विभागीय सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश में बीते चार साल के दौरान करीब सात सौ बाघों का पता चला है। जबकि वर्ष 2018 की गणना में मप्र में सिर्फ 526 बाघ पाए गए थे। हालांकि इस संख्या के साथ भी मप्र बाघों के मामले में देश में पहले स्थान पर रहा था। वही कर्नाटक 524 बाघों के साथ दूसरे स्थान पर था।
सूत्रों के अनुसार,बीते तीन सालों के दौरान ही प्रदेश में सवा सौ से अधिक बाघ बीमारी,शिकार व अन्य कारणों से मारे गए। इन्हें संरक्षित Protection किया जाता तो बाघों की संख्या सात सौ से कहीं अधिक रह सकती थी।
बाघों की गणना देश में प्रत्येक चार वर्ष में होती है। इस कार्य में स्थानीय वन विभाग के अमले के अलावा भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून एवं केंद्रीय वन मंत्रालय के विषय विशेषज्ञों की टीम भी गणना में शामिल होती है। यह गणना प्रत्येक राज्य में एक निश्चित पैरामीटर के तहत होती है।इसमें बाघों के पद चिन्ह व अन्य संकेतों को गणना का आधार बनाया जाता है। पिछली यानी 2018 की गणना में विभिन्न राज्यों में बाघों की संख्या इस प्रकार रही थी…