रिहंद जलाशय पर प्रदूषण का खतरा, थर्मल पावर इकाइयां कटघरे में

मनु कुमार शाह,सिंगरौली/भोपाल

मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा पर स्थित रिहंद जलाशय में बढ़ता प्रदूषण जलीय जीवों के लिए मुसीबत बन गया है। विशेषकर प्रदूषित पानी से मछलियों का जीवन संकट में है।

बताया जाता है कि प्रदूषित पानी के कारण हाल ही में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत भी हुई।
जलाशय में बढ़ते प्रदूषण से इलाके में पर्यावरणीय संकट भी पैदा होने के आसार हैं। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और चिंता का माहौल है।

“उद्योगों का पानी बना वजह?”

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आसपास संचालित ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाला उपयोग किया गया पानी लगातार रिहंद जलाशय में छोड़ा जा रहा है।

लोगों का कहना है कि इससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और जलीय जीवों पर इसका असर पड़ रहा है। हालांकि अभी तक मछलियों की मौत की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी ने भी जताया विरोध

सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी से जुड़े एनजीटी याचिकाकर्ताओं ने भी रिहंद जलाशय में राखड़ और कोयला युक्त गंदे पानी के मिलने पर नाराजगी जताई है।

वाहिनी की टीम ने रविवार को म्योरपुर ब्लॉक के डोंगियानाला,बेलवादह, अनपरा, बीना, शक्तिनगर,खड़िया और बलिया नाला सहित विभिन्न प्रदूषण प्रभावित स्थानों का स्थलीय दौरा किया।

इसमें वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद, क्षेत्रीय संयोजक एवं ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल, बेचन, कुसुम, सुनीता, विश्वनाथ, रमेश और अशोक शामिल रहे।

वाहिनी टीम ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि डोंगिया नाला में केमिकल्स और दुर्गंध युक्त पानी सीधे जलाशय में जा रहा है। बेलवादह में हजारों लीटर प्रति मिनट राखड़ युक्त पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि बलिया नाला की स्थिति और भी गंभीर है, उसका पानी छूने लायक भी नहीं है।

संयोजक रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि अप्रैल के पहले सप्ताह में जिला प्रशासन ने प्रदूषण की रोकथाम के प्रयासों पर एनजीटी में 51 पेज की रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल अलग है।

हजारों लोगों की पेयजल जरूरत जुड़ी

रिहंद जलाशय का पानी सिंगरौली नगर निगम क्षेत्र के अलावा NTPC, NCL और अन्य औद्योगिक टाउनशिप में रहने वाले हजारों लोगों द्वारा उपयोग किया जाता है।

ऐसे में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत ने पेयजल की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

पहले भी विवादों में रहा रिहंद जलाशय

यह पहला मौका नहीं है जब रिहंद जलाशय प्रदूषण को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले फ्लाई ऐश डैम से राख पानी में मिलने की घटनाओं को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं।

उस समय भी पर्यावरणीय नुकसान और जल प्रदूषण को लेकर जांच और कार्रवाई की मांग हुई थी।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने जताई चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जल गुणवत्ता की जांच और प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो इसका असर केवल जलीय जीवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास की आबादी और पर्यावरण पर भी पड़ सकता है।

NTPC का पक्ष: “रिहंद जलाशय प्रदूषण से संयंत्र का संबंध नहीं”

रिहंद जलाशय में मछलियों की मौत और जल प्रदूषण के आरोपों के बीच NTPC प्रबंधन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

NTPC के प्रवक्ता शंकर सुब्रमण्यम ने कहा कि संयंत्र की वजह से रिहंद रिजर्ववायर के प्रदूषित होने के आरोप तथ्यहीन हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को पुराना बताते हुए कहा कि इसे वर्तमान घटना से जोड़कर पेश किया जा रहा है।

“सभी अपशिष्टों का प्लांट परिसर में ही उपचार”

प्रवक्ता के मुताबिक NTPC संयंत्र में निकलने वाले प्रदूषित जल और अवशिष्ट पदार्थों का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सभी अपशिष्टों को संयंत्र परिसर के भीतर ही ट्रीट किया जाता है और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाता है।NTPC प्रवक्ता ने कहा कि संयंत्र संचालन के दौरान पर्यावरण सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया जा रहा है।

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