मप्र के स्कूलों में महंगी हुई पढ़ाई, बोर्ड ने नियम भी किए सख्त

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भोपाल।
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सत्र 2026-27 के लिए नई प्रवेश नीति जारी कर दी है। इस बार सिर्फ नियम ही नहीं बदले, बल्कि फीस में भारी बढ़ोतरी ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा दी है। नई व्यवस्था में पढ़ाई अब पहले से ज्यादा महंगी और अनुशासित होने जा रही है।

फीस में बड़ा इजाफा, बढ़ा आर्थिक बोझ
नई नीति के तहत 10वीं-12वीं के परीक्षा शुल्क और अन्य फीस में 25% से 80% तक बढ़ोतरी की गई है। नियमित परीक्षा शुल्क ₹1200 से बढ़कर ₹1500 रुपए किया गया है।

वहीं,यह स्वाध्यायी यानी प्राइवेट छात्रों के लिए ₹1600 होगा। इसी तरह,9वीं में नामांकन शुल्क ₹350 से बढ़कर ₹500 किया गया है।

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अब पुरानी मार्कशीट के लिए हजार रुपए
इतना ही नहीं, 10 साल पुरानी अंकसूची की प्रति अब ₹600 की जगह ₹1000 में मिलेगी। वहीं,डीएलएड परीक्षा शुल्क में भी वृद्धि की गई है।

नियमित विद्यार्थियों को सभी विषयों के लिए ₹7000 देने होंगे, जबकि दूसरे अवसर के लिए विषयों के अनुसार ₹3000 से ₹7000 रुपये तक शुल्क तय किया गया है।

🏫 स्कूलों पर भी असर, संबद्धता फीस बढ़ी

नई नीति का असर सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है। 10वीं यानी हाईस्कूल के लिए सरकारी स्कूलों को ₹20,000 व निजी स्कूलों से मंडल ₹22,000 संबंद्धता शुल्क लेगा। इसी तरह,कक्षा 12 के लिए यह शुल्क क्रमश:₹27,000 व ₹30,000 तय किया गया है। इस बढ़ोतरी से स्कूलों की लागत बढ़ेगी, जिसका अप्रत्यक्ष असर छात्रों की फीस पर भी पड़ सकता है।

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⚖️ नियम सख्त: गड़बड़ी पर प्राचार्य जिम्मेदार
मंडल ने तय किया कि अब गलत प्रवेश देने पर सीधे स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई होगी। इसके लिए प्राचार्य पर ₹5000 का जुर्माना लगाया जाएगा।

वहीं,गंभीर मामलों में निजी स्कूलों की मान्यता भी समाप्त करने तक की कार्रवाई की जा सकेगी। खास बात यह है कि यह जुर्माना छात्रों से नहीं वसूला जाएगा।

📊 ‘Best of Five’ खत्म, अब हर विषय जरूरी

10वीं के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव—
अब तक लागू “बेस्ट ऑफ फाइव” सिस्टम खत्म कर दिया गया है। छात्रों के अब सभी विषयों के अंक अंतिम परिणाम में जुड़ेंगे। जिससे प्रदर्शन का दबाव बढ़ेगा।

🧾 ऑनलाइन प्रक्रिया अनिवार्य, डमी एडमिट कार्ड जरूरी
प्रवेश नीति के अनुसार, कक्षा नौवीं का ऑनलाइन नामांकन 15 मई से 30 सितंबर तक किया जा सकेगा।

वहीं 10वीं-12वीं के परीक्षा फार्म 15 मई से 15 सितंबर तक भरे जाएंगे। आवेदन पत्र में आधार आईडी नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

परीक्षा फार्म भरने के सात दिन बाद छात्रों को डमी प्रवेश पत्र जारी किया जाएगा। स्कूल प्राचार्यों को इसे डाउनलोड कर विद्यार्थियों और अभिभावकों से जानकारी का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।

समय सीमा में ही सुधार

यदि किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है, तो उसे निर्धारित समय सीमा में ही सुधारा जा सकेगा। मंडल ने स्पष्ट किया है कि तय समय में घोषणा-पत्र अपलोड नहीं होने पर प्रवेश पत्र जारी नहीं होंगे।

इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी। साथ ही परीक्षा के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन मान्य नहीं होगा।