रवि अवस्थी, भोपाल।
मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में स्कूल मरम्मत और लघु निर्माण कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये निकाल लिए गए, लेकिन ज़मीन पर काम नजर नहीं आया।
जांच खुली तो कार्रवाई का सिलसिला ऐसा चला कि पूरा विकासखंड प्राचार्य विहीन होने की कगार पर पहुंच गया। अब तक 15 प्राचार्यों सहित 17 लोग निलंबित हो चुके हैं और तीन फर्मों पर एफआईआर दर्ज करने की तैयारी है।
जांच में सामने आया कि विद्यालयों की एमएमडीसी खातों से नियमानुसार प्रक्रिया अपनाए बिना ही लाखों रुपये फर्मों को भुगतान कर दिए गए। भुगतान का पैटर्न लगभग एक जैसा था—20 से 24 लाख रुपये के बीच की राशि, लेकिन कार्यस्थल पर निर्माण या मरम्मत का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।
कमिश्नर का एक्शन: एक साथ 7 प्राचार्य निलंबित
रीवा संभागीय कमिश्नर बी.एस. जामोद ने शनिवार को 7 प्राचार्यों के निलंबन आदेश जारी किए। इन पर नियमों के विरुद्ध लाखों रुपये के भुगतान का आरोप है। इससे पहले भी एक बीईओ, 8 प्राचार्य और एक भृत्य निलंबित किए जा चुके हैं।
कार्रवाई की शुरुआत सुलखमा से
सबसे पहले सुलखमा हाईस्कूल के प्रभारी प्राचार्य पर कार्रवाई हुई। इसके बाद क्रमशः बीईओ, अन्य प्राचार्य और कर्मचारी निलंबित होते गए। संयुक्त संचालक और जिला पंचायत सीईओ स्तर से भी कार्रवाई की गई।
भुगतान का पैटर्न: रकम लगभग एक जैसी, फर्म भी वही
जांच में सामने आया कि अधिकांश स्कूलों से 21 से 24 लाख रुपये के बीच की राशि तीन फर्मों—वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर (भोपाल), श्री महाकाल ट्रेडर्स (सतना), श्री रूद्र इंटरप्राइजेज (मैहर)—को दी गई। कई विद्यालयों ने बिना कार्य के ही भुगतान कर दिया।
कुछ प्रमुख भुगतान उदाहरण:
देवदहा: ₹24.10 लाख — वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर
गोविंदपुर: ₹22.60 लाख — वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर
गोरसरी: ₹24.10 लाख — श्री महाकाल ट्रेडर्स
मिरगौती: ₹23.81 लाख — श्री रूद्र इंटरप्राइजेज
हर्रई: ₹21.53 लाख — वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर
यह पैटर्न जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बना।
कलेक्टर के प्रस्ताव के बाद खुली परतें
2 फरवरी को मैहर कलेक्टर ने लोक शिक्षण संचालनालय को कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा था। इसमें 1 सितंबर 2025 को स्वीकृत लघु निर्माण, पार्किंग शेड और संरचनात्मक कार्यों के लिए जारी राशि का हवाला था। नियम था कि एमएमडीसी के जरिए प्रक्रिया अपनाकर काम कराया जाए, लेकिन सीधे भुगतान कर दिए गए।
प्रभार से भी हटाए गए केंद्राध्यक्ष
घोटाले में शामिल कई प्राचार्यों को केंद्राध्यक्ष के प्रभार से भी हटा दिया गया है। सहायक केंद्राध्यक्ष और केंद्राध्यक्षों से भी जिम्मेदारी वापस ले ली गई है।
अब अगला कदम: FIR
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसियां तीनों फर्मों पर एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में हैं। संकेत हैं कि वित्तीय अनियमितता के साथ आपराधिक साजिश की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।