Budni Assembly, बुधनी विधानसभा : जहां शिवराज का चेहरा ही सबसे ज्यादा प्रभावी

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रवि अवस्थी भोपाल। Budni Assembly भाजपा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में सेंध लगाने का पूरा जतन कर रही है…लेकिन कांग्रेस की ओर से बुदनी में ऐसे कोई प्रयास नजर नहीं आते..जी हां ,सीहोर जिले की वही बुधनी सीट ..जहां से प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 5 बार से विधायक हैं…

बुधनी शिवराज के लिए राजनीतिक तौर पर ‘जन्मस्थान’ रहा है। यही वह जगह है, जहां से वो एक नेता के तौर पर उभरे… कभी कांग्रेस का गढ़ समझे जाने वाली इस सीट को शिवराज ने बीते दो दशक में भाजपा  का प्रभाव क्षेत्र बना दिया…… 2023 के चुनाव में बुधनी के  भविष्य की तस्वीर को समझने से पहले जानते हैं,कैसा रहा इस सीट का सियासी मिजाज.
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* मप्र गठन के साथ ही बुधनी  बनी विधानसभा सीट
* बुधनी में अब तक हुए 14  आम व दो  उपचुनाव
* 16 में से 9 बार भाजपा,जनसंघ ने दर्ज कराई जीत
* दो दशक से शिवराज बने  बुधनी के अपराजेय नेता
* मुख्यमंत्री शिवराज के निर्वाचन से चर्चित हुई बुधनी
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शिवराज का विकल्प तलाशना अब तक टेढ़ी खीर
बुदनी सिर्फ बौद्ध स्तूपों के लिए ही नहीं..विंध्यवासिनी शक्तिपीठ के लिए भी पहचानी जाती है..नगर से चंद किमी दूर सलकनपुर में सतपुड़ा पर्वत  पर स्थापित यह शक्तिपीठ  सनातन धर्मावलंबियों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है…

इसके महत्व को पहचानते हुए मुख्यमंत्री शिवराज ने इसे देवी लोक के तौर पर विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है…इसके अलावा ,बुदनी के  प्रसिद्ध खिलौना कारोबार इसे व्यावसायिक स्वरूप देने यहाँ ट्वाय क्लस्टर विकसित करना ,औद्योगिक निवेश को बढ़ावा, फोर लेन सड़कों का जाल ,सिंचाई सुविधा का विस्तार,सीएम राइज स्कूल आदि ऐसे कई काम शिवराज शासनकाल में हुए जिसने बुदनी की तस्वीर बदलने का काम किया…

विधानसभा क्षेत्र में आई विकास की इस आंधी ने इस सीट से 5 बार के विधायक एवं 4 बार के मुख्यमंत्री शिवराज को और अधिक लोकप्रिय बना दिया है… ऐसे  में विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस के लिए बुधनी में शिवराज का विकल्प तलाशना अब तक टेढ़ी खीर ही साबित हुआ है..

पिछले चुनाव में उसने तुरुप के पत्ते के तौर पर पार्टी के दिग्गज नेता अरुण यादव को मैदान में उतारा,लेकिन उन्हें भी करीब 59 हजार मतों से पराजय झेलनी पडी… यदि यह कहा जाए कि शिवराज  की लोकप्रियता ने बुधनी को विपक्ष के लिए अभेद बना दिया तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी..

वर्ष 2018 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे  कांग्रेस प्रत्याशी अरुण यादव को करीब 31.47 प्रतिशत मिले..जबकि उन्हें बाहरी प्रत्याशी होने का आरोप भी झेलना पडा…..बुधनी में अब तक हुए चुनाव की बात की जाए तो इस सीट पर दो उपचुनाव सहित 16 चुनाव हुए… इनमें 9 बार भाजपा या इसके पूर्ववर्ती संगठन विजयी रहे …तो दो बार निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी बाजी मारी…कांग्रेस सिर्फ पहला व अस्सी और नब्बे के दशक के दो-दो अर्थात पांच चुनाव ही जीत सकी..बुधनी से कांग्रेस को अंतिम बार 1998 में जीत हासिल हुई..इसके बाद एक उपचुनाव सहित पांच चुनाव में यहां कमल ही खिलता रहा….
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बुधनी से अब तक विजयी हुए प्रत्याशी व उनका दल
1957 राजकुमारी                     कांग्रेस
1962 बंशीधर                         स्वतंत्र
1967 मोहन लाल                     जनसंघ
1972 शालिग्राम वकील               स्वतंत्र
1977 शालिग्राम  वकील              जनता पार्टी
1980 के एन प्रधान                   कांग्रेस
1985 चौहान   सिंह चौहान          कांग्रेस
1990 शिवराज सिंह चौहान          बीजेपी
1992 मोहन लाल शिशिर            बीजेपी
1993 राजकुमार पटेल               कांग्रेस
1998 देव कुमार पटेल               कांग्रेस
2003 राजेन्द्र सिंह                    बीजेपी
2006 शिवराज सिंह चौहान          बीजेपी
2008 शिवराज सिंह चौहान          बीजेपी
2013 शिवराज सिंह चौहान          बीजेपी
2018 शिवराज सिंह चौहान          बीजेपी
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फिर भी ये मुद्दे तो हैं
बुधनी भले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का इलाका है—  लेकिन  फिर भी यहां समस्याएं तो हैं— यहां रोजगार के अवसरों की कमी और अस्पताल में दवा नहीं मिलने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है— तो वहीं किसानों को खाद और बीज के लिए भी कई तरह की समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है—- इलाके में लगे उद्योगों में स्थानीय लोगों को कम और बाहरी लोगों को अधिक काम मिल रहा है—

बुदनी में जातिगत समीकरण
बुदनी में वैसे तो जातिगत समीकरण कोई मायने नहीं रखता— यहां शिवराज का चेहरा ही सबसे ज्यादा प्रभावी है— उनके आगे न कोई समीकरण काम करता है और न कोई मुद्दा प्रभावी है—यहां की जनता के दिल और दिमाग पर शिवराज सिंह की छवि सबसे ज्यादा भारी है— इस क्षेत्र में  40 हजार वोट हरिजन आदिवासी समाज के हैं—-तो वहीं यादव, रघुवंशी, ग्वाला समाज के 32 हजार वोट हैं— शिवराज सिंह चौहान यहां अन्य पिछड़ा वर्ग के होने के बाद भी सभी वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं —

साल 2018 में कांग्रेस ने यहां से अरुण यादव को मैदान में उतार कर शिवराज को कड़ी चुनौती देने जैसी भूमिका बांधी थी। चुनाव के दौरान यहां से शिवराज की पत्नी साधना सिंह और पुत्र कार्तिकेय सिंह ने प्रचार की कमान संभाली थी। शिवराज यहां से 59 हजार वोटों की बंपर जीत दर्ज कर विधायक बने थे—

2023 चुनाव के लिहाज से कार्तिकेय क्षेत्र में पूरी ताकत के साथ  सक्रिय हैं — बीजेपी में नेता पुत्रों को टिकट मिला तो संभव है कि बुदनी से अगला चेहरा कार्तिकेय हों — तो ऐसे में एक बड़ा सवाल कि फिर शिवराज —? सियासत में कुछ भी संभव है! —- बुधनी में आगे कौन से समीकरण बनेंगे ?—कांग्रेस कौन सा विकल्प तलाशेगी? — इसके लिए चुनाव तक करना होगा इंतजार —-

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कुल  मतदाता             2 ,68,407  
पुरुष मतदाता             1 ,39 ,333
महिला मतदाता           1 ,29 ,074
अजा व अजजा                40 हजार
पिछड़ा वर्ग                    32 हजार