रेस

1977 नारायण सिंह पंवार        जनता पार्टी

1980 कन्हैयालाल दांगी          कांग्रेस

1985 कन्हैया लाल दांगी         कांग्रेस

1990 बेचारा सिंह पंवार         बीजेपी

1993 रामप्रसाद दांगी           कांग्रेस

1998 हजारीलाल दांगी          बीजेपी

2003 प्रियव्रत सिंह              कांग्रेस

2008 प्रियव्रत सिंह              कांग्रेस

2013 हजारीलाल दांगी         बीजेपी

2018 प्रियव्रत सिंह             कांग्रेस

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