रवि अवस्थी ,भोपाल। राजगढ जिले की सारंगपुर विधानसभा (Sarangpur Vidhansabha of Rajgarh district) भाजपा की परंपरागत सीट रही है..अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित जिले की इस एक मात्र सीट के मतदाता उस वक्त भी साथ रहे जब एट्रोसिटी एक्ट को लेकर अन्य जगह उबाल आया हुआ था..
विशेषकर ग्वालियर,चंबल Gwalior -Chambal में भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा ..नतीजतन,2018 के चुनाव में भी सारंगपुर भाजपा के खाते में ही रही और दस में सात चुनाव जीत चुके कोठार परिवार के कुंवर कोठार विधायक चुने गए…कांग्रेस को अब तक यहां सिर्फ दो बार सफलता मिली है..वह भी एक बार भाजपा द्वारा प्रत्याशी बदले जाने के कारण..2023 के चुनाव में सीट का गणित क्या रहने वाला है..इसे समझने से पहले जानते है..इस सीट का इतिहास
…………………………………………. वर्ष 1977 में अस्तित्व में आई सारंगपुर सीट अब तक 10 में 7 बार जीता कोठार परिवार पहला चुनाव निर्दलीय जीते थे अमर कोठार दो बार से अमर सिंह के बेटे कुंवर हैं MLA बीजेपी को 8, कांग्रेस को 2 बार मिली जीत
………………………………………….. इसके बाद कोठार परिवार ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा…
वर्ष 1977 में अस्तित्व में आई सारंगपुर सीट पर अब तक दस बार आम चुनाव हुए हैं..अब तक के चुनाव परिणामों पर नज़र डालें तो ज्यादातर समय यह सीट सारंगपुर निवासी कोठार परिवार के पास ही रही है..पहला चुनाव ही इस परिवार के अमर सिंह कोठार ने निर्दलीय जीता ..तब अंचल में जनसंघ की पैठ बनी थी..जनसंघ की विचारधारा वाले कोठार ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और कांग्रेस के हजारी शिवजी को 5 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी..इसके बाद कोठार परिवार ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा…
1980 में जनसंघ भारतीय जनता पार्टी में विलय हुआ तब से अमर सिंह भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर जीतते रहे..यह सिलसिला एक बार 1985 में और दूसरी बार 1998 में उस वक्त टूटा जब भाजपा ने अमर सिंह की जगह केसरी नारायण को अपना प्रत्याशी बनाया..उम्मीदवार बदलने से बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा और वह चुनाव हार गई..तब इस सीट पर दूसरी बार कांग्रेस को जीत मिली..उसके प्रत्याशी कृष्ण मोहन मालवीय ने भाजपा के केसरी नारायण को करीब दो हजार मतों से पराजित किया.. वहीं 1985 में अमर सिंह कोठार को भी सिर्फ एक बार पराजय का सामना करना पडा..तब कांग्रेस के हजारीलाल ने उन्हें 4,167 मतों से शिकस्त दी थी..
लेकिन 1990 के अगले ही चुनाव में उन्होंने वापसी की और कांग्रेस के भैयालाल को 16 हजार 351 वोट से पराजित किया था..1993 और 2003 में भी वह विधायक चुने गए ..लेकिन 2008 में चुनाव से चंद माह पहले ही विधायक रहते उनका निधन हो गया..तब भाजपा ने गौतम टेटवाल को अपना प्रत्याशी बनाया..इस चुनाव में भी बीजेपी उम्मीदवार ने कांग्रेस के हीरालाल मालवीय को 16 हजार से अधिक मतों से हराया..2013 के चुनाव में स्वर्गीय अमर सिंह के पुत्र कुंवर जी कोठार चुनाव लडने योग्य हुए तो भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया और बीते दो चुनाव से वह लगातार विधायक हैं..
सारंगपुर का जातीय समीकरण कुल मतदाता 01,98,016 धाकड वोटर 35से 38 हजार बलाई 25 से 26 हजार अनु.जाति 27 से 28 हजार मुस्लिम लगभग 25 हजार ब्राह्मण लगभग 12 हजार जैन दो से तीन हजार
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अंतर्कलह ने कराया विधायक का विरोध
सारंगपुर के अब तक की सियासी तस्वीर से साफ है कि इस सीट के लिए जातिगत समीकरण कोई मायने नहीं रखते..इस सीट पर कोठार परिवार व बीजेपी का प्रभाव साफ नजर आता है..जिसने दस में से आठ बार चुनाव जीता..क्षेत्र में पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं,बेरोजगारी पारंपरिक मुददे हमेशा रहे,लेकिन चुनाव परिणाम इनसे कभी प्रभावित नहीं हुए..जीत के लिए चेहरा व पार्टी ही मतदाताओं की वरीयता में रही..
2023 के चुनाव के लिए बीजेपी में टिकट को लेकर पूर्व विधायक टेटवाल सहित अन्य नेता भी सक्रिय हैं..इसी तरह कांग्रेस में पूर्व विधायक कृष्ण मोहन के अलावा महेश मालवीय व अन्य कुछ नाम दावेदारों की सूची में शामिल है..2013 की तुलना में 2018 में कुंवर जी कोठार की लीड 18 हजार से घटकर 4 हजार 381 रह गई थी..हाल ही में विकास यात्रा के दौरान उन्हें कुछ जगह ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पडा..हालांकि ,इसके पीछे अंतरकलह बड़ी वजह बताई जाती है—ऐसे में बीजेपी किसी और नाम पर विचार करेगी या कुंवरजी को ही दोहराई गई..इसके लिए चुनाव तक करना होगा इंतजार..
…………………………………… सारंगपुर में कब किसके सिर सजा विधायक का ताज 1977 अमर सिंह कोठार निर्दलीय 1980 अमर सिंह कोठार भाजपा 1985 हजारी लाल कांग्रेस 1990 अमर सिंह कोठार भाजपा 1993 अमर सिंह कोठार भाजपा 1998 कृष्ण मोहन मालवीय कांग्रेस 2003 अमर सिंह कोठार भाजपा 2008 गौतम टेटवाल भाजपा 2013 कुंवर कोठार भाजपा 2018 कुंवर कोठार भाजपा