वर्ष 2022 में मध्य प्रदेश : आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़े कदम

कोरोना की तीसरी लहर के भय के साथ शुरू हुए वर्ष 2022 के दौरान देश के ह्रदय स्थल, मध्यप्रदेश में भी कई उतार -चढ़ाव आए। सियासी सरगर्मियां भी खूब रहीं। तमाम दिक्कतों के बावजूद, मप्र वर्ष के दौरान विकास के पथ पर न केवल अग्रसर हुआ ,बल्कि अनेक उपलब्धियां अर्जित कर देश में अव्वल भी बना। इसका श्रेय प्रदेश की शिवराज सरकार ,कर्तव्यनिष्ठ प्रशासनिक तंत्र ,कर्मठ किसान एवं उद्यमियों को जाता है।

रवि अवस्थी,भोपाल। वर्ष 2022​ ​की शुरुआत कोरोना की तीसरी लहर के भय के बीच शुरू हुई। कोविड की पहली व दूसरी लहर के कटु अनुभव को देखते हुए प्रदेश की शिवराज सरकार ने तीसरी लहर को लेकर पूरा एहतियात बरता।

इलाज की बेहतर सुविधा से लेकर सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ रोकने विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध भी लगाए गए। विवाह समारोह व अंतिम संस्कार में शामिल होने वालों की संख्या सीमित कर ढाई सौ व पचास की गई,लेकिन तीसरी लहर को बे​​असर देखते हुए अगले ही महीने यानी 14 फरवरी को तमाम प्रतिबंध हटा लिए गए। मुख्यमंत्री शिवराज की सूझबूझ,स्थिति पर पैनी नजर व निरंतर समीक्षा कर अधिकारियों को दिए गए दिशा​-​निर्देशों का ही नतीजा रहा कि फाल्गुन आते​-​आते बाजार एक बार फिर गुलजार हुए। कोविड के कारण थमी आर्थिक गतिविधियों ने पुनः रफ्तार पकड़ी  कल कारखानों के थमे पहिए पुनः गतिमान हुए।

कृषि प्रधान मप्र को एक बार फिर खेती​-​किसानी का संबल मिला।​ ​चैत्र का महीना किसानों के लिए खुशहाली लेकर आया। बंपर पैदावार के चलते प्रदेश की कृषि विकास दर 19.7​ ​प्रतिशत दर्ज की गई। प्रदेश के विकास दर की बात की जाए तो वर्षांत तक यह 19.74 प्रतिशत तक पहुंची जो देश में सर्वाधिक है। देश की कुल जीडीपी में मप्र की भागीदारी 3.6 प्रतिशत से बढ़कर 4.6 प्रतिशत हुई।

ओबीसी को आरक्षण बना मुद्दा,जीती सरकार
प्रदेश में पिछड़ा  वर्ग को 27 फीसद आरक्षण दिए जाने का मुद्दा वर्ष 2022 में भी छाया रहा। बीते वर्ष के अंतिम माह में आयोजित सदन में शिवराज सरकार ने पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के साथ ही पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव कराने का संकल्प पारित किया। इसी आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग ने जनवरी में पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू की,लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव पर रोक लगाते हुए ओबीसी को अतिरिक्त आरक्षण दिए बिना ही चुनाव कराए जाने का आदेश दिया।

न्यायालय का यह आदेश सरकार के लिए एक बड़ा झटका था,लेकिन आरक्षण  के साथ ही चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध शिवराज सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की।

तर्क दिया गया कि सरकार ने पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन कर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग की आबादी का आकलन किया है। फैसला सरकार के पक्ष में आया। संभवतया यह पहला मौका रहा जब मानसून के बीच न केवल पंचायत बल्कि नगरीय निकायों के चुनाव भी संपन्न कराए गए। इसमें सत्तारूढ़ दल भाजपा को ऐतिहासिक जीत हासिल हुई।

