मध्य प्रदेश में शहरी विकास को लेकर राज्य सरकार अब थ्री मॉडल पर काम करेगी। सरकार वित्तीय आत्मनिर्भरता, तकनीकी सुधार और जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ेगी। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बजट अनुदान मांगों पर चर्चा में इस बात के संकेत दिए।
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भोपाल।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सदन में मेट्रो, मास्टर प्लान, आत्मनिर्भर निकाय और जनभागीदारी मॉडल जैसे मुद्दों पर व्यापक बहस हुई।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि शहरी विकास अब “जनप्रतिनिधियों से संवाद और जनता की भागीदारी” के साथ आगे बढ़ेगा।
चर्चा के बाद विभाग के 21 हजार करोड़ रुपये और राज्य विधानमंडल के लिए 152 करोड़ रुपये के अनुदान प्रस्ताव पारित कर दिए गए।
मेट्रो पर मंथन: जनप्रतिनिधियों संग होगी बैठक
मंत्री विजयवर्गीय अपने विभाग की बजट अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के जवाब दे रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि भोपाल मेट्रो की प्लानिंग अधिकारियों ने कर ली।
इसे लेकर जनप्रतिनिधियों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। एक तरह से भोपाल व इंदौर पर मेट्रो को थोप दिया गया।
उन्होंने घोषणा की कि भोपाल के सांसद-विधायकों के साथ अलग बैठक कर रूट और प्रभाव पर विचार किया जाएगा।
इंदौर-भोपाल में मेट्रो को पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जोड़ने की जरूरत पर भी सहमति बनी।
मंत्री ने भरोसा दिलाया कि मेट्रो के कारण भोपाल में किसी भी कब्रिस्तान को नुकसान नहीं होगा।जहां दीवार प्रभावित है, वहां पुनर्निर्माण कराया जाएगा।
आत्मनिर्भर नगर निकाय का फॉर्मूला
अपने जवाब में मंत्री विजयवर्गीय ने यह भी कहा-
*अगले तीन माह में सभी नगर निगम आयुक्तों की बैठक होगी। इसके जरिए फ्रीहोल्ड मामलों में तेजी आएगी।
* बिजली ऑडिट से 25% तक बिल में कमी लाई जाएगी।
* निकायों के सभी वाहनों में जीआईएस सिस्टम लागू होगा। इससे ईंधन की बचत होगी।
* जो निकाय आत्मनिर्भर बनेंगे,उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
















