वरदा चतुर्थी के दिन गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ बदल देगा आपकी किस्मत

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वरदा चतुर्थी के दिन गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ बदल देगा आपकी किस्मत
‘वरदा चतुर्थी’ के दिन पर की गई पूजा-अर्चना करने से साधक को सामान्य दिनों से कई गुना ज्यादा फल मिलता है। वरदा चतुर्थी की पूजा में आप गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ जरूर करें, जो भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत पवित्र, शक्तिशाली और प्रभावशाली वैदिक स्तोत्र है। ऐसे में आपको इसके पाठ से गणेश जी की कृपा तो मिलती ही है, साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि का भी आगमन होता है।

वरदा चतुर्थी पर पाठ और पूजा की विधि
इस विशेष दिन पर गणपति अथर्वशीर्ष का पूरा लाभ पाने के लिए इन चरणों का पालन करें :प्रातः स्नान और स्थापना: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। घर के मंदिर को साफ कर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें。पंचामृत स्नान: बप्पा को दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण (पंचामृत) से स्नान कराएं。प्रिय चीजें अर्पित करें: पूजा में दूर्वा (हरी घास), लाल फूल, मोदक और गुड़-चना जरूर चढ़ाएं。गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ: शुद्ध मन और आस्था के साथ श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें। इसे संभव हो तो 11 बार करें या एक बार सच्चे मन से जरूर पढ़ें

वरदा चतुर्थी व्रत के नियममंत्र जाप:
पाठ के साथ-साथ भगवान गणेश के मूल मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें。संध्या पूजा: दिनभर व्रत रखने वाले श्रद्धालु शाम को प्रदोष काल में गणेश जी की आरती करें।चंद्र दर्शन से बचाव: इस दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना जाता है, इसलिए शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत का समापन करें

किन समस्याओं का समाधान मिलता है?
रुकावटें दूर होना: यदि आपके काम बार-बार अटक रहे हैं या मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल रही, तो यह पाठ मार्ग के सभी अवरोध समाप्त करता है
आर्थिक लाभ: यह कर्ज से मुक्ति दिलाता है और व्यापार व करियर में वृद्धि करता है