कृषि कैबिनेट सोमवार को: नागलवाड़ी से निकलेगा ‘राष्ट्रीय एग्री-ट्राइबल मॉडल’

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रवि अवस्थी,भोपाल।

मध्यप्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार सोमवार 2 मार्च को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में अपनी पहली ‘कृषि कैबिनेट’ आयोजित कर रही है। इसे राष्ट्रीय फलक पर प्रचारित करने की तैयारी है।

डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक सिर्फ नीतिगत विमर्श नहीं, बल्कि “फील्ड-आधारित शासन” का प्रदर्शन भी मानी जा रही है। जहां फैसले सचिवालय से निकलकर सीधे खेत-खलिहान और जनजातीय अंचल की जमीन पर लिए जाएंगे।

क्यों खास है नागलवाड़ी?

करीब ढाई हजार आबादी वाला जनजातीय बहुल गांव नागलवाड़ी, निमाड़ अंचल के कृषि परिदृश्य का प्रतीक माना जाता है।

इसके आसपास बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, धार, झाबुआ और अलीराजपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले हैं।

यहां स्थित 800 साल पुराना भीलट देव मंदिर जनजातीय समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है। पूरा मंत्रिमंडल यहां दर्शन करेगा।

संदेश स्पष्ट है- कृषि नीति और जनजातीय अस्मिता को एक साथ साधने की कोशिश।

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एजेंडा: सिंचाई से बाजार तक

बैठक में जिन मुद्दों पर निर्णय संभावित हैं, उनमें-

-आदिवासी अंचलों में सिंचाई विस्तार

-उन्नत बीजों की उपलब्धता

-कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार तंत्र

-मसाला फसलों को प्रोत्साहन

-पशुपालन के आधुनिकीकरण हेतु विदेश प्रशिक्षण

-किसानों के खातों को ‘समग्र आईडी’ से लिंक कर डिजिटल सूचना सीधे मोबाइल ऐप पर उपलब्ध कराना

सरकार 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मना रही है। ऐसे में यह बैठक किसान-केंद्रित वर्ष की औपचारिक शुरुआत भी मानी जा रही है।

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संवाद और सांस्कृतिक संदेश

कैबिनेट सिर्फ बैठक तक सीमित नहीं रहेगी। दिनभर किसानों और प्रबुद्धजनों से संवाद होगा। कृषि व जनजातीय कल्याण पर प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

वहीं, जुलवानिया में आयोजित भगोरिया उत्सव में मंत्रिमंडल की सहभागिता भी होगी।

ये सब संकेत देते हैं कि सरकार नीति के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव भी मजबूत करना चाहती है।

वर्ष की औपचारिक शुरुआत भी मानी जा रही है।

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राष्ट्रीय एग्री मॉडल लाने की तैयारी
बैठक के फैसलों को राष्ट्रीय एग्री मॉडल बनाने की तैयारी है।  इसके लिए राष्ट्रीय मीडिया व करीब 60 यू-ट्यूबर्स ,इनफ्लूएंसर को भी नागलवाड़ी आमंत्रित किया गया। इनमें कई के लिए साक्षात्कार की व्यवस्था भी की गई है।

अपरान्ह तीन बजे सीएम डॉ यादव जुलवानिया के भगोरिया मेला में शामिल होंगे।  आदिवासी परंपरा के तहत होली से एक दिन पहले मेले का समापन होता है। इसके चलते सोमवार को मेले का अंतिम दिन है।

इसके लिए कार्यक्रम स्थल को डोम, हट और पैगोडा को निमाड़ी घरों की शैली में सजाया गया है। पांच डोम में अलग-अलग व्यवस्थाएं-कैबिनेट बैठक,प्रदर्शनी,भोजन, मीडिया ब्रीफिंग और ग्रीन रूम की व्यवस्था की गई है।

बैठक स्थल पर जनजातीय संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। लोकजीवन के रंगों से सजी इस प्रदर्शनी में निमाड़ की खेती-किसानी की पारंपरिक पद्धतियों का भी प्रदर्शन होगा।

भोजन में स्थानीय स्वाद को प्रमुखता

भोजन सूची में स्थानीय स्वाद को प्रमुखता दी गई है। इनमें अमाड़ी की भाजी, मक्के की रोटी, निमाड़ी मिर्च के भजिये, दाल-पानिये, छाछ, कोदो का पुलाव और रागी की बालूशाही आदि व्यंजन शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार,यह सिर्फ आतिथ्य नहीं, बल्कि ‘लोकल फॉर एग्रीकल्चर’ की प्रतीकात्मक ब्रांडिंग भी है।

सियासी और नीतिगत संकेत
जानकारों के अनुसार, यह आयोजन तीन स्तरों पर संदेश देता है—

नीतिगत: कृषि और जनजातीय विकास को एकीकृत दृष्टिकोण।

प्रशासनिक: फील्ड में जाकर निर्णय लेने की कार्यशैली।

राजनीतिक: निमाड़ और आदिवासी अंचल में सशक्त उपस्थिति का संकेत।