राजधानी के आसपास वन्यजीवों के शिकार और अवैध मांस कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले में वन विभाग के एक सेवानिवृत्त रेंजर की संलिप्तता सामने आई है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बीनागंज में दबोचे गए थे शिकारी
सूत्रों के अनुसार, बीनागंज सर्किल में वन अमले ने दो दिन पहले कार्रवाई करते हुए भोपाल के पांच शिकारियों को नीलगाय का शिकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
पकड़े गए आरोपियों में मुईज़ अली, तनवीर, फरहान खान, मोहसिन और सागर सिंह राजपूत शामिल हैं। यह सभी भोपाल के रहवासी बताए गए हैं।
आरोपियों के पास से जब्त हुए हथियार,मांस बीनागंज वन अमले ने आरोपियों के पास से शिकार में उपयोग सामग्री व मृत नीलगाय का मांस व उसके कटे हुए अंग भी मौके पर बरामद किए।
इनमें-315 बोर की बंदूक,7 जिंदा कारतूस व 2 खाली खोखे,3 धारदार छुरियां और एक बका व नीलगाय का मांस व कटे हुए पैर शामिल हैं।
वन विभाग ने सभी के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धाराओं 52, 41 और 92 के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया है।
रिटायर्ड रेंजर की भूमिका से बढ़ा मामला
जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में विभाग का ही एक सेवानिवृत्त रेंजर (नियामत ) कथित रूप से सरगना की भूमिका में था।
जांच में उसके बैंक खातों से आरोपियों के साथ लेनदेन के साक्ष्य भी मिले हैं। यह सरगना शिकारियों का कई तरह से मददगार रहा। इनमें—
.शिकारियों को टिप्स देना .मांस की खरीद और खपत कराना .आर्थिक लेनदेन के जरिए नेटवर्क संचालित करना शामिल है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि भोपाल के शिकारी लगातार आसपास के क्षेत्रों में पकड़े जा रहे हैं, लेकिन भोपाल उड़नदस्ता निष्क्रिय नजर आ रहा है।
जो सिस्टम के भीतर मिलीभगत और निगरानी की कमजोरी को उजागर करता है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर खतरा बन सकता है।
इस संबंध में भोपाल वृत के जिम्मेदार अधिकारियों (DFO and CCF both)से संपर्क की कोशिशों के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
निगरानी कमजोर, शिकार की घटनाएं बढ़ीं
जानकारी के अनुसार, पूर्व में वन्यजीव शाखा के सख्त नेतृत्व में शिकार की घटनाओं पर नियंत्रण था।
दो माह पूर्व हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद अब भोपाल वृत समेत प्रदेश में शिकार की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
ज्ञात हो कि वर्ष 1991 बैच के भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी शुभरंजन सेन (Shubhranjan Sen)को गत एक मार्च को वन बल प्रमुख के तौर पर पदोन्नत किया गया। इससे पहले वह वन्य प्राणी शाखा प्रमुख रहे।