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जनजातीय वर्ग भी रहा फोकस में
सियासी नजरिए से साल 2022 जाति आधारित राजनीति के लिए जाना जाएगा। प्रदेश के पिछड़े ही नहीं जनजातीय वर्ग भी राजनीति के केंद्र में रहे। विशेषकर पिछले आम चुनाव में ज्यादातर जनजातीय विधानसभा सीटें गंवा चुकी भारतीय जनता पार्टी ने ​वर्ष के दौरान ​जनजातीय वर्ग को रिझाने के हर संभव जतन  किए। शुरुआत अप्रैल में इस वर्ग से जुड़े वनवासियों को तेंदूपत्ता लाभांश वितरण के साथ की गई। जंबूरी मैदान में आयोजित विशाल सम्मेलन में स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए वन अधिकार,वन प्रबंधन में भागीदारी सहित अनेक घोषणाएं की और शिवराज सरकार ने इन्हें जमीन पर उतारने का काम किया।

यह पहला मौका था जब 800 से अधिक वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदलकर संबंधित ग्रामीणों को एक बड़ी राहत दी गई। जनजाति वर्ग के नायकों को नवाजने का सिलसिला अनवरत जारी रहा। महाकौशल क्षेत्र में जनजातीय वर्ग के प्रतापी राजा शंकर शाह,रघुनाथ शाह,भीमा नायक,रानी दुर्गावती,क्रांतिकारी टंट्या भील (Photo)की प्रतिमा स्थापना से लेकर इनकी जयंती व बलिदान दिवस कोई मौका ऐसा नहीं रहा जब शिवराज सरकार ने इन्हें बिसराया हो,बल्कि प्रत्येक अवसर पर उन्होंने प्रत्येक आयोजन में बढ़​-​चढ़कर न केवल भागीदारी की,बल्कि कई मौके तो ऐसे भी रहे जब जनजातीय लोक कलाकारों के रंग में भी वह रंगे नजर आए।

आत्मीय लगाव प्रदर्शित किया

मुख्यमंत्री शिवराज ने मांदल की थाप पर उनके साथ नृत्य भी किया तो उनके वाद्य यंत्रों पर हाथ भी आजमा कर उनसे अपना आत्मीय लगाव प्रदर्शित किया। सितंबर में राजा शंकर शाह,रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में देश के उप.राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने ​पहली बार ​शिरकत कर जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए शिवराज सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

पेसा एक्ट का क्रियान्वयन एक बड़ी  उपलब्धि
जनजातीय वर्ग के लिए शिवराज सरकार ने प्रदेश के आदिवासी विकास खंडों में गत 15 नवंबर से पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार यानी पेसा एक्ट​-96​ को लागू करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया। देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं इसे लागू किए जाने की घोषणा भोपाल में आयोजित एक समारोह में की।

इस एक्ट को न केवल लागू किया गया बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन व जनजातीय वर्ग को इसकी बारीकियां व उनके अधिकार समझाने का दायित्व भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संभाला। इससे पहले जनजातीय वर्ग ​​के युवाओं को स्व​-​रोजगार से जोड़ने उन्हें राशन परिवहन का दायित्व सौंपा जाना,जनजातीय गौरव यात्राएं निकालकर जन​​नायकों का पुण्य स्मरण,जनजातीय वर्ग की लोक कला,संस्कृति के  उत्थान की दिशा में भी प्रयास इस दौरान जारी रहे।

सुदूर गांवों तक पहुँचने वाले पहले राज्यपाल​

जनजातीय वर्ग में व्याप्त सिकल सेल,एनीमिया,जैसी बीमारी को जड़ से खत्म करने,उनमें शिक्षा के प्रति अलख जगाने में  प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल की भूमिका भी वर्ष के दौरान महत्वपूर्ण रही।

वह प्रदेश के ऐसे पहले राज्यपाल हैं जो ​​सुदूर गांवों तक आदिवासियों के बीच पहुंचे और और अब तक के  अपने कार्यकाल में 40 से अधिक जिलों का दौरा कर उनकी समस्याओं को सुना,समझा और उन्हें दूर करने,करवाने का जतन भी किया।

सियासत में हिंदुत्व एजेंडे का पुट
वर्ष 2022 सियासत में हिंदुत्व के एजेंडे के पुट के लिए भी जाना जाएगा। राज्य सरकार ने पहली बार पत्थरबाज,लव जिहाद,जबरन धर्मांतरण करने वाले व दंगाइयों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। इन कृत्यों में लिप्त आरोपियों के खिलाफ न केवल कड़ी कार्यवाही  हुई बल्कि बुल्डोजर से उनके आशियाने भी ध्वस्त कर उन्हें सबक सिखाया गया।

