रवि अवस्थी,भोपाल। Bhojpur Assembly राजधानी भोपाल से 30 किमी दूर ऐतिहासिक भोजपुर मंदिर..इसे अपने दौर के प्रसिद्ध परमार राजा भोज ने 11वीं सदी में तैयार कराया था..देश का सबसे बड़ा शिवलिंग इसी मंदिर में स्थापित है..विंध्य पर्वतमाला पर स्थापित इस मंदिर के नजदीक ही कालांतर में मंडीदीप औद्यागिक क्षेत्र विकसित किया गया..
भोजपुर मंदिर के नाम पर ही क्षेत्र की विधानसभा का नाम पड़ा..राजधानी के नजदीक इस सीट को रायसेन जिले की सबसे अहम सीट माना जाता है,जहां से पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा,पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी जैसे दिग्गज राजनेता भीअपना भाग्य आजमा चुके हैं.
भोजपुर रायसेन जिले की चार विधानसभा सीटों में एक सामान्य सीट…1967 में यह अस्तित्व में आई..बीते पांच दशक के चुनावी इतिहास में कांग्रेस इस सीट से महज दो बार ही चुनाव जीत सकी..बाकी समय यहां जनसंघ व उसके पश्चातवर्ती संगठन बीजेपी का ही कब्जा रहा..इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भोजपुर एक तरह से बीजेपी का गढ़ रही..शुरुआती दो चुनाव में तामोट के रहवासी गुलाबचंद तामोट लगातार दो बार यहां से विधायक रहे..लेकिन आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव ने भोजपुर के मतदाताओं का मूड पूरी तरह बदल दिया..
तीन साल बाद यानी 1980 में कांग्रेस ने वापसी की लेकिन भोजपुर में कांग्रेस लहर का कोई असर नहीं पड़ा..इस दौर में भी भोजपुर से नई नवेली बीजेपी के शालिग्राम श्रीवास्तव ने कांग्रेस प्रत्याशी को करारी शिकस्त दी..बीजेपी के प्रति भोजपुर के इस रुझान को देखते हुए इसी दल के दिग्गज नेता सुंदरलाल पटवा ने अपने गृह क्षेत्र कुकड़ेश्वर को छोड़ भोजपुर सीट को चुना और 1985 से 1998 तक 4 बार विधायक चुने गए.
.
1997 के लोकसभा चुनाव में पटवा को छिंदवाड़ा से प्रत्याशी बनाए जाने पर यहां हुए उपचुनाव में उनके समर्थक रामकिशन चौहान विधायक चुने गए..1998 के आम चुनाव में पटवा एक बार फिर भोजपुर से मैदान में उतरे और विधायक चुने गए..2008 से 2018 तक अब उनके भतीजे सुरेंद्र पटवा इस सीट से विधायक हैं..अलबत्ता भोजपुर के मतदाताओं ने वर्ष 2003 के चुनाव में उस वक्त चौंकाया,जब उमा लहर ने समूचे प्रदेश में बीजेपी को बंपर जीत दिलाई,लेकिन वह भोजपुर हार गई..इस चुनाव में कांग्रेस के राजेश पटेल विधायक चुने गए…
भोजपुर से अब तक रहे विधायक व उनका दल
1967 गुलाबचंद तामोट कांग्रेस
1972 गुलाबचंद तामोट कांग्रेस
1977 परब चंद जैन जनता पार्टी
1980 शालिग्राम श्रीवास्तव बीजेपी
1985 सुंदरलाल पटवा बीजेपी
1990 सुंदरलाल पटवा बीजेपी
1993 सुंदरलाल पटवा बीजेपी
1997 रामकिशन चौहान बीजेपी
1998 सुंदरलाल पटवा बीजेपी
1999 नरेश पटेल बीजेपी
2003 राजेश पटेल कांग्रेस
2008 सुरेंद्र पटवा बीजेपी
2013 सुरेंद्र पटवा बीजेपी
2018 सुरेंद्र पटवा बीजेपी
…………………….
बीजेपी के प्रभाव वाली सीट
जातिगत समीकरण की बात की जाए तो भोजपुर अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है..लेकिन इनकी फैली हुई बसाहट से यहां कोई आदिवासी नेतृत्व नहीं उभर सका..मतदाताओं में दूसरी बड़ी संख्या ओबीसी वर्ग की है..इनके अलावा अनुसूचित जाति के दस हजार मतदाता भी चुनाव के समीकरण बनाने बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा करते हैं..
भोजपुर में अब तक हुए 14 चुनाव में 11 बार जनसंघ,जनता पार्टी व बीजेपी ने जीत दर्ज कराई..कांग्रेस सिर्फ 3 बार ही इस सीट से जीत का स्वाद चख पाई..अब तक के परिणामों से साफ है कि भोजपुर बीजेपी के प्रभाव वाली सीट है..इसके चलते जातिगत समीकरण यहां कोई मायने नहीं रखते..अंचल से लगातार मिली पराजय के कारण कांग्रेस का कोई बड़ा नेता यहां उभर नहीं सका..
इसके चलते कई बार तो उसके समक्ष दमदार उम्मीदवार का भी टोटा रहा..वर्ष 2018 के चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं इसी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बीलाखेड़ी निवासी सुरेश पचौरी ने भी इस सीट से अपना भाग्य आजमाया लेकिन उन्हें करीब 30 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा ..
*********************************************************************************
भोजपुर सीट के जातिगत समीकरण
कुल मतदाता 2,42,356
पुरुष मतदाता 1,27,688
महिला मतदाता 1,26,264
अनुसूचित जनजाति 65 से 70 हजार
अनुसूचित जाति 15 से 20 हजार
ओबीसी 55 से 60 हजार
ब्राह्मण 16 से 20 हजार
किरार 25 से 30 हजार
धाकड 20 से 25 हजार
मुस्लिम व अन्य शेष
********************************************************************

















