भोपाल(18-07-24)। मप्र में अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम कार्यक्रमों में भी पलीता लगाने से नहीं चूक रहे हैं। ऐसा ही एक मामला विज्ञान क्षेत्र में काम करने वाली संस्था मेपकॉस्ट में सामने आया है..यहां पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट” विज्ञान सर्वत्र पूज्यते “में मनमाने तरीके से 26 लाख रुपए की घोटाले की कोशिश हुई लेकिन बीच में ही मामला उजागर हो गया। इसके बावजूद 11 लाख रुपए का भुगतान निजी फर्म को हो गया।
बात,साल 2022 की है। इसकी शिकायत मेपकास्ट के ही वरिष्ठ प्रधान विज्ञानी डॉ.नरेंद्र शिवहरे ने लोकायुक्त व याचिका दायर कर मप्र हाईकोर्ट में की है।इसमें बताया गया कि कैसे मेपकॉस्ट महानिदेशक के इशारे पर बेक डेट में निविदा के कागज कार्यालय में ही तैयार हो गए। फर्म का नाम भी तय हो गया और मंहगे दाम पर वस्तुओं की खरीदी भी हो गई। यहां तक कि खरीदी गई वस्तुओं का नियमानुसार भंडार सत्यापन भी नहीं कराया गया।
खरीदी पर सवाल उठे और मामला उजागर होने की भनक लगी तो तय राशि में से 16 लाख रुपए की कटौती दिखाकर,संबंधित फर्म को 11 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया। फर्म ने भी 16 लाख रुपए के घाटे पर कोई आपत्ति नहीं ली।
हाईकोर्ट में दायर याचिका के साथ संलग्न शपथ पत्र में संस्थान के मुख्य विज्ञानी डॉ. राकेश आर्या ने भी घोटाले को लेकर गवाही दी।
कार्यक्रम के लिए मिली सरकारी राशि को खुर्द-बुर्द करने भोपाल, ग्वालियर व जबलपुर में 22 फरवरी से 28 फरवरी 2022 के बीच कई आयोजन होना बताए गए। इनमें वैज्ञानिकों के व्याख्यान,रेडियो शो,वैज्ञानिक फिल्म का प्रदर्शन व विज्ञान प्रदर्शनी शामिल हैं।
अब संस्था के महानिदेशक डॉ अनिल कोठारी कह रहे हैं कि शिकायतकर्ता को वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित किया गया है,इसके चलते वे इधर-उधर झूठी शिकायत करते घूम रहे हैं।
बहरहाल,जांच में जो बात सामने आए,लेकिन मप्र में मेपकॉस्ट इसी तरह के कारनामों व आपसी विवादों के लिए जाना जाता है।