MP SRLM : कमजोर बैंकिंग सिस्टम बना ढाल, मिशन की रकम पर संगठित खेल

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मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के स्व-सहायता समूह करोड़पति बन गए हैं।  सरकार के पास उनकी कुल जमा पूंजी का ठोस हिसाब नहीं। जिससे निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


Main Points
—राज्य में पांच लाख से अधिक स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं।
—इन समूहों से 62 लाख से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
—लगभग हर गांव में 15 से 20 एसएचजी कार्यरत हैं।
—ग्राम संगठन, सीएलएफ और ब्लॉक स्तर तक नेटवर्क फैला है।
—जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर साबित हो रही है।
— कई ग्राम संगठनों के खाते करोड़ों रुपए के हो चुके हैं।
— निगरानी कमजोर होने से रकम उपयोग में कई लीकेज हैं।
— कसावट लाने शासन अब जिला सीईओ को मिशन से जोड़ेगी।

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रवि अवस्थी,भोपाल।
मध्य प्रदेश में स्व-सहायता समूह महिला सशक्तिकरण की मजबूत रीढ़ माने जाते हैं। कई एसएचजी आज करोड़पति बन चुके हैं,लेकिन सरकार के पास उनकी कुल जमा पूंजी का पुख्ता हिसाब नहीं है।

बैंकिंग नेटवर्क की कमजोरी बड़ी समस्या बनी हुई है। डिजिटल निगरानी व्यवस्था अधूरी बताई जा रही है। परिणामस्वरूप, केंद्रीकृत नियंत्रण से एनआरएलएम भ्रष्टाचार के लिए संवेदनशील बना है।

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MP में 5 लाख से अधिक एसएचजी

राज्य में पांच लाख से अधिक स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं। इन समूहों से 62 लाख से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं। लगभग हर गांव में 15 से 20 एसएचजी कार्यरत हैं।

ग्राम संगठन, सीएलएफ (CLF)और ब्लॉक स्तर तक नेटवर्क फैला है,लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर साबित हो रही है।

करोड़ों खातों में, उपयोग मनमाफिक

मिशन के तहत प्रत्येक सदस्य को 20 हजार रुपए अंश पूंजी मिलती है।अन्य योजनाओं और कारोबार की आय भी इन्हीं खातों में जमा होती है। परिणामस्वरूप, कई ग्राम संगठनों के खाते करोड़ों रुपए के हो चुके हैं।
इन पैसों का इस्तेमाल आय बढ़ाने के बजाय दूसरे कामों में किया जा रहा है। क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (CRP) के खातों में लाखों रुपए डालकर बाद में वसूली का खेल चल रहा है।

बदले में उन्हें कुछ हजार की ‘सेटिंग रकम’ थमा दी जाती है। वहीं,यह पूरा खेल संगठित तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।

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18 सौ करोड़ का खुलासा, असली आंकड़ा और बड़ा !

मिशन मुख्यालय ने पहली बार खातों की पड़ताल कर करीब 1800 करोड़ जमा होने की जानकारी पाई। यह आंकड़ा समूहों से प्राप्त सूचनाओं पर ही आधारित है।

लेकिन,नोडल बैंक पीएनबी की पहुंच सीमित बताई जा रही है। ग्रामीण बैंकों का डिजिटलीकरण अब तक पूरा नहीं हो सका। जबकि,वास्तविक जमा राशि इससे कहीं अधिक होने की आशंका जताई गई है।

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जिलों को दूर रखकर चला मिशन
पिछले 13 वर्षों तक मिशन संचालन में जिलों को जानबूझकर हाशिये पर रखा गया। कलेक्टर (Collector)और जिला पंचायत सीईओ की भूमिका सीमित कर दी गई थी। पूरी निगरानी व्यवस्था केंद्रीयकृत होकर मुख्यालय तक सिमटी रही।

इससे ,केंद्रीय नियंत्रण से भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को बढ़ावा मिला। पूर्व सीईओ एल.एम. बेलवाल (L.M.Belwal)पर ईओडब्ल्यू मामला इसी व्यवस्था का परिणाम माना गया।

What’s next ?

  • पिछले 13 वर्षों तक मिशन संचालन में जिलों को जानबूझकर हाशिये पर रखा गया।
  • कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की भूमिका सीमित कर दी गई थी।
  • पूरी निगरानी व्यवस्था केंद्रीयकृत होकर मुख्यालय तक सिमटी रही।
  • केंद्रीय नियंत्रण से भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को बढ़ावा मिला।
  • पूर्व सीईओ एल.एम. बेलवाल पर ईओडब्ल्यू मामला इसी व्यवस्था का परिणाम माना गया।
  • अब पहली बार मिशन मुख्यालय ने जिलों को प्रत्यक्ष जिम्मेदारी दी है।
  • जिला पंचायत सीईओ को सीधे निगरानी का अधिकार सौंपा गया है।

पहली बार जिलों को जिम्मेदारी

अब पहली बार मिशन मुख्यालय ने जिलों को प्रत्यक्ष जिम्मेदारी दी है। जिला पंचायत सीईओ को सीधे निगरानी का अधिकार सौंपा गया है।

कलेक्टरों को मिशन के उद्देश्य और कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया है। सभी जिला पंचायत सीईओ (CEO)का राज्यस्तरीय सेमिनार (Seminar)जल्द प्रस्तावित है।

सिस्टम कसने की तैयारी में एसआरएलएम

एसआरएलएम (SRLM)अब सिस्टम में कसावट लाने 3 साफ्टवेयर तैयार करवा रहा है। मिशन की सीईओ हर्षिका सिंह (Harshika Singh) के अनुसार सभी एसएचजी बैंक खातों को डिजिटलीकृत किया जा रहा है।
अब , सिंगल क्लिक (Single click) पर खातों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।

उन्होंने जमा राशि के दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया। सीईओ ने कहा-लीकेज रोकने सिस्टम में कसावट लाई जा रही है।

हर्षिका सिंह के मुताबिक एसएचजी (SHGs)खातों की जमापूंजी करीब 1800 करोड़ है। उन्होंने माना कि वास्तविक राशि इससे अधिक भी हो सकती है।

इच्छाशक्ति तय करेगी भविष्य

एसएचजी महिला सशक्तिकरण (Women Empowered) की ताकत बने, या फिर कमजोर सिस्टम के कारण भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला,यह अब सरकार की निगरानी और इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।