जंगल बचाने की गुहार : बुरहानपुर कलेक्टर दफ्तर में 500 आदिवासी रातभर से धरने पर बैठे

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” यहाँ गंगा उलटी बह रही है.. . आमतौर पर प्रशासन अवैध जंगल कटाई को लेकर संबंधितों के खिलाफ एक्शन लेता है या जंगल बचाने की अपील करता है, लेकिन बीते छह माह में ही बुरहानपुर समेत पश्चिमी निमाड़ का करीब दो हजार हेक्टेयर का जंगल साफ हो जाने से स्थानीय ग्रामीण चिंतित हैं। वे अवैध कटाई रुकवाने की गुहार प्रशासन से कर रहे हैं ,लेकिन वोटबैंक की राजनीति के चलते शासन- प्रशासन खामोश है। इस लापरवाही से चिंतित आदिवासियों का जब सब्र का बांध टूटा तो वे बीती शाम बड़ी संख्या में बुरहानपुर कलेक्टर दफ्तर पहुंचे और पूरी रात यहीं धरना दिया।”

बुरहानपुर। जिले में नेपानगर के जंगलों की अवैध कटाई और वन भूमि पर कब्जे को रुकवाने के लिए घाघरला क्षेत्र के 500 से ज्यादा आदिवासी बीते 24 घंटे से कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दे रहे हैं। इस बार ग्रामीण हफ्ते भर के आंदोलन की तैयारी के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे हैं। वे अपने साथ सोने और पहनने के कपड़े, भोजन के लिए अनाज और बर्तन भी साथ लाए हैं।

उन्होंने बुधवार रात कलेक्ट्रेट परिसर में ही बिताई। गुरुवार को भोजन के रूप में कलेक्ट्रेट परिसर में ही खिचड़ी बनाई गई है। आदिवासियों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय का मुख्य द्वार घेर रखा है। जिससे इस द्वार से आवागमन बंद हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सरकार और प्रशासन जंगल की अवैध कटाई कर रहे बाहरी अतिक्रमणकारियों को खदेड़ नहीं देती तब तक वे जंगल बचाने के लिए आंदोलन करते रहेंगे।

नेपानगर विधायक पर फूटा गुस्सा
आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने नेपानगर विधायक सुमित्रा देवी कास्डेकर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि बीते 6 माह से जंगल कट रहा है, लेकिन एक बार भी विधायक देखने नहीं पहुंची। जब वे ग्रामीणों की समस्या नहीं सुलझा सकती तो उन्हें दोबारा विधायक क्यों बनाएंगे।

ग्रामीण महिलाओं ने खुले रूप में कहा कि आने वाले चुनाव में वे इस सरकार और विधायक के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीण आदिवासियों के इस गुस्से को देखते हुए इस बार नेपानगर क्षेत्र में भाजपा की राह आसान नहीं दिख रही है। महिलाओं ने सुमित्रा देवी शर्म करो के नारे भी लगाए।

सरकार पर लगाया जंगल बेचने का आरोप
आंदोलन कर रहे ग्रामीणों और महिलाओं ने प्रदेश सरकार पर जंगल बेचने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि जंगल साफ हो जाने के बाद सरकार उद्योगपतियों को यह जमीन दे देगी। यही वजह है की बाहरी अतिक्रमणकारियों को जंगल काटने की खुली छूट दे दी गई है।

ज्ञात हो कि जागृत आदिवासी दलित संगठन इससे पहले भी जंगल की सुरक्षा को लेकर आंदोलन कर चुका है। संगठन प्रमुख माधुरी बेन के नेतृत्व में इस बार आर पार की लड़ाई के मूड से ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे हैं।