MP Bhojpur Assembly:; 56 साल में यहां सिर्फ 3 बार जीती कांग्रेस

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रवि अवस्थी,भोपाल। Bhojpur Assembly राजधानी भोपाल से 30 किमी दूर ऐतिहासिक भोजपुर मंदिर..इसे अपने दौर के प्रसिद्ध परमार राजा भोज ने 11वीं सदी में तैयार कराया था..देश का सबसे बड़ा शिवलिंग इसी मंदिर में स्थापित है..विंध्य पर्वतमाला पर स्थापित इस मंदिर के नजदीक ही कालांतर में मंडीदीप औद्यागिक क्षेत्र विकसित किया गया..

भोजपुर मंदिर के नाम पर ही क्षेत्र की विधानसभा का नाम पड़ा..राजधानी के नजदीक इस सीट को रायसेन जिले की सबसे अहम सीट माना जाता है,जहां से पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा,पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी जैसे दिग्गज राजनेता भीअपना भाग्य आजमा चुके हैं.

भोजपुर रायसेन जिले की चार विधानसभा सीटों में एक सामान्य सीट…1967 में यह अस्तित्व में आई..बीते पांच दशक के चुनावी इतिहास में कांग्रेस इस सीट से महज दो बार ही चुनाव जीत सकी..बाकी समय यहां जनसंघ व उसके पश्चातवर्ती संगठन बीजेपी का ही कब्जा रहा..इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भोजपुर एक तरह से बीजेपी का गढ़ रही..शुरुआती दो चुनाव में तामोट के रहवासी गुलाबचंद तामोट लगातार दो बार यहां से विधायक रहे..लेकिन आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव ने भोजपुर के मतदाताओं का मूड पूरी तरह बदल दिया..

तीन साल बाद यानी 1980 में कांग्रेस ने वापसी की लेकिन भोजपुर में कांग्रेस लहर का कोई असर नहीं पड़ा..इस दौर में भी भोजपुर से नई नवेली बीजेपी के शालिग्राम श्रीवास्तव ने कांग्रेस प्रत्याशी को करारी शिकस्त दी..बीजेपी के प्रति भोजपुर के इस रुझान को देखते हुए इसी दल के दिग्गज नेता सुंदरलाल पटवा ने अपने गृह क्षेत्र कुकड़ेश्वर को छोड़ भोजपुर सीट को चुना और 1985 से 1998 तक 4 बार विधायक चुने गए..

1997 के लोकसभा चुनाव में पटवा को छिंदवाड़ा से प्रत्याशी बनाए जाने पर यहां हुए उपचुनाव में उनके समर्थक रामकिशन चौहान विधायक चुने गए..1998 के आम चुनाव में पटवा एक बार फिर भोजपुर से मैदान में उतरे और विधायक चुने गए..2008 से 2018 तक अब उनके भतीजे सुरेंद्र पटवा इस सीट से विधायक हैं..अलबत्ता भोजपुर के मतदाताओं ने वर्ष 2003 के चुनाव में उस वक्त चौंकाया,जब उमा लहर ने समूचे प्रदेश में बीजेपी को बंपर जीत दिलाई,लेकिन वह भोजपुर हार गई..इस चुनाव में कांग्रेस के राजेश पटेल विधायक चुने गए…

भोजपुर से अब तक रहे विधायक व उनका दल
1967             गुलाबचंद तामोट               कांग्रेस
1972            गुलाबचंद तामोट                कांग्रेस
1977           परब चंद जैन                     जनता पार्टी
1980           शालिग्राम श्रीवास्तव             बीजेपी
1985           सुंदरलाल पटवा                  बीजेपी
1990           सुंदरलाल पटवा                  बीजेपी
1993           सुंदरलाल पटवा                  बीजेपी
1997          रामकिशन चौहान                बीजेपी
1998          सुंदरलाल पटवा                  बीजेपी
1999          नरेश पटेल                        बीजेपी
2003         राजेश पटेल                       कांग्रेस
2008        सुरेंद्र पटवा                         बीजेपी
2013        सुरेंद्र पटवा                         बीजेपी
2018        सुरेंद्र पटवा                         बीजेपी

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बीजेपी के प्रभाव वाली सीट

जातिगत समीकरण की बात की जाए तो भोजपुर अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है..लेकिन इनकी फैली हुई बसाहट से यहां कोई आदिवासी नेतृत्व नहीं उभर सका..मतदाताओं में दूसरी बड़ी संख्या ओबीसी वर्ग की है..इनके अलावा अनुसूचित जाति के दस हजार मतदाता भी चुनाव के समीकरण बनाने बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा करते हैं..

