राकेश नामदेव,उमरिया।
जनजातीय कार्य विभाग और अनुसूचित जाति विकास विभाग में लागू संलग्नीकरण व्यवस्था अब प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
शिक्षक कांग्रेस संगठन के संभागीय महामंत्री राधेश्याम शर्मा ने इस व्यवस्था को लेकर हित–संघर्ष और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन पर जांच में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है।
राज्य स्तर के अधिकार, जिला स्तर पर आदेश !

राधेश्याम शर्मा ने जिला कलेक्टर को दी गई लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि तत्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त द्वारा शासन के स्पष्ट नियमों के विपरीत नस्ती तैयार कर ऐसे आदेश जारी कराए गए, जो नियमानुसार राज्य स्तर से जारी होने चाहिए थे।
इसी प्रक्रिया के तहत शिक्षाकर्मी वर्ग–2 संजय पांडे को मंडल संयोजक एवं क्रीड़ा परिसर के प्रभारी प्राचार्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ किया गया।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन!
शिकायतकर्ता का कहना है कि यह संलग्नीकरण व्यवस्था शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 27 के भी विपरीत है। इससे न केवल शैक्षणिक निष्पक्षता प्रभावित होती है, बल्कि छात्रों के भविष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
जांच करने वाला ही संलग्न कर्मचारी!


















