पीएम की ‘ईंधन बचाओ’ अपील पर MP में भारी पड़ रहा नेताओं का शक्ति प्रदर्शन

मनु कुमार,सिंगरौली/भोपाल
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ईंधन बचत, सादगी और अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में कुछ नवनियुक्त राजनीतिक पदाधिकारी इस संदेश के उलट शक्ति प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं।

भिंड में 100 से ज्यादा वाहनों के काफिले के साथ निकले भाजपा किसान मोर्चा नेता सज्जन सिंह यादव को पार्टी ने पद से हटा दिया, लेकिन इसके बावजूद सिंगरौली से भोपाल तक बड़े-बड़े काफिलों का सिलसिला जारी है। अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या संगठन की तरह सरकार भी ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाएगी?

पीएम और सीएम ने घटाए काफिले, नेता नहीं मान रहे सलाह

खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी अपील पर खुद अमल करते हुए अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम की है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों ने भी ईंधन बचत के संदेश का पालन करते हुए अपने काफिलों को सीमित किया।

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर तो ई-स्कूटी से मंत्रालय पहुंचकर अलग संदेश देते नजर आए। इसके बावजूद निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्त नए पदाधिकारी लगातार बड़े काफिलों के साथ शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।

18 दिन में ही चली गई कुर्सी

भिंड भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष बनाए गए सज्जन सिंह यादव बुधवार को 100 से अधिक लग्जरी वाहनों के काफिले के साथ शहर में निकले थे।

पदभार ग्रहण के दौरान ट्रैफिक जाम, तेज हॉर्न और नारेबाजी से आम लोग परेशान हुए। मामला बढ़ने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने उन्हें पद से हटा दिया।

नियुक्ति के महज 18 दिन बाद हुई यह कार्रवाई प्रदेश की राजनीति में बड़ा संदेश मानी जा रही है।

सिंगरौली में 200 वाहनों का काफिला

भिंड मामले के अगले ही दिन सिंगरौली विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल करीब 200 वाहनों के काफिले के साथ पदभार ग्रहण करने पहुंचे। (See above Video)

मोरवा से बैढ़न तक करीब 27 किलोमीटर लंबी स्वागत यात्रा निकाली गई। जगह-जगह समर्थकों ने स्वागत किया, लेकिन इस दौरान शहर में कई स्थानों पर जाम लग गया। एक जगह एंबुलेंस भी लंबे समय तक ट्रैफिक में फंसी रही।

सवाल उठे तो समर्थकों पर डाली जिम्मेदारी

विवाद बढ़ने पर वीरेंद्र गोयल ने कहा कि वे खुद ई-रिक्शा में निकले थे और काफिला कार्यकर्ताओं का उत्साह था।

हालांकि स्वागत यात्रा के दौरान वे खुली कार में लोगों का अभिवादन करते दिखाई दिए, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

भोपाल में भी दिखा शक्ति प्रदर्शन

इससे पहले मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर भी उज्जैन से भोपाल तक बड़े काफिले के साथ पहुंचे थे।

वहीं खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष राकेश सिंह जादौन भी विदिशा से समर्थकों और कारों के लंबे काफिले के साथ भोपाल आए।

दोनों नेताओं ने ई-रिक्शा में बैठकर सादगी का संदेश देने की कोशिश जरूर की, लेकिन पीछे चलता भारी वाहन काफिला चर्चा का विषय बन गया।

अब सरकार के रुख पर नजर

भिंड में संगठनात्मक कार्रवाई के बाद अब निगाहें राज्य सरकार पर टिक गई हैं। राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सवाल उठ रहे हैं कि क्या निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्त पदाधिकारियों के मामलों में भी इसी तरह सख्ती दिखाई जाएगी।

यदि सरकार ऐसा कदम उठाती है, तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि पार्टी और सरकार दोनों ही पीएम मोदी की अपील को गंभीरता से ले रहे हैं।

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