रवि अवस्थी,भोपाल।
ग्वालियर में तीन साल पहले लागू हुआ नया मास्टर प्लान (Master Plan)अब रियल एस्टेट कारोबार के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। सरकार के एक गलत फैसले के चलते संगीत नगरी में व्यावसायिक व आवासीय बहुमंजिला भवनों (Residencial Multi Complex)का निर्माण लगभग ठप है। हालात ऐसे हैं कि बीते तीन वर्षों में एक भी बिल्डर(Builder) ने नगर निगम (Municipal Corporation) से भवन अनुज्ञा के लिए आवेदन नहीं किया।
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ग्वालियर का नया मास्टर प्लान वर्ष 2021 में तैयार किया गया था। इसमें वर्ष 2035 तक विकास को ध्यान में रखते हुए एफएआर ऑन प्रीमियम (FOP) की दर 0.05 प्रतिशत प्रस्तावित थी। लेकिन वर्ष 2023 में मास्टर प्लान लागू करते समय जारी अधिसूचना में इसे दस गुना बढ़ाकर 0.50 प्रतिशत कर दिया गया।

राजपत्र की गलती से कारोबार पर ब्रेक
राजपत्र में प्रकाशित इसी बदलाव ने रियल एस्टेट (Real Estate) कारोबार की कमर तोड़ दी। ऊँची FOP दर के कारण बिल्डरों ने नए प्रोजेक्ट शुरू करना बंद कर दिया। इसका सीधा असर ग्वालियर नगर निगम के राजस्व पर भी पड़ा है। न नए भवन बने, न भवन अनुज्ञा जारी हुई और न ही निगम को प्रीमियम या शुल्क के रूप में आय मिली।
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आश्वासन मिला, समाधान नहीं
रियल एस्टेट कारोबारियों की संस्था क्रेडाई ग्वालियर(CREDAI,Gwalior)ने इस मुद्दे को कई बार शासन और जिम्मेदार अधिकारियों के सामने उठाया। सरकार की ओर से FOP दर में सुधार का आश्वासन भी मिला,लेकिन अफसरों ने अब तक अपने फैसले में कोई बदलाव नहीं किया।
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दावे–आपत्ति भी बेअसर
बताया जाता है कि नगरीय प्रशासन विभाग ने 25 जुलाई को FOP दर में संशोधन के लिए दावे–आपत्ति आमंत्रित की थीं, लेकिन विभाग के प्रस्ताव का एक भी समर्थन या आपत्ति नहीं आई। इसके बावजूद विभाग ने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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सिर्फ ग्वालियर में ही 0.50% FOP
क्रेडाई (CREDAI)के सचिव शैलेष जैन ने कहा कि प्रदेश में 0.50 प्रतिशत FOP दर सिर्फ ग्वालियर में लागू है। उन्होंने बताया कि जुलाई में बुलाई गई दावे–आपत्ति प्रक्रिया में एक भी आपत्ति नहीं आई। इसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई, फिर भी छह महीने बीत जाने के बाद भी कोई फैसला नहीं हुआ।
उन्होंने कहा,कि 0.50 प्रतिशत FOP रियल एस्टेट कारोबार(Business) पर बड़ा कुठाराघात है। इसके बाद से ग्वालियर में बहुमंजिला भवनों का निर्माण पूरी तरह ठप है। जिससे शहर का विकास भी रुक गया है।
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भोपाल–इंदौर में अलग हालात
मध्य प्रदेश में ग्वालियर समेत गिने-चुने शहरों में ही नया मास्टर प्लान लागू है। ग्वालियर महानगर श्रेणी में आता है, लेकिन इसी श्रेणी के भोपाल और इंदौर का नया मास्टर प्लान अब तक तैयार नहीं हुआ है। मेट्रोपोलिटन सिटी घोषित किए जाने के कारण इन शहरों में नए मास्टर प्लान के शीघ्र लागू होने की संभावना भी कम है।
एक बार फिर दावे–आपत्ति: एसीएस
नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे ने माना कि मौजूदा दर व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने कहा-0.05 प्रतिशत यदि मजाक है, तो 0.50 प्रतिशत भी बहुत ज्यादा है। हम बीच की कोई व्यावहारिक दर तय करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि बिल्डरों और सरकार-दोनों को नुकसान न हो। इसके लिए जल्द ही नए सिरे से दावे–आपत्ति बुलाई जाएंगी।
क्या है FAR on Premium (FOP)?
- FAR on Premium (FOP) कोई टैक्स नहीं, बल्कि अतिरिक्त निर्माण अधिकार लेने के बदले सरकार या नगर निगम को दी जाने वाली प्रीमियम राशि है।
- एक सीमा तक FAR मुफ्त मिलता है
- उससे अधिक निर्माण के लिए अतिरिक्त FAR खरीदना पड़ता है
- इसी अतिरिक्त FAR पर लगने वाली दर को FOP कहा जाता है
कैसे तय होती है FOP दर?
- प्रति वर्गमीटर या वर्गफुट
- कलेक्टर गाइडलाइन (DLC) के प्रतिशत के आधार पर
- शहर, ज़ोन, सड़क की चौड़ाई और उपयोग (आवासीय/व्यावसायिक) के अनुसार
- ग्वालियर में प्रस्तावित 0.50 प्रतिशत FOP दर कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर तय की गई है, लेकिन यही दर आज रियल एस्टेट और नगर निगम—दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है।
















