पीएम मोदी का झाबुआ सम्मेलन

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सत्ता के गलियारे से—- रवि अवस्थी ** झाबुआ सम्मेलन के बहाने
एक बार फिर रामलहर पर सवार बीजेपी का नैरेटिव सेट है। इसे और पुख्ता करने उसने ‘370’ का जादुई अंक भी इसमें जोड़ दिया है। बावजूद इसके वह अपनी छोटी से छोटी कमी को भी कम नहीं आंकती। मप्र में पीएम के सम्मेलन के लिए झाबुआ का चयन इसकी बानगी है। दरअसल,बीजेपी जानती है कि लाड़ली बहना का जादू मप्र के आदिवासी अंचलों में उतना असर नहीं दिखा सका जितना अन्य जिलों में।

पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों पर ही गौर करें तो उसका वोट शेयर 7.86 फीसद बढ़ा लेकिन एसटी सीटें महज आठ। यानी आदिवासी अंचल में मामला अब भी लगभग फिफ्टी-फिफ्टी का है। झाबुआ में सम्मेलन कर उसने न केवल मप्र बल्कि पड़ोसी राज्यों के आदिवासियों को भी साधने की कवायद की है।

** एक और आइकॉन पाले में
भाजपानीत एनडीए सरकार ने बीते 18 दिनों में देश की पांच हस्तियों को भारत रत्न देने का ऐलान कर विपक्षी दलों को भी चौंका दिया। सबसे चौंकाने वाला नाम देश के नौंवे प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव का रहा। राव के नाम का ऐलान कर दक्षिण को तो संदेश दिया ही। इस सम्मान के बहाने बीजेपी ने बेहद चतुराई से कांग्रेस के एक और आइकॉन को भी उससे छीन लिया।
सुभाषचंद्र बोस,सरदार वल्लभ भाई पटेल ,लाल बहादुर शास्त्री व प्रणव मुखर्जी के बाद अब राव कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हो गए जो कांग्रेस के होते हुए भी अब उसके नहीं रह गए। भारत रत्न के ऐलान पर स्व. राव के पोते एन.वी. सुभाष की प्रतिक्रिया इसका उदाहरण है। पीएम का यह दांव कांग्रेस के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं।

**अटकलों को मिला बल
गुजरते सप्ताह में कांग्रेस नेता कमलनाथ की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित बीजेपी के अन्य नेताओं से मुलाकात सियासी हलकों में चर्चा का विषय रही। इस मुलाकात का पहला नतीजा छिंदवाड़ा कलेक्टर के तत्काल बदलाव के तौर पर सामने आया ,लेकिन मप्र कांग्रेस में बसंत से पहले आए ‘पतझड़’ ने इस मुलाकात को भी सियासी बना दिया।
जब राज्यसभा व लोकसभा दोनों के चुनाव सिर पर हों तो इन अटकलों को बल मिलना भी बहुत स्वाभाविक है।अटकलें यही,कि राज्यसभा की एक सीट देकर बीजेपी कहीं कांग्रेस से उसकी इकलौती लोकसभा सीट भी न झटक ले। अब अटकलें तो अटकलें ठहरी। बात बनी तो ठीक,वर्ना सब अपनी-अपनी राह।

** कैसे तय हों उम्मीदवार ?
एक तो पराजय व हालात से कार्यकर्ताओं में उपजी हताशा,दूसरे एक और चुनाव। इस पर न्याय यात्रा को सफल बनाने की जिम्मेदारी अलग। ऐसे हालात में मप्र कांग्रेस के नए अध्यक्ष जीतू पटवारी की चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के दो दिग्गज नेताओं ने चुनाव से किनारा क्या किया,इनका अनुसरण करने वालों की कतार लग गई।
प्रत्याशी चयन को लेकर स्क्रीनिंग कमेटी से लेकर पार्टी प्रदेशस्तर पर भी बैठकों के कुछ दौर हो चुके हैं। दावा,वक्त से पहले उम्मीदवारों के नामों के ऐलान का था। पर हालात को देखते हुए इसकी संभावना कम ही नजर आती है।

** फिर गच्चा खा गए विजयवर्गीय
प्रदेश के संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय बड़े नेता हैं। सियासत के मिजाज को वक्त से पहले भांपने में भी माहिर माने जाते हैं,लेकिन यह दूसरा मौका है जब वह इस मामले में चूके। पहला खुद को विधायक प्रत्याशी बनाए जाने पर (जिसका खुलासा उन्होंने स्वयं किया था) और अब लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम आगे बढ़ाकर। उनके प्रस्ताव पर बैठक में चुप्पी छा गई। बैठक के चंद दिन बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से आधा घंटे की मुलाकात हुई और अब उनका पश्चिम बंगाल का दौरा तय हो गया।

** नई तकनीक का इंतजार
सोशल मीडिया की सियासत व जमीनी हकीकत में जो फर्क है,भिंड की यह घटना इसकी बानगी है। हुआ यूँ , कि चंद दिन पहले एमपी बीजेपी ने एक्स हैंडिल पर दावा किया कि मप्र में अब खनन माफिया की खैर नहीं,एआई से होगी निगरानी। इसके कुछ घंटे बाद ही जिले में सिंध नदी की इंदुर्खी खदान पर खनन माफिया ने पहले पूजा-अर्चना की। इसके बाद अवैध खनन शुरू किया गया।

लोगों ने इसके वीडियो प्रशासन को मुहैया कराए,लेकिन जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली। जिम्मेदार कह सकते हैं कि वे अपनी जगह सही हैं। बात सिर्फ निगरानी की है। यह काम वे पहले से कर रहे हैं। खनन रोकने की इच्छाशक्ति जब ‘ऊपर’ ही नहीं तो वे अपनी जान क्यों गंवाए ? सदन में माननीयों की उजागर हुई पीड़ा तो यही बताती है।

** कैसे आए सुशासन ?
राजधानी के समीपस्थ एक जनपद में सात करोड़ की विकास निधि आवंटन का इंतजार कर रही है,लेकिन आवंटनकर्ता अधिकारी को बीस प्रतिशत कमीशन चाहिए। वह भी नकद और अग्रिम। कुछ आस नीचे का अमला व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी लगाए हुए हैं। वर्क आर्डर जारी होने तक रकम कितनी बचेगी? इस बारे में ठीक-ठीक कुछ कहा नहीं जा सकता। अलबत्ता, यह तय कि विकास कार्यों के लोकार्पण व शिलान्यास के वक्त इसके सौ फीसद हिस्से का ही जिक्र रहेगा।

** ‘लाड़ली ‘ संग भेद !
भोपाल गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग ने घोषणा के दो साल बाद ही सही,लेकिन गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान कार्ड बनाने का काम शुरू कर दिया। इसके लिए जो बेहद जरूरी शर्त है,वह बीएमएचआरसी का पंजीयन कार्ड होना। यानी पहले एक कार्ड बने फिर दूसरा ! पीड़ित दोनों में सफल भी हुआ तब गैस राहत अस्पतालें तो राहत महसूस करेंगी लेकिन उसकी दुविधा फिर भी बनी रहना है । दरअसल, योजना में पीड़ित पुरुष के बालिग,नाबालिग बच्चों को तो पात्र माना गया लेकिन वर्ष 84 के बाद वाली पत्नी/पत्नियों को नहीं।

** सेवावृद्धि की तैयारी
मप्र की 34वीं मुख्य सचिव वीरा राणा को सेवावृद्धि दिए जाने की सिफारिश राज्य सरकार ने कर दी है। माना जा रहा है केंद्र जल्द ही राज्य के फैसले पर मुहर लगा देगा। ऐसा होता है तो राणा आगामी सितंबर तक मुख्य सचिव बनी रहेंगी। सेवावृद्धि पाने वाली वह प्रदेश की पांचवी मुख्य सचिव होंगी।

प्रदेश में मुख्य सचिव को सेवावृद्धि दिलाए जाने का सिलसिला तत्कालीन पटवा सरकार में शुरू हुआ। तब मार्च 1991 में सेवानिवृत होने जा रहे तत्कालीन सीएस आर.पी. कपूर को छह माह की सेवावृद्धि मिली थी। इसके बाद तो यह परंपरा सी बन गई। शिवराज सरकार में बी.पी. सिंह, आर.परशुराम को 6-6 माह व इसके बाद इकबाल सिंह बैंस को दो बार छह-छह माह की सेवावृद्धि मिली।

** लोकसेवा का फर्क
रतलाम जिले में जावरा के एसडीएम रहे अनिल भाना राज्य प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2016 बैच के अधिकारी हैं। बतौर डिप्टी कलेक्टर अपने सेवाकाल की शुरुआत रतलाम जिले से ही की। एक बार झाबुआ भेजे भी गए तो जुगत भिड़ाकर वापस आ गए। गत 19 जनवरी को भाना का एक वीडियो वायरल होता है।इसमें वह स्वयं के हिंदू होने पर गर्व व्यक्त करते हुए लोगों से आह्वान करते हैं-जीभर के पटाखे फोड़िए। मैंने ढाई सौ लोगों को पटाखों के लाइसेंस जारी किए हैं। भाना का दूसरा वीडियो गत 6 फरवरी को आया। इसमें वह सनातनी किसानों को गरियाते,धमकाते दिखे। इस असहनीय कृत्य पर उन्हें पदस्थापना गंवाना पड़ी।

** एक लोकसेवक यह भी
इसी दिन,एक अन्य तस्वीर डिंडौरी के जिला कलेक्टर विकास मिश्रा की सामने आई। मिश्रा के सरकारी वाहन पर कलेक्टर की जगह लोकसेवक की पट्टिका लगी हुई है। मिश्रा भी एसएएस से आइएएस बने हैं। गौर कार्यकाल के दौरान बुदनी में ट्राइडेंट के लिए किसानों की जमीन के जबरिया अधिग्रहण मामले को अपवाद माना जाए तो बतौर आइएएस मिश्रा प्रदेश के अन्य कलेक्टर्स के लिए नजीर बने हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज तो उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे।
** प्रेमियों पर दोहरा संकट
वैलेंटाइन प्रेमियों पर पहले ही भारतीय संस्कृति से विमुख कृत्य करने के आरोप लगते रहे हैं। इस बार तो यह विशेष दिवस और बसंत पंचमी एक ही दिन है। ऐसे में वैलेंटाइन प्रमियों की दुविधा और बढ़ गई है। किसे पूजें और किसे नहीं!

** विनम्र श्रद्धांजलि
राजधानी के हरदिल अजीज,वरिष्ठ पत्रकार राकेश अग्निहोत्री के वयोवृद्ध पिता आरके अग्निहोत्री का शनिवार को उनके गृहनगर नौगांव, छतरपुर में निधन हो गया। वह कुछ समय से अस्वस्थ थे। दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏🙏