प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 को लेकर शहडोल संभाग में शिक्षकों का असंतोष बढ़ता जा रहा है।
मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर परीक्षा प्रक्रिया में संशोधन की मांग की है।
📚 क्या है शिक्षकों की आपत्ति?
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत परीक्षा कराई जाती है, तो उसका स्वरूप व्यावहारिक और शिक्षकहित में संतुलित होना चाहिए।
मांग है कि प्रश्नपत्र उसी कक्षा के पाठ्यक्रम से बने, जिसमें शिक्षक वर्तमान में पढ़ा रहे हैं।
🧠 “वर्तमान क्षमता पर हो मूल्यांकन”
उमरिया के सेवानिवृत्त शिक्षक राम लखन सिंह चौहान ने कहा कि-लंबे समय तक एक ही कक्षा पढ़ाने से वही विषय अधिक सक्रिय रहता है।
वर्षों पुराना सैद्धांतिक ज्ञान कमजोर पड़ जाता है।
ऐसे में व्यापक सिलेबस से परीक्षा लेना कई शिक्षकों के लिए कठिन हो सकता है।
📊 अनुभव बनाम सिलेबस का मुद्दा
शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश में कई शिक्षक 20-22 साल से सेवा दे रहे हैं और पुराने नियमों के तहत नियुक्त हुए थे।
अगर सिलेबस बहुत व्यापक और अस्पष्ट रहेगा, तो परीक्षा की व्यवहारिकता प्रभावित होगी।
⚠️ मानसिक दबाव का भी हवाला
ज्ञापन में उदाहरण देते हुए बताया गया कि-कई बार योग्य व्यक्ति भी दबाव में सरल प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाते।
इसलिए परीक्षा का स्वरूप ऐसा हो, जिसमें शिक्षक अपनी वास्तविक क्षमता दिखा सकें।
📢ज्ञापन में ये मांगें मुख्य . स्पष्ट और सीमित सिलेबस जारी हो।
. वर्तमान अध्यापन के आधार पर मूल्यांकन।
. परीक्षा से पहले पर्याप्त तैयारी समय।
. स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
🎯 शिक्षक संघ की सरकार से अपील
शिक्षक संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि वह इस मुद्दे पर संवेदनशीलता से विचार करे। ताकि संतुलित और न्यायसंगत निर्णय हो।
शिक्षकों के हित सुरक्षित रहेंं। शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सके।