लाड़ली बहना: अब सिर्फ बहनों को मिलेगी राशि, 20वीं किस्त 12 को आएगी

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भोपाल। राज्य सरकार मप्र लाड़ली बहना योजना में कटौती करने की तैयारी में है। योजना में साठ साल से अधिक आयु की करीब 1लाख 63 हजार महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है। दावे,आपत्तियों के बाद कुछ अन्य नाम भी काटे गए हैं।
योजना में अब सिर्फ 1करोड़ 26लाख से कुछ अधिक महिलाएं ही पात्र हैं। इन्हें योजना की योजना की 20वीं किस्त आगामी 12 जनवरी को दी जाएगी।

मिल गया 5 हजार करोड़ का ​कर्ज

इस दिन विवेकानंद जयंती भी है। इसके तहत प्रत्येक पात्र हितग्राही बहना के खाते में 1250 रुपए अंतरित होंगे। इससे पहले 11 दिसंबर 2024 को 1.28 करोड़ महिलाओं के खाते में 1572 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे। किस्त की भरपाई करने सरकार को एक जनवरी को 5हजार करोड़ कर्ज और मिल गया है। स्वामी विवेकानंद जयंती पर राजधानी भोपाल में दो अलग-अलग कार्यक्रम होंगे। एक युवाओं के लिए व दूसरा लाड़ली बहनों के लिए। पहले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव युवा ​शक्ति मिशन लांच करेंगे तो दूसरे में बहनों के खातों में राशि अंतरि​त होगी।

20महीने में नाम सिर्फ कटे,नए जुड़े नहीं

इस योजना में नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं, इसके उलट 20 माह से लागू इस योजना में पात्र महिलाओं के नाम उम्र और अन्य शर्तों के आधार पर कटते जा रहे हैं। इसी कारण इनकी संख्या 2023 और 2024 में बढ़ने की बजाय घटी है।
जब योजना शुरू हुई थी तो कुल 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन आए थे। इसके बाद 2 लाख 18 हजार 858 नाम आपत्तियों को आधार बनाकर काटे गए थे। जिसके बाद यह संख्या 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। योजना में ऐसी हितग्राहियों के नाम भी हर माह काटे जाते हैं,जिनकी मृत्यु हो गई हो अथवा जो लाभ ​लेने से लिखित इंकार कर दे। इसके चलते योजना में हितग्राही महिलाओं की संख्या अब करीब 1करोड़ 26 लाख रह गई है।

60 साल तक हैं पात्र
दरअसल,महिला एवं बाल विकास ने जो योजना को लेकर नई शर्त तय की है। इसके तहत हितग्राही महिला का जन्म 1जनवरी 1963 के बाद और 1जनवरी 2000 से पहले हुआ हो। वह शादीशुदा हो। तय उम्र की विधवा,परित्यक्ता व तलाकशुदा महिलाएं भी योजना में पात्र हैं। उम्र के इस क्राइटेरिया में 1जनवरी 1963 से पहले जन्मीं ऐसी हितग्राही ​महिलाएं जिनकी उम्र साठ साल हो चुकी है। उन्हें योजना से बाहर किया गया है।दरअसल,वह सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना की पात्र हो जाती हैं।