मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अवमानना मामले में सजा पाए पूर्व IASअधिकारी मोहम्मद सुलेमान को बड़ी राहत दी है।
न्यायालय ने अपने जेल आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब इस केस में आगे की दिशा अगली सुनवाई तय करेगी।
2 महीने की सजा पर फिलहाल रोक
Madhya Pradesh High Court की डिवीजन बेंच ने 16 मार्च 2026 को सुनाई गई 2 महीने की सजा के अमल पर रोक लगा दी है। यह राहत ‘कंटेम्प्ट अपील’ पर सुनवाई के दौरान दी गई।
क्या कहा कोर्ट ने?
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई तक सजा का क्रियान्वयन स्थगित रहेगा। साथ ही, विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
अपील में क्या दलील दी गई?
Md.Suleman (Photo)की ओर से कहा गया कि-उन्हें अवमानना की कार्यवाही का नोटिस नहीं मिला। मूल आदेश की जानकारी भी उन्हें नहीं थी।
जिस आदेश के उल्लंघन का आरोप है, उस पर पहले ही स्टे मिल चुका है।
मामले की जड़: 2004 से लंबित नियमितीकरण
पूरा विवाद मंदसौर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़ा है। कोर्ट ने दिसंबर 2023 में 2004 से 2016 तक कर्मचारियों को नियमित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन समय पर पालन नहीं हुआ।
अवमानना तक कैसे पहुंचा मामला? – 3 महीने में आदेश लागू नहीं हुआ। – 9 कर्मचारियों ने अलग-अलग अवमानना याचिकाएं दायर कीं। -बार-बार चेतावनी के बावजूद विभाग ने पूरी तरह पालन नहीं किया। -अंततः कोर्ट ने 16 मार्च 2026 को सुलेमान को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
अब आगे क्या?
अब मामला नोटिस और जवाब पर निर्भर करेगा। चार हफ्ते बाद होने वाली अगली सुनवाई में तय होगा कि राहत बरकरार रहेगी या सजा फिर लागू होगी।
यह मामला सिर्फ एक अफसर की राहत नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों के पालन बनाम प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है।