यही नहीं ​,​मिलावटखोर,चिटफंड कंपनियों,भू-माफिया व अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए गए। इसके चलते प्रदेश में वर्ष के दौरान मिलावट के 16 सौ से अधिक प्रकरण दर्ज कर साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की गई। डेढ़ सौ के खिलाफ रासुका की कार्यवाही हुई। चिटफंड माफिया की  नकेल कस डेढ़  लाख निवेशकों को उनके एक हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि वापस कराकर राहत प्रदान की गई।

राहुल की यात्रा ने गरमाई सियासत
साल के अंतिम महीनों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोडो यात्रा ने मप्र में भी आमद दी। 13 दिवसीय उनकी यह यात्रा आधा दर्जन जिलों से होकर गुजरी और साढे तीन सौ किमी से अधिक का सफर मप्र में तय किया। यात्रा के रोडमैप को देखा जाए तो कांग्रेस का फोकस भी आदिवासी बाहुल्य जिलों यानी जनजातीय वर्ग पर रहा। बुरहानपुर,खंडवा,खरगोन,इंदौर,उज्जैन,आगर ​-​मालवा होती हुई यात्रा ने राजस्थान में प्रवेश किया।

राहुल की यात्रा ने जहां पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार किया , वहीं लंबे अरसे से सोशल मीडिया की राजनीति करते रहे प्रदेश कांग्रेस के बुजुर्ग नेताओं को थका दिया। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के समक्ष प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का यह कथन कि हम तो सात दिन से मर रहे हैं,इसकी बानगी है।बहरहाल,यात्रा चर्चा में रही। कभी पाकिस्तान समर्थक नारे तो कभी राहुल के न थकने वाले अंदाज को लेकर।

इन “माननीयों ” ने लजाया !
सार्वजनिक जीवन की राजनीति करने वाले जन​ ​प्रतिनिधियों को लोग अपना आदर्श मानते हैं,लेकिन वे ही यदि महिलाओं से छेड़छाड़ ,बलात्कार,लूट,धोखाधड़ी ,​’​रेपिस्ट​’​ जैसे संगीन आरोपों से घिरें हों तो उन्हें चुनने वाले मतदाताओं का निराश होना स्वाभाविक है।

प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक विधायक  वर्ष के दौरान ऐसे ही संगीन आरोपों के दायरे में रहे,बल्कि तीन विधायकों की सदन की सदस्यता ही ​अदालती आदेश के बाद ​खतरे में पड़  गई । बाकी कतार में हैं। ​

अंततः अविश्वास प्रस्ताव लाने में सफल हुई कांग्रेस
लचर ही सही,बीते एक दशक में तीसरे प्रयास में कांग्रेस शिवराज सरकार के खिलाफ सदन के शीतकालीन सत्र में अविश्वास प्रस्ताव लाने में सफल रही। लेकिन इस प्रस्ताव के प्रस्तुतीकरण के दौरान भी वह गुटबाजी से बच नहीं सकी।

नए नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का साथ नहीं मिला। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वह पूरे समय सदन से नदारद रहे। इसे लेकर सत्ता पक्ष भाजपा ने तंज भी कसे और प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस सदस्यों को आड़े हाथों भी लिया।

 बहरहाल,सरकार ने विपक्ष को प्रस्ताव पर चर्चा का भरपूर अवसर दिया। ​​संभवतया यह भी पहला मौका है जब अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सदन की कार्यवाही रात पौने एक बजे तक चली हो।

प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में मुख्यमंत्री शिवराज ने पूरे आत्मविश्वास के साथ विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज करते हुए सरकार की उपलब्धियों को बयां किया और पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार की असफलताएं गिनाते हुए कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।

खूब चला अटकलों का दौर
वर्ष 2022 सियासी अटकलों व शिगूफे बाजी के लिए भी जाना जाएगा। वर्ष के दौरान शायद ही ऐसा कोई महीना गुजरा हो जब शिवराज सरकार के बदलने की अटकलें न रही हो,लेकिन हर अटकलों को​ ​नजरअंदाज ​व मिथ्या साबित कर शिवराज और मजबूत बनकर उभरे।

​ ​उपलब्धियों का वर्ष​ 2022​

वर्ष ​​2022 में कोरोना ने साल के शुरू व अंत दोनों वक्त डराया। बावजूद इसके यह वर्ष मध्य प्रदेश के लिए उपलब्धियों भरा रहा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीते की आमद व अगले माह ही प्रधानमंत्री द्वारा उज्जैन में श्री महाकाल लोक का लोकार्पण प्रमुख है। मध्य प्रदेश ही नहीं देश में चीते 72 साल बाद लौटे। इनके पुनर्वास के लिए श्योपुर जिले के कूनो का चुना जाना मध्य प्रदेश के लिए गौरव प्रदान करने वाला है। इसने मध्य प्रदेश को चीता व लेपर्ड स्टेट के बाद अब चीता स्टेट का दर्जा भी दिलाया।

सनातन के ललाट पर विजय का तिलक…श्री महाकाल लोक

कमोबेश ऐसा ही गौरव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट “श्री महाकाल लोक” के पहले चरण के लोकार्पण से प्रदेश को हासिल हुआ। इस लोक ने उज्जैन को देश ही नहीं दुनिया में एक बार पुनः चर्चित किया और अब लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रति माह उज्जैन पहुंच रहे हैं।

उपलब्धियों की फेहरिस्त में सुशासन के इंडेक्स में मप्र का देश में पहला स्थान,इंदौर का स्वच्छता में लगातार छठवीं बार देश में पहले स्थान पर रहना,प्रदेश के 11 शहरों के इस दौड़ में आगे रहना, केंद्र प्रवर्तित व प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं में मध्य प्रदेश को अव्वल रहना व प्रदेश की अनेक लोकप्रिय  योजनाओं को अन्य राज्यों द्वारा अपनाया जाना आदि ऐसी उपलब्धियां हैं जो इस हृदय प्रदेश को अनुकरणीय  बनाती  हैं।

मप्र को पहली बार मिला यह गौरव

नया वर्ष मेगा इवेंट के  लिए भी जाना जाएगा। यह पहला मौका है जब मप्र में अनेक राष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी का गौरवमयी दायित्व मिला है। प्रस्तावित गतिविधियों में आगामी 8 से 10 जनवरी तक इंदौर में आयोजित होने वाला प्रवासी भारतीय सम्मेलन,11-12 जनवरी को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट,31 जनवरी से 11 फरवरी तक  होने वाले ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ ,फरवरी में इंदौर व खजुराहो सहित आठ स्थानों पर होने वाली जी-20 देशों की बैठक ऐसे ही आयोजन हैं।

फरवरी में ही महाशिवरात्रि से चैत्र प्रतिपदा तक उज्जैन में आयोजित होने वाला विक्रमोत्सव होगा। तो अप्रैल-मई में ओंकारेश्वर बांध पर निर्माणाधीन दुनिया के सबसे बड़े तैरने वाले सौर ऊर्जा संयंत्र तो अगस्त में ओंकारेश्वर में  मान्धाता पर्वत  पर निर्माणाधीन अद्वैत वेदांत संस्थान व आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस‘  की अनुपम सौगात मिलने की संभावना है।​

बदलेगी तकदीर व तस्वीर

डबल इंजन वाली सरकारों का लाभ मध्य प्रदेश को भरपूर मिला। रीवा,सीधी के बीच मोहनिया टनल की शुरुआत,नर्मदा एक्सप्रेस ​-​वे,अटल एक्सप्रेस​-​ वे,नेशनल हाईवे का विस्तार,चौड़ीकरण,एक दर्जन से अधिक स्थानों पर रोप​-​वे,ओवर ब्रिज,जल जीवन मिशन में हर घर नल से जल,प्रधानमंत्री आवास योजना में मौजूद साल में ही​ लाखों​ गरीब  ​परिवारों को पक्की छत नसीब होना,ऐसी अनेक सौगातें मध्य प्रदेश को वर्ष के दौरान हासिल हुईं। ये सिलसिला अनवरत जारी है,जो आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश की तकदीर व तस्वीर बदलने का काम करेगी।

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