Bhopal Madhya Constituency : जहां मतों का ध्रुवीकरण बड़ा सहारा

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रवि अवस्थी,भोपाल।Bhopal Madhya Constituency वर्ष 2008 में अस्तित्व में आई भोपाल जिले की मध्य सीट चुनाव के लिहाज से सबसे कठिन सीट मानी जाती है…बीजेपी के लिए भी और कांग्रेस के लिए भी..पुराने व नए भोपाल के 13 वार्डों को अपने में समेटे इस सीट का सियासी मिजाज विविधताओं से भरा है..

क्षेत्र में बड़ी आबादी मुस्लिम मतदाताओं Muslim Voters की है..जो मतदान भी खूब करते हैं..जो इन्हें अपने पाले में ला सके,सीट का ताज उसी के सिर सजते रहा..सीट का इतिहास बहुत पुराना नहीं है..लेकिन अगले चुनाव में यहां क्या होंगे सियासी समीकरण इसे समझने से पहले,एक नजर सीट के अब तक के चुनाव नतीजों पर..
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वर्ष            विधायक बने              दल
2008     ध्रुव नारायण सिंह        बीजेपी
2013    सुरेंद्र नाथ सिंह            बीजेपी
2018    आरिफ मसूद              कांग्रेस
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भौगोलिक क्षेत्र ने सीट को बनाया जटिल
भोपाल मध्य Bhopal Madhya के क्षेत्रफल पर गौर किया जाए तो इसके एक छोर पर पुराने शहर के सर्राफा बाजार का कुछ हिस्सा है तो दूसरे छोर पर शाहपुरा की एक पट्टी भी इसी विधानसभा क्षेत्र में आती है…बीच के हिस्सों में बरखेडी,जहांगीराबाद,एमपी नगर के साथ अरेरा पहाड़ी भी इसमें शामिल है..यहां सिर्फ बरखेडी,जिंसी,जहांगीराबाद Jhangirabad व सर्राफा क्षेत्र ही घनी आबादी वाले हिस्से हैं…

घनी आबादी Dense Population वाले ज्यादातर हिस्से मुस्लिम बाहुल्य हैं..सीट का भौगोलिक क्षेत्र ही इसकी जटिलता की एक बड़ी वजह रही है..शुरुआती दो चुनाव में इस सीट से जहां बीजेपी का ‘कमल’ खिला तो पिछले चुनाव में कांग्रेस के ‘पंजा’ ने बाजी मारी..

यहां के जातिगत समीकरण Caste Equation पर गौर करें तो 2लाख 39 हजार 558 मतदाताओं वाली इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या एक लाख से अधिक अर्थात करीब 42 प्रतिशत है..शेष में अन्य जाति वर्ग के मतदाता शामिल हैं..
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मध्य में कुल मतदाता 2,39,558
पुरुष मतदाता 1,23,719
महिला वोटर्स 1,15,839
मुस्लिम वोटर्स करीब 42 %
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मुख्य मुकाबला बीजेपी व कांग्रेस के बीच
भोपाल मध्य सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी व कांग्रेस के बीच ही होते रहा है..यहां जीत.हार 15 हजार से कम मतों से ही होती रही है..वर्ष 2008 के चुनाव में बीजेपी के ध्रुव नारायण सिंह ने कांग्रेस के नासिर इस्लाम को सिर्फ 2419 मतों से शिकस्त दी थी.. विधायक रहते हुए ध्रुवनारायण विवादों में घिरे तो बीजेपी ने 2013 के चुनाव में पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे सुरेंद्र नाथ सिंह Surendra nath singh को मैदान में उतारा..इस चुनाव में भी बीजेपी ने कांग्रेस के आरिफ मसूद को 6981 मतों से पराजित किया..

ध्रुव नारायण हों या सुरेंद्र नाथ दोनों ही जमीन से जुड़े नेता होने के कारण शुरुआती दो चुनाव में उन्हें मुस्लिम मतदाताओं का भी समर्थन मिला..लेकिन 2018 के चुनाव में कांग्रेस के जुझारू नेता आरिफ मसूद ने करीब 53 प्रतिशत वोट हासिल कर बीजेपी के सुरेंद्र नाथ सिंह को 14 हजार 757 मतों से हराया…यह इस सीट पर अब तक की सबसे बड़ी जीत रही..इस चुनाव Election में करीब 63 प्रतिशत मतदान हुआ..मतदान करने वालों में बड़ी संख्या मुस्लिम मतदाताओं की रही।
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बीजेपी,कांग्रेस के मध्य ही है मुकाबला
15 हजार से कम रहा जीत का मार्जिन
पुराने शहर में होता है अधिक मतदान
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जातिगत समीकरण सबसे अहमइसमें कोई दो राह नहीं कि भोपाल मध्य में जातिगत समीकरण सबसे अहम हैं..मतदान से पूर्व मतों का ध्रुवीकरण Polarization इस क्षेत्र के लिए कोई नई बात नहीं है..2023 के चुनाव को लेकर बीजेपी से पूर्व विधायकों सहित अन्य दावेदार हैं तो कांग्रेस से मौजूदा विधायक आरिफ मसूद की क्षेत्र में निरंतर सक्रियता व कराए गए विकास कार्यों के बलबूते वह अपनी पार्टी की ओर से एक बार फिर सशक्त दावेदार हैं..हालांकि अंतर्कलह कांग्रेस में भी कम नहीं है..

पूर्व के चुनाव में भी कुछ नेता बगावती तेवर दिखाते हुए चुनाव मैदान में उतरते रहे…आगे भी इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता..भोपाल मध्य बीजेपी की 103 आकांक्षी सीटों में एक है..

बड़ा सवाल यही कि बीजेपी यदि इस सीट पर पुन: काबिज होना चाहती है तो वह चेहरा कौन होगा..जो मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन Support भी हासिल कर सके.. कौन होंगे भोपाल मध्य से चुनाव लड़ने वाले नए चेहरे और क्या होंगे राजनीतिक दलों के समीकरण .. मतों का ध्रुवीकरण Polarization हुआ तो कौन देगा किसे मात ..इसके लिए चुनाव Election तक करना होगा इंतजार..