“वनकर्मियों को उन्हें सौंपी गई बंदूक चलाने का अधिकार देने सोमवार को प्रदेश के गृह विभाग ने बंदूक चलाने और रखरखाव की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी – स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर) जारी की।”
भोपाल। राज्य सरकार अंतत:वन कर्मियों को बंदूक का उपयोग करने देने के लिए राजी हो गई है। यह निर्णय तब लिया गया जब निमाड़ में जंगल उजाड़कर कब्जा कर रहे कुछ बदमाशों ने एक वन चौकी से 17 बंदूकें लूट लीं।
वहीं बीते सप्ताह बुरहानपुर के एक थाने पर हमला कर बदमाश अपने साथियों को छुड़ा ले गए।
बहरहाल,वनकर्मियों को उन्हें सौंपी गई बंदूक चलाने का अधिकार देने सोमवार को प्रदेश के गृह विभाग ने बंदूक चलाने और रखरखाव की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी – स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर) जारी की।
एसओपी के अनुसार अतिआवश्यक परिस्थिति में वन अमले को बंदूक चलाने का अधिकार होगा। वहीं वन विभाग हथियारों का रखरखाव और संचालन भी करेगा। वन विभाग में उपलब्ध हथियारों एवं कारतूसों का एवं इनके विभिन्न पंजियों,संधारण अभिलेखों का सूचना प्रौद्योगिकी आधारित डेटा बेस (आनलाइन) दर्ज होगी।
एसओपी (SOP) में कहा गया कि स्ट्रांग रूम वाली वन चौकियों तक पहुंच मार्ग बंद रहेंगे, केवल एक द्वार होगा। स्ट्रांग रूम के कमरे में लोहे के दोहरे दरवाजे और दीवारें कांक्रीट की होगी। लोहे की जाली लगी खिड़कियां होंगी। विद्युत व्यवस्था के विकल्प के लिए इन वन चौकियों में एक सोलर व्यवस्था/जनरेटर एवं दूरसंचार व्यवस्था (मोबाइल/वायरलेस) उपलब्ध होंगी। साथ ही इन वन चौकियों में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी।
चौकी में 5 वनकर्मियों का दस्ता रहेगा हमेशा तैनात
एसओपी के अनुसार शस्त्र और कारतूस लोहे के दरवाजों में दो ताले वाले अलग-अलग कमरों में रखे जाएंगे और चाबियां दो अलग-अलग व्यक्तियों के पास होगी। स्ट्रांग रूम में रखे हुए सभी शस्त्रों में जंजीरें तथा ताले होंगे। स्ट्रांग रूम प्रभारी हथियार और कारतूस की प्रतिदिन जांच पड़ताल करेगा। वहीं,वनपरिक्षेत्र अधिकारी सप्ताह में दो बार इसकी जांच करेंगे। हथियार और गोला बारूद की सारी जिम्मेदारी चौकी प्रभारी की होगी। वन चौकियों में 24 घंटे पांच वनकर्मियों का सुरक्षा दस्ता तैनात रहेगा। वनमंडलों में होंगे जिला शास्त्रागार
प्रदेश के 50 वनमंडलों में जिला शस्त्रागार एवं 120 वन चौकियों को शस्त्रागार चौकियां बनाया गया है। अतिसंवेदनशील वनक्षेत्रों में निर्मित वन चौकियों पर हथियार और गोला बारूद को रखने के उद्देश्य से एक स्ट्रांग रूम पुलिस थाने के मापदंड के अनुसार सुरक्षित स्थान पर बनाया जाएगा।
बनेगी तकनीकी टीम, प्रत्येक वर्ष करेगी जांच
शस्त्रागार वाली प्रत्येक वनचौकी का निरीक्षण परिक्षेत्राधिकारी/ उप वनमंडलाधिकारी द्वारा प्रत्येक तीन माह में आवश्यक रूप से किया जाएगा। बंदूक को ड्यूटी के बाद शस्त्रागार में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। जिन कारतूसों की जीवन अवधि तीन वर्ष से अधिक हो गई है, उनका उपयोग फील्ड में न कर प्रशिक्षण में किया जाएगा।
बंदूके हैं लेकिन चलाने के अधिकार नहीं
वन अमले को उसकी व वनों की सुरक्षा के लिए बंदूकें तो आवंटित की गईं,लेकिन इन्हें चलाने के अधिकार उन्हें नहीं थे। इसके चलते बंदूकें सिर्फ शोपीस बन कर रह गईं। वनमाफिया इस बात को अच्छी तरह समझ चुका था। इसके चलते वनकर्मी चाहकर भी उन्हें रोक नहीं पा रहे थे,बल्कि कई जगह तो वनकर्मियों पर प्राणघातक हमले हुए।मैदानी वन अमला लंबे समय से बंदूक चलाने के अधिकार की मांग लंबे समय से कर रहा था। बीते साल आंदोलनकारी अमले ने अपने शस्त्र भी जिला मुख्यालयों में जमा कर दिए थे।
बदमाशों ने लूट ली थीं बंदूकें
28 नवंबर 2022 को बुरहानपुर के नेपानगर तहसील की नावरा वन रेंज के ग्राम बाकड़ी वन चौकी में चौकीदार से मारपीट कर तोड़फोड़ करते हुए 17 बंदूकें और कारतूस लूट ले गए थे। इस घटना की जांच गृह विभाग ने की थी और इस घटना से सबक लेते हुए बंदूकों के रख रखाव का एसओपी बनाया गया है।