रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा सीट: कांग्रेस को है उम्मीदवार की तलाश

48

रवि अवस्थी,भोपाल// रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा सीट.. राजधानी भोपाल से 30 किमी दूर भोजपुर गांव के नाम पर है..जहां देश का प्रसिद्ध भोजेश्वर मंदिर है..इसका निर्माण प्रसिद्ध परमार राजा भोज ने ग्यारहवीं शताब्दी में तैयार कराया था..

इसे उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है..देश का सबसे बडा शिवलिंग इसी मंदिर में स्थापित है..विंध्य पर्वतमाला के बीच भोजपुर मंदिर व राजधानी  भोपाल से सटा मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र भोजपुर विधानसभा सीट की दो प्रमुख पहचान हैं..यह सीट शुरुआती दशक में कांग्रेस का गढ़ रही लेकिन आपातकाल के बाद से यहां के मतदाताओं का रुझान भाजपा की ओर ही रहा..

भोजपुर पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की पसंदीदा सीट रही तो पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी की भी..सभी ने बारी.बारी यहां से खुद को आजमाया..आइए जानते हैं कैसा रहा है इस सीट का सियासी मिजाज…

14 बार हुए चुनाव में सिर्फ 3 बार जीती कांग्रेस
भोजपुर रायसेन जिले की चार विधानसभा सीटों में एक सामान्य सीट…1967 में यह अस्तित्व में आई..बीते पांच दशक के चुनावी इतिहास में कांग्रेस इस सीट से महज 3बार ही चुनाव जीत सकी..बाकी समय यहां जनसंघ व उसके पश्चातवर्ती संगठन बीजेपी का ही कब्जा रहा..इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भोजपुर एक तरह से भाजपा का गढ़ रही..

शुरुआती दो चुनाव में तामोट के रहवासी गुलाबचंद तामोट लगातार दो बार यहां से विधायक रहे..लेकिन आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव ने भोजपुर के मतदाताओं का मूड पूरी तरह बदल दिया..तीन साल बाद  प्रदेश व देश में कांग्रेस लौटी लेकिन भोजपुर में 1980 में भाजपा के शालिग्राम श्रीवास्तव ने कांग्रेस प्रत्याशी को करारी शिकस्त दी..

यह वह दौर था जब प्रदेश ही नहीं देश में जनता पार्टी,भारतीय जनता पार्टी में बदल गई … तब भोजपुर के इस रुझान को देखते हुए इसी दल के दिग्गज नेता सुंदरलाल पटवा ने अपने गृह क्षेत्र कुकड़ेश्वर  को छोड़  इस सीट का चुना — और वह इस सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए.. यह क्रम उस वक्त टूटा जब 1997 में उन्हें छिंदवाड़ा संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया गया..उनके सांसद बनने पर भोजपुर में इसी साल उपचुनाव हुए और उनकी विरासत को भाजपा के ही नरेश पटेल ने संभाला..

— लेकिन वर्ष 2003 में चौंकाया

वर्ष 2003 के चुनाव में जब प्रदेश में दिग्विजय शासनकाल का अंत हुआ और भाजपा बहुमत से सत्ता में आई,उस वक्त भोजपुर ने कांग्रेस प्रत्याशी राजेश पटेल को जिताकर चौंका दिया…अगले ही चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा भोजपुर से विधायक बने और बीते तीन बार से वहीं इस क्षेत्र से विधायक हैं…

भोजपुर से अब तक रहे विधायक व उनका दल
1967 में गुलाबचंद तामोट कांग्रेस
1972 में गुलाबचंद तामोट कांग्रेस
1977 में परब चंद जैन  जनता पार्टी
1980 में शालिग्राम श्रीवास्तव भाजपा
1985 में सुंदरलाल पटवा भाजपा
1990 में सुंदरलाल पटवा भाजपा
1993 में सुंदरलाल पटवा भाजपा
1997 में उपचुनाव में रामकिशन चौहान भाजपा
1998 में सुंदरलाल पटवा भाजपा
1999 उपचुनाव में  नरेश पटेल भाजपा
2003 में राजेश पटेल कांग्रेस
2008 में सुरेंद्र पटवा भाजपा
2013 में सुरेंद्र पटवा भाजपा
2018 में सुरेंद्र पटवा भाजपा
…………………….

अजय सिंह,सुरेश पचौरी भी यहां से आजमा चुके हैं भाग्य

भोजपुर सीट पर जातिगत समीकरण की बात की जाए तो यहां आदिवासी अन्य वर्ग के मतदाताओं की तुलना में कहीं अधिक है..लेकिन समूची सीट पर इनकी अलग.अलग क्षेत्रों में बसाहट से  इस सीट से कभी कोई आदिवासी नेतृत्व नहीं उभर सका..

अनुसूचित जनजाति वर्ग के बाद दूसरा स्थान ओबीसी वर्ग के मतदाताओं का है..इनके अलावा करीब अनुसूचित जाति के दस हजार मतदाता चुनाव के समीकरण बनाने बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा करते हैं..इस सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग 6 हजार है…हालांकि अब तक हुए 14 चुनाव में 12 बार जनसंघ,जनता पार्टी व भाजपा ने जीत दर्ज कराई..

इसे देखते हुए कहा जा सकता है भोजपुर में जातिगत समीकरण कोई मायने नहीं रखते..अंचल से लगातार मिली पराजय के कारण कांग्रेस का कोई बड़ा नेता यहां उभर नहीं सका..इसके चलते कई बार तो उसके समक्ष दमदार उम्मीदवार का भी टोटा रहा..

पिछले यानी 2018 के चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने भी इस सीट से अपना भाग्य आजमाया लेकिन उन्हें करीब 30 हजार वोटों के अंतर से हार का सामना करना पडा..यह स्थिति तब है जबकि पचौरी भोजपुर गांव के समीप ही बीलाखेड़ी  के मूल रहवासी है..वह केंद्रीय मंत्री भी रहे,लेकिन कोई चुनाव नहीं जीत सके..
……………………………

भोजपुर सीट के जातिगत समीकरण
कुल मतदाता 2,42,356
पुरुष मतदाता 1,27,688
महिला मतदाता 1,26,264
अनुसूचित जनजाति  65 से 70 हजार
अनुसूचित जाति    15 से 20 हजार
ओबीसी              55 से 60 हजार
ब्राह्मण               16 से 20 हजार
किरार               25 से 30 हजार
धाकड              20 से 25 हजार
मुस्लिम व अन्य    शेष
………………………………….

मौजूदा वर्ष के अंत में भोजपुर में एक बार पुन: 16वीं विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है..भाजपा से पुन: मौजूदा विधायक सुरेंद्र पटवा को दोहराए जाने की संभावना है..हालांकि पार्टी की ओर से अन्य दावेदार जेपी शर्मा,गणेश मालवीय आदि नाम भी चर्चा में हैं..पार्टी के लिहाज से इसे सुरक्षित सीट मानते हुए किसी बाहरी व्यक्ति को यदि उम्मीदवार बनाया जाता है तो यह चौंकाने वाला फैसला होगा..वहीं क्षेत्र से कांग्रेस अभी पुरानी स्थिति में है..ऐसे में देखना होगा कि सुरेंद्र पटवा की हैट्रिक ब्रेक होगी या और रफ्तार पकड़ेगी…इसके लिए फिलहाल चुनाव तक इंतजार करना होगा..
……………………………………….

भोजपुर विधानसभा सीट के प्रमुख हाइलाइट्स

 .. प्राचीन शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है भोजपुर
.. 11वीं सदी में प्रसिद्ध परमार राजा भोज ने बनवाया था विशाल मंदिर
.. भोजपुर गांव के नाम पर है विधानसभा की सीट
.. पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा की पसंदीदा रही सीट
.. अजय सिंह,सुरेश पचौरी लड़ चुके हैं यहां से चुनाव
.. अब तक हुए 14 चुनाव में 12 बार हारी कांग्रेस
.. भोजपुर विस को माना जाता है भाजपा का गढ़
…………………………………………..