MadhyaPradesh: ऊंची जाएगी ‘विकास’ की यह पतंग

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सत्ता के गलियारे… मप्र में घटित बीते सप्ताह के राजनितिक ,सामाजिक , प्रशासनिक चंद महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर आधारित साप्ताहिक स्तम्भ है। यह रचनात्मक दृष्टिकोण से घटनाओं की संक्षिप्त समीक्षा का एक प्रयास है। … रवि अवस्थी ,भोपाल(मप्र )

** ऊंची जाएगी ‘विकास’ की यह पतंग
‘अतिथि देवो भव:’ मंत्र पर भरोसा रखने वाले प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन,खेलो इंडिया व जी-20 देशों के सम्मेलन की मेजबानी मिलने से गदगद हैं।

अतिथियों के अभूतपूर्व स्वागत से देश ही नहीं दुनिया का दिल जीतने की तैयारी है। सम्मान में समूचा शहर,आसपास के पर्यटन स्थलों को सजाया-संवारा गया है।

क्या खान-पान,क्या मनोरंजन…हर छोटी-बड़ी बात पर पूरी नजर। पीबीडी ने जीआईएस की सफलता की उम्मीद भी बढ़ा दी हैं। सम्मलेन के पहले दिन ही मुख्यमंत्री ने पतंगबाजी के पेंच लड़ाते हुए कहा कि यह ‘विकास’ की पतंग है,बहुत ऊंची जाएगी। सियासी हलकों में अब उनके इस बयान के मायने तलाशे जा रहे हैं।

..ये अंदर की बात है!
कड़कड़ाती ठंड यूं तो अच्छे-अच्छे के हौसले पस्त कर देती है,लेकिन चुनावी साल प्रदेश के सियासी हलकों में ‘सर्दी में भी गर्मी’ का अहसास करा रहा है। सत्तारूढ़ दल भाजपा के दिग्गज जिलों व संभागों के दौरे पर जाने का बाध्य हैं तो कांग्रेस अपनी शैली के मुताबिक,मुख्यालय से ही कार्यकर्ताओं में जोश पैदा कर रही है।

सियासी बयानों के व्यंग्य बाण भी जारी है,कुछ अपनों के लिए कुछ परायों के लिए। आओ खेलें ‘सीडी-सीडी’ भी कुछ ऐसा ही मामला है। इसमें कंधा किसी ओर का तो निशानेबाज कोई और। वहीं दूर खड़े तमाशा देखने वाले गजल और भजन की उम्र का फर्क बताकर आनंद ले रहे हैं।

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** बड़ी है चुनौती
16वीं विधानसभा का चुनाव पिछले चार चुनावों की तुलना में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए कुछ अधिक ही चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है। बढ़ती महंगाई,बेरोजगारी,जैसे मुद्दे पहले ही पहले ही परेशानी बढ़ाए हुए हैं।

इस पर जातिगत समीकरणों को लेकर उग्र करणी सेना,जयस,पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर आंदोलन के उभरते स्वर,तीसरे मोर्चे की आमद,मजबूत विपक्ष,इस पर संगठन में ही मूल व आयतित के झगड़े के बीच असंतुष्ट नेताओं की कुलांचे मारती महत्वकांक्षाएं।

माना जा रहा है कि चुनाव की बेला ज्यों-ज्यों नजदीक आएगी, चुनौतियां भी उतनी ही प्रबल होने के आसार हैं।

** उमा ने तेज किया अपना अभियान
शराब नीति पर कुछ सुझावों के साथ पत्र थमाकर उत्तराखंड प्रवास पर निकली पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती ने रविवार को भाजपा से निष्कासित नेता प्रीतम लोधी के घर पहुंचकर अपना इरादा साफ कर दिया।

तर्क दिया गया कि जब पार्टी नेता दमोह में पूर्व मंत्री जयंत मलैया के घर जमा हो सकते हैं तो वह प्रीतम के घर क्यों नहीं आ सकती?

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**समझने में कहां हुई गफलत?

रविवार को राजधानी भोपाल में हजारों की संख्या में जमा हुए करणी सेना के जवानों ने प्रदेश की खुफिया पुलिस के सारे गणित फेल कर दिए।

इस मामले में अपनाई गई क्षत्रिय समागम की कूटनीति भी काम नहीं आई,बल्कि खुद को संकट मोचक बताकर अपनी पीठ थपथपाने वाले राजपूत नेता भी करणी सेना की हुंकार के बाद चुप्पी साधने का मजबूर हो गए।

गनीमत है,पुलिस ने समझदारी दिखाई। सम्मेलन की अनुमति,सुरक्षा के व्यापक इंतजाम और हर गतिविधि पर पैनी नजर रख उसने प्रदेश की ब्रांडिंग के इस ‘मौके’ को फीका होने से बचा लिया।

** केंद्रीय मंत्रियों की सादगी
अमृत काल में जल प्रबंधन की चिंता को लेकर राजधानी में देशभर के जल मंत्रियों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। इसमें अन्य राजनेताओं के साथ ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी पूरे समय मौजूद रहे।

विषय पर शेखावत की पकड़ ,चिंतन व बौद्धिकता ने तो प्रतिभागियों को सम्मोहित किया ही,सबसे अधिक चर्चा में रही केंद्रीय मंत्री की सादगी।

सम्मेलन के दौरान वाटर डिस्पेंसर तक पहुंचना और स्वयं पानी लेकर पीना व लौटकर फिर मंच संभालना ..,मंचासीन रहते हुए भी ऐसी सादगी व सहजता।

कुछ ऐसी ​ही मिसाल केंद्रीय खेल,युवा मामलों व सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक दिन पहले इंदौर में पेश की जब श्रोताओं के बीच से वह स्वयं अपने लिए कुर्सी उठाकर मंच पर ले गए। उनकी यह सादगी भी चर्चा का प्रवासी भारतीयों के बीच चर्चा का विषय रही।

पर्ची ने भूरिया को किया नाराज
कांग्रेस के नेता पहले ‘चलो-चलो’ से परेशान थे,अब पर्ची से हैं। मामला सोमवार को राजधानी के रवीन्द्र भवन में आयोजित मप्र कांग्रेस के सम्मेलन का है।

इसमें पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था।

सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस के मुखिया कमलनाथ,पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया सहित अनेक वरिष्ठ नेता मंचासीन थे।

सम्मेलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस विधायक कांतिलाल भूरिया भाषण दे रहे थे। उनके बाद कमलनाथ का भाषण होना था। भूरिया का भाषण लंबा होते देख मंच संचालक ने उनके पास पर्ची भेजी..,लिखा-कंट्रोल भूरिया जी। इससे वे नाराज हो गए।

भूरिया ने कहा- पर्ची आ गई है। मेरे से पहले किसी वक्ता को नहीं भेजी, मुझे भेज दी। ये हालात हैं, क्या करो, बोलना ही बंद कर दें। बहुत सