हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना वाग्देवी मंदिर,मस्जिद के लिए सरकार से अलग जमीन मांगने की सलाह

124

इंदौर।

धार की ऐतिहासिक भोजशाला (Bhojshala) को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए इसे वाग्देवी मंदिर माना है।

कोर्ट ने अपने निर्णय में पुरातात्विक साक्ष्यों, ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट और अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाया।

अदालत ने कहा कि परिसर में सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र होने के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं।

कोर्ट बोला- धरोहरों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने कहा कि प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा करना हर सरकार का संवैधानिक दायित्व है।

फैसले में गर्भगृह, देव प्रतिमाओं और धार्मिक आस्था से जुड़े स्थलों के संरक्षण पर भी जोर दिया गया।

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि मुस्लिम पक्ष मस्जिद के लिए दावा करता है तो वह सरकार से वैकल्पिक भूमि की मांग कर सकता है।

मस्जिद के लिए अलग जमीन मांगने की सलाह

न्यायालय ने ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। हाईकोर्ट ने ASI का 2003 का वह आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें ASI ने भोजशाला में हिंदुओं को पूजा का अधिकार नहीं दिया था।

उस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया था।

न्यायालय ने भोजशाला को कमाल मौला मस्जिद बताते रहे मुस्लिम पक्ष को कोर्ट ने सरकार से मस्जिद के लिए अलग जमीन मांगने को कहा है।

मुस्लिम और जैन पक्ष जाएंग सुप्रीम कोर्ट 

फैसले के बाद धार शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि वे निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन इसकी कानूनी समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने पैरवी की थी।

वहीं जैन समाज की ओर से एडवोकेट प्रीति जैन ने कहा कि भोजशाला से जुड़ी तीर्थंकर प्रतिमाओं के अवशेष आज भी ब्रिटिश म्यूजियम में होने का दावा किया गया है। जैन समाज भी अपने अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा।

हिंदू पक्ष ने पहले ही दायर की कैविएट

संभावित अपील को देखते हुए हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है। याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह विशेन की ओर से दाखिल कैविएट में कहा गया है कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ किसी भी याचिका पर हिंदू पक्ष को सुने बिना आदेश न दिया जाए।

मुस्लिम समाज ने कहा- जुमे की नमाज जारी रहेगी

कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि मुस्लिम समाज हर शुक्रवार को जुमे की नमाज पढ़ता रहा है।

आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा। उनका दावा है कि करीब 700 वर्षों से यहां नमाज अदा की जा रही है।

98 दिन चला था ASI का वैज्ञानिक सर्वे

भोजशाला विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब 2024 में ASI ने परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया।

इसके बाद वसंत पंचमी 2026 पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी। अप्रैल से मई 2026 तक हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई चली, जिसके बाद यह फैसला आया।

दोनों पक्षों ने रखे थे अलग-अलग तर्क

हिंदू पक्ष ने भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और शिक्षा केंद्र बताते हुए शिलालेख, स्थापत्य अवशेष, ऐतिहासिक ग्रंथ और पूजा परंपरा का हवाला दिया।

वहीं मुस्लिम पक्ष ने इसे लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में होने की बात कहीउसने ASI सर्वे की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

फैसले के बाद धार में हाई अलर्ट

फैसले के बाद धार शहर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है।

भोजशाला परिसर के बाहर बैरिकेडिंग कर पुलिस बल तैनात किया गया।

जिला प्रशासन ने शहर में 12 लेयर सुरक्षा व्यवस्था लागू की है।

करीब 1200 पुलिसकर्मी, रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पुलिस ने शहर में फ्लैग मार्च भी निकाला।