भोजपुर में अब तक हुए 14 चुनाव में 11 बार जनसंघ,जनता पार्टी व बीजेपी ने जीत दर्ज कराई..कांग्रेस सिर्फ 3 बार ही इस सीट से जीत का स्वाद चख पाई..अब तक के परिणामों से साफ है कि भोजपुर बीजेपी के प्रभाव वाली सीट है..इसके चलते जातिगत समीकरण यहां कोई मायने नहीं रखते..अंचल से लगातार मिली पराजय के कारण कांग्रेस का कोई बड़ा नेता यहां उभर नहीं सका..

इसके चलते कई बार तो उसके समक्ष दमदार उम्मीदवार का भी टोटा रहा..वर्ष 2018 के चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं इसी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बीलाखेड़ी निवासी सुरेश पचौरी ने भी इस सीट से अपना भाग्य आजमाया लेकिन उन्हें करीब 30 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा ..
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भोजपुर सीट के जातिगत समीकरण
कुल मतदाता                           2,42,356
पुरुष मतदाता                          1,27,688
महिला मतदाता                       1,26,264
अनुसूचित जनजाति                 65 से 70 हजार
अनुसूचित जाति                      15 से 20 हजार
ओबीसी                                 55 से 60 हजार
ब्राह्मण                                   16 से 20 हजार
किरार                                   25 से 30 हजार
धाकड                                  20 से 25 हजार
मुस्लिम व अन्य                          शेष

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चुनावी सरगर्मियां फिर तेज: भोजपुर में चुनावी सरगर्मियां एक बार फिर तेज हैं..बीजेपी से पुन: मौजूदा विधायक सुरेंद्र पटवा को दोहराए जाने की संभावना है..

ऐसे में देखना होगा कि विधायक पटवा की हैट्रिक आगे रफ्तार पकड़ेगी या लगेगा ब्रेक..इसके लिए फिलहाल चुनाव तक इंतजार करना होगा..

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.. प्राचीन शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है भोजपुर
.. परमार राजा भोज ने बनवाया था विशाल मंदिर
.. भोजपुर गांव के नाम पर है विधानसभा की सीट
.. पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा की पसंदीदा रही सीट
.. अजय सिंह,सुरेश पचौरी लड़ चुके हैं यहां से चुनाव
.. अब तक हुए 14 चुनाव में 12 बार हारी कांग्रेस
.. भोजपुर विस को माना जाता है भाजपा का गढ़

विकास कार्यों की बयार

 
बीते कुछ वर्षों में भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में विकास कार्य हुए। औबेदुल्लागंज विकासखंड अंतर्गत ग्राम तामोट में प्लास्टिक पार्क स्थापित हुआ तो इसी गांव के सामने निजी औद्योगिक इकाई सागर ग्रुप्स की अनेक इकाइयां स्थापित होने से रोजगार के अवसर बढ़े हैं। भोपाल से जबलपुर व नर्मदापुरम फोरलेन सड़क से क्षेत्र में आवागमन व परिवहन सेवाएं सुगम हुईं। क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछने के साथ ही फ्लाई ओवर ब्रिज की सौगात भी क्षेत्र को मिलीं। इनके अलावा सिंचाई क्षमता में वृद्धि,ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि विकास दर में भी इजाफा हुआ।मौजूदा सत्तारूढ़ दल बीजेपी इन विकास कार्यों के बलबूते एक बार फिर जीत को लेकर आशान्वित है।