सीनियर्स पर जूनियर भारी: शुभरंजन सेन बने वन विभाग के नए मुखिया

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रवि अवस्थी,भोपाल।

राज्य सरकार ने 1991 बैच के आईएफएस अधिकारी और वर्तमान वन्य प्राणी प्रमुख शुभरंजन सेन को वन विभाग का प्रशासनिक मुखिया (वन बल प्रमुख) नियुक्त किया है।

इस फैसले में 1990 बैच के दो वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार किया गया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, चयन में वरिष्ठता से अधिक प्रशासनिक दक्षता, कार्यशैली और उपलब्धियों को महत्व दिया गया।

क्यों आगे निकले सेन ?

वन बल प्रमुख की दौड़ में 1990 बैच के विभाष ठाकुर और एच.यू. खान के नाम प्रमुखता से थे।

हालांकि, अकादमिक उपलब्धियों, संतुलित नेतृत्व शैली और वन्य प्राणी संरक्षण में नवाचारों के कारण सेन का पलड़ा भारी रहा।

वन्य प्राणी शाखा प्रमुख रहते हुए उन्होंने संरक्षण व संवर्धन के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय पहल कीं, जिन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय ने भी सकारात्मक रूप से लिया।

बड़े फेरबदल के संकेत

सेन की नियुक्ति के बाद वरिष्ठ स्तर पर व्यापक प्रशासनिक फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है।

संकेत हैं कि विभाष ठाकुर को वन मुख्यालय से हटाकर प्रतिनियुक्ति पर लघु वनोपज संघ या वन विकास निगम भेजा जा सकता है।

पुराने टकराव की पृष्ठभूमि

विभाष ठाकुर और पूर्व एसीएस अशोक वर्णवाल के बीच कार्यशैली को लेकर मतभेद चर्चा में रहे। ठाकुर नियम-कायदों के पालन के लिए जाने जाते हैं।

नर्मदापुरम में अवैध कटाई, टिमरनी में राधा स्वामी सत्संग सभा आगरा को भुगतान विवाद और अन्य वित्तीय मामलों में उनकी सक्रियता सुर्खियों में रही।

ठाकुर के कारण वर्णवाल को काफी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं,उनके कामकाज की शैली भी उजागर हुई। बदनामी बढ़ी तो  मुख्यमंत्री को उनका विभाग बदलना पड़ा।

इसी तरह एच.यू. खान भी वरिष्ठता के बावजूद वन बल प्रमुख नहीं बन सके, जबकि उनकी छवि नियमपरक और ईमानदार अधिकारी की रही है।

खान भी पूर्व एसीएस वर्णवाल की आंख का कांटा रहे।

ऐसा है वर्णवाल के कामकाज का तरीका
वर्णवाल के कामकाज के तरीके का आकलन मप्र में 42 कृषि अनुसंधान केंद्रों की स्थिति से लगाया जा सकता है।

आईसीएआर से अनुबंधित इन केंद्रों में वैज्ञानिकों समेत करीब ढाई सौ कर्मचारियों को बीते दो साल से साल में सिर्फ आधा वेतन ही मिल रहा है।

अनुबंध में केंद्र अमले की जीएफएफ व जीएसटी रकम नहीं दिए जाने का जिक्र है।

वर्णवाल सिर्फ इस बात पर अड़े हुए हैं कि ICAR दो साल पहले तक जब पूरा भुगतान कर रहा था तो अब क्यों नहीं?  यानी, ICAR का अपनी गल्ती सुधार लेना उन्हें रास नहीं आया।

रेनू की वापसी से बदलेगा समीकरण

लघु वनोपज संघ की एमडी समिता राजौरा की भूमिका में भी बदलाव संभव माना जा रहा है।

इधर,1990 बैच की आईएफएस रेनू सिंह एक मार्च को प्रतिनियुक्ति से वापस मप्र लौट रहीं हैं। वर्तमान में वह संचालक ICFRE हैं।

उनकी वापसी पर वन विकास निगम में अपर प्रबंध संचालक अर्चना शुक्ला का पीसीसीएफ के पद पर होने वाला प्रमोशन टलने के आसार हैं।

रेनू सिंह अप्रेल में सेवानिवृत होंगी। उसके बाद ही श्रीमती शुक्ला प्रमोट हो पाएंगी।