

प्रदेश में भाजपा के कई विधायक ही नहीं,सांसद भी आगामी चुनाव में अपनी सीट बदलने को लेकर आतुर हैं।
चुनाव से पहले यूं तो हर प्रमुख दल प्रदेश की नब्ज टटोलने अपने स्तर पर सर्वे करता रहा है।
कोतमा से कांग्रेस विधायक सुनील सर्राफ अपने पद का जश्न कुछ अलग अंदाज में मना रहे हैं। पहले वह एक महिला यात्री से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी बने और अब नए साल का जश्न तमंचे की फायरिंग के साथ मनाने पर।
अपने कारनामों से अपनी विधायकी को खतरे में डाल चुके प्रदेश के तीन विधायक अदालती सहारे के अलावा वक्त की मांग को देखते हुए भी बेफिक्र बताए जाते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मप्र को नक्सल मुक्त बता चुके हैं. लेकिन बीते कुछ महीनों से नेपानगर व खालवा के जंगलों में अतिक्रमणकारियों की जो गतिविधियां जारी हैं, इन्हें देखते हुआ यह आशंका जाहिर की जाती रही है कि जल्दी ही इस मामले में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कहीं सम्बंधित जिलों की पहचान न बदल जाए। फिलहाल तो अतिक्रमणकारी बेखौफ ,प्रशासन मौन और कटते जंगलों से ग्रामीण त्रस्त हैं ।