पाली,विक्की दाहिया। नगर की सौंदर्यता बढ़ाने के नाम पर नगरीय निकाय किस तरह सरकारी धन को पलीता लगाते हैं। उमरिया जिले की बिरसिंहपुर पाली में सगरा व अन्य तालाबों के सौंदर्यकरण के नाम पर किए गए निर्माण कार्य इसकी बानगी है। जहां धन भी गया और जनता के हाथ लगी वही निराशा। हैरत की बात यह कि जिन्हें विकास व उनकी निगरानी का आमजन ने बड़ी उम्मीदों से दायित्व सौंपा,वे भी इस ओर से आंख बंद किए हुए हैं।इसके चलते उनकी कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।
बानगी जान लीजिए..,(Photo: झील को चिढ़ाता कथित उद्यान) पाली के वार्ड सात में कई एकड़ में फैले तालाब की दुर्दशा को लोग अपने दुर्दिन व नियति मान बैठे थे। बहरहाल,प्रदेश में चौथी बार शिवराज सरकार बनी तो इसकी सुध ली गई। जिले के प्रभारी मंत्री रामकिशोर कांवरे व अनुसूचित जाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह के प्रयासों से बडी बजट राशि यहां के तालाब सौंदर्यीकरण के लिए मंजूर हुई। निर्माण कार्य भी शुरू हुए,जिम्मा मिला स्थानीय नगर पालिका परिषद को। जहां बीते साल ज्यादातर प्रतिनिधि मंत्री सुश्री मीना सिंह की पसंद के चुने गए।
अब विकास कार्यों की हकीकत जानें
शहर का यह प्रमुख जलाशय पर्यावरण प्रेमियों एवं नवरात्रि पर्व के दौरान जवारा विसर्जन करने वालों के लिए आस्था का केंद्र रहा है। विगत चैत्र नवरात्र यानी रामनवमी के दिन ही पाली की इन झीलों में बडी संख्या में श्रद्धालु जवारा विसर्जन करने जमा हुए। लेकिन इनकी आस्था उस समय खंड-खंड हो गई जब विसर्जन के लिए बनाए गया कुंड कार्यक्रम से पहले ही रीत गया।
बताया जाता है कि इसमें एक रात पहले ही पानी से भरा गया था,लेकिन घटिया निर्माण पानी का दबाव नहीं झेल सका और श्रद्धालुओं को पोखरों में भरे पानी में ही जवारे विसर्जित करने पडे।
कमोबेश यही स्थिति अन्य निर्माण कार्यों की है। मसलन,तालाब जीर्णोद्धार के नाम पर विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य किए गए। इनमें तालाब के चारों और पक्की सडक का निर्माण,पैदल यात्रियों के लिए पेबल्स पाथ.वे निर्माण,झील किनारे बाउंड्री वाल निर्माण, पानी निकास के लिए नाली निर्माण,पक्के घाट तालाब का गहरीकरण एवं इसके गैर डूब वाले क्षेत्र में उद्यान विकास के नाम पर किया गया कथित पौधरोपण। उक्त सभी प्रकार के निर्माण पर करोड़ों रुपए व्यय करने के बाद भी गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया।
आलम यह है कि इतनी बड़ी राशि व्यय करने के बाद सड़क मानसून सीजन से पहले ही कई जगह दरक रही है। तो पेबल्स पाथ.वे इतने संकीर्ण व बेतरतीब तरीके से बनाया गया कि इस पर दो लोग एक साथ तो चल ही नहीं सकते। पाथ वे पर जगह.जगह लगा मिट्टी का ढेर बता रहे हैं कि पाथ वे को जनता के लिए नहीं बल्कि खानापूर्ति के लिए बनाया गया।
वहीं बाउंड्री वाल एवं नाली की दीवार कई जगह से या तो अधूरी छोड दी गई या जो निर्माण हुआ वह पहली तिमाही भी नहीं टिक सका। यही हाल कथित उद्यान एवं अंकुर अभियान किए गए पौध रोपण का है। बताया जाता है कि अव्वल तो एक ही पौधे के कई एंगल के फोटो मुख्यालय प्रेषित कर अधिकाधिक पौधरोपण होने का छलावा शासन से किया गया।
दूसरी ओर पौधों की सुरक्षा के नाम पर देयक पक्के ट्री गार्ड के लगाए गए लेकिन हकीकत में इन्हें ईंट से बनी जालीदार दीवार से ढका गया। कई पौधों के ये कथित ट्री गार्ड वक्त से पहले ही जगह–जगह से टूट चुके हैं।
इसी तरह उद्यान विकास के नाम पर पौधारोपण का दिखावा तो हुआ लेकिन लगाए गए पौधों का संरक्षण नहीं होने से झील इस कथित उद्यान का उपहास उडाती हुई जान पड़ती है। जिसे उसके सौंदर्य को निखारने के नाम पर तराशने का दावा किया गया था। पक्के घाट गंदगी एवं कचरे से सराबोर हैं। इन पर बिखरी गंदगी बारिश में झील के पानी में समाहित हो जाएगी।
मंत्री द्वय के विश्वास पर कुठाराघात
नगर पालिका प्रशासन के इन कारनामों से आम जन तो दुखी हैं ही पाली विकास के नाम पर इस क्षेत्र से शासन में प्रतिनिधित्व कर रहीं अनुसूचित जाति कार्य विभाग की मंत्री सुश्री मीना सिंह एवं जिले के प्रभारी मंत्री के विश्वास पर भी कुठाराघात हुआ है।
सुश्री मीना सिंह क्षेत्र के विकास के लिए सतत प्रयासरत है। हाल ही में विकास यात्रा के दौरान उन्होंने नगर के विभिन्न वार्डों में अनेक विकास कार्यों के लिए भूमिपूजन एवं शिलान्यास किए।
सुश्री मीना सिंह की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति गंभीरता एवं संवेदनशीलता का ही नतीजा है कि जब उन्होंने पाली व मानपुर में कन्या विवाह योजना अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में घटिया उपहार सामग्रियों का वितरण होते देखा तो इसे न केवल तत्काल रुकवाया,बल्कि हितग्राहियों को उपहार की कीमत नकद देने के निर्देश दिए।
स्थानीय प्रशासन की यह करतूत सदन में भी गूंजी और इस हद तक किरकिरी हुई कि प्रदेश के मुखिया को योजना का स्वरूप बदलने की ही घोषणा करनी पडी। इसमें उपहार की जगह अब 50 हजार की नकद राशि हितग्राही को देने का निर्णय लिया गया।
ऐसे ही जिले के प्रभारी मंत्री कांवरे जब उमरिया दौरे पर आए थे तो विभिन्न विकास कार्यों को लेकर उन्होंने असंतोष जताया था।
शहर के तालाब आस्था का केंद्र
नगर के वार्ड 9 में कई एकड़ में फैला प्राचीन सगरा तालाब सिर्फ जल स्रोत अथवा पर्यावरण के लिए लिहाज से नहीं बल्कि यह लोगों की धार्मिक आस्था से भी जुड़ा है। बताया जाता है कि मां विरासनी शक्तिपीठ में विराजित मौजूदा भव्य प्रतिमा इसी झील में पाई गई थी। इसे बाद में मंदिर में स्थापित किया गया। इस मंदिर में मां के दर्शनों के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं। मंदिर में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में ज्योति कलश, जवारा कलश और ज्योति-जवारा कलशों की स्थापना की जाती है। इन कलशों की स्थापना न सिर्फ उमरिया जिले के लोग करवाते हैं बल्कि विदेश में रहने वाले लोग भी करवाते हैं।
अब आगे क्या
मौजूदा साल चुनाव का है। वर्षांत में चुनाव होना तय है। इससे पहले मानसून सीजन होगा। तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर हुए निर्माण कार्य पहली बारिश भी झेल पाएगा,इसे लेकर आशंका के बादल मंडरा रहे हैं। उधर,विपक्षी दल विधानसभा चुनाव में इन निर्माण कार्यों को चुनाव का मुद्दा बनाने के मूड में है। बताया जाता है कि इसकी उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है।
निर्माण कार्य चुनावी मुद्दा बने तो तय है कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े प्रतिनिधियों के लिए ये एक बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं। स्थानीय लोगों में भी इस घटिया निर्माण को लेकर आक्रोश है।
बताया जाता है कि कुछ पर्यावरण प्रेमी एवं बुद्धिजीवियों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्दी ही नगरीय विकास एवं आवास मंत्री,जिले के प्रभारी मंत्री एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें इससे अवगत कराएगा। ताकि समय रहते इसमें सुधार हो सके।
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