भोपाल ननि की ‘संस्कृति’ को चुनौती देता कोहेफिजा का अतिक्रमण

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भोपाल।वर्ष 2015 बैच की आईएएस अधिकारी संस्कृति जैन, सिवनी कलेक्टर रहते हुए अपने कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहीं।

बीते साल जब उन्हें सिवनी से हटाकर नगर निगम भोपाल की जिम्मेदारी दी गई, तब स्थानीय लोगों ने डोली में बैठाकर भावुक विदाई दी। जो उनकी लोकप्रियता का संकेत था।

 

भोपाल नगर निगम की कमान संभालने के बाद उम्मीद थी कि शहर की जटिल व्यवस्थाओं में सुधार दिखेगा।

शुरुआती दौर में कुछ सख्ती भी नजर आई, लेकिन समय के साथ हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं दिखा। कोहेफिजा क्षेत्र का एक बड़ा अतिक्रमण इसी स्थिति की ओर इशारा करता है।

विधानसभा में बयां की मजबूरी

राज्य विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस सदस्य बाला बच्चन ने बेजा अतिक्रमण के इस मामले का उठाया।

जवाब में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पुलिस बल नहीं मिलने व कोर्ट से मिले स्टे का हवाला देकर अतिक्रमण नहीं हटा पाने की मजबूरी बयां की।

इस जवाब को आए दो महीने से अधिक वक्त बीत चुका है। इसके बाद ना तो निगम से स्टे हटवाने को लेकर कोई प्रयास किए गए,ना ही पुलिस से बल मांगा गया। मांगते भी क्यों? अतिक्रमणकारी को अदालत से स्टे लाने की पूरी मोहलत जो दी गई।

‘भाई’ का अतिक्रमण हटवाने की औपचारिकता
अतिक्रमण कोहेफिजा में फ्लैग हाउस के समक्ष करीब 13सौ वर्ग फीट पर है। यहां बहुमंजिला भवन बनकर लगभग तैयार है। कथित तौर पर अवैध तरीके से बनाए गए इस भवन को लेकर निगम को करीब 5 शिकायतें मिलीं। निगम प्रशासन ने भी जवाबी औपचारिकता पूरी की।

अतिक्रमण के आरोपी ‘बाबर भाई’ व आकिब को नोटिस जारी कर अतिक्रमण स्वत:हटाने की चेतावनी दी। निर्माणकर्ता भी निगम की औपचारिकता से भलीभांति वाकिफ रहे। बाद में उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर की। स्थगनादेश हासिल किया और बेफिक्र हो गए। वहीं, निगम अमला सिर्फ कागजी औपचारिकता पूरी करते रह गया।

समय रहते कार्यवाही ना करने से तना भवन

हैरत की बात यह कि उक्त अति​क्रमित भूमि पर बहुमंजिला भवन बनने के बाद निगम प्रशासन को यह अतिक्रमण नजर आया। वह भी तब जब पांच अलग-अलग शिकायतें मिलीं।

औपचारिकता के तौर पर निगम प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने गत 21 अगस्त को उपायुक्त पुलिस भोपाल से जरूरी सुरक्षा बल मुहैया कराने की मांग की गई।

पुलिस पर ठीकरा फोड़ा

पुलिस बल क्यों नहीं मिल सका? विधानसभा में आए जवाब में इसका कोई उल्लेख नहीं है। सूत्रों का दावा है कि विधानसभा में मामला उठने के बाद निगम प्रशासन की ओर से बेक डेट में संबंधित मांग पत्र जारी किया गया, ताकि सनद रहे।

पुलिस सूत्रों का दावा है कि हकीकत में ऐसी कोई मांग आई ही नहीं। वर्ना, ऐसी कोई मजबूरी नहीं कि ​निगम को समय रहते सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाती।

बता दें कि भोपाल पुलिस के साथ आरएएफ व एसएएफ का बल अतिरिक्त तौर पर हमेशा उपलब्ध रहता है।

निगमायुक्त ने साधी चुप्पी

निगम आयुक्त संस्कृति जैन से जब इस अतिक्रमण को नहीं हटा पाने की वजह जाननी चाही तो वह चुप्पी साध गईं। व्हाट्स एप संदेश भी भेजा।

इसे पढ़ने के बाद उन्होंने जवाब देना उचित नहीं समझा। मत दीजिए।

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘समर शेष है…’ ऐसी तमाम बातों का माकूल जवाब है।