रवि अवस्थी,भोपाल।
हाईकोर्ट द्वारा मुख्य सचिव को 4 मई को पेश होने के निर्देश दिए जाने के बाद अब सरकार हरकत में आ गई है।
अवमानना और लंबित मामलों को लेकर बढ़ती सख्ती के बीच सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने हाल ही में एक परिपत्र जारी किया। जिसमें अदालतों में समय पर जवाब देने और आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की नसीहत दी गई।
सीएस को कोर्ट में तलब होने के आदेश
प्रकरण 2016 से लंबित उच्च वेतनमान आदेश से जुड़ा है। इसका पालन नहीं होने पर अवमानना प्रकरण दायर हुआ।
इसी केस में हाईकोर्ट जबलपुर ने आगामी 4 मई को शासन से जवाब तलब किया है। इस प्रकरण में मुख्य सचिव को स्वयं न्यायालय में उपस्थित होने का फरमान कोर्ट ने सुनाया है। यह याचिका हाईकोर्ट के कर्मचारी किशन पिल्लई व अन्य की ओर से ही दायर की गई।
GAD का सख्त संदेश: अब देरी नहीं चलेगी
हालांकि सीएस को कोर्ट में हाजिर होने का फैसला 11 अप्रैल को जारी हुआ,लेकिन इसका पूर्वानुमान होते ही जीएडी ने करीब एक सप्ताह पहले यानी 4 अप्रैल को यह परिपत्र जारी किया।
करीब 12 पन्नों के इस परिपत्र में जीएडी ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया है। इसमें कहा गया कि कोर्ट मामलों में देरी या हीला-हवाली अब सीधे जिम्मेदारी तय करेगी।
परिपत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि—
– कोर्ट मामलों में तय समयसीमा में जवाब दिया जाए।
– अवमानना के मामलों में आदेशों का पालन अनिवार्य हो।
– कानूनी मामलों में लापरवाही से बचा जाए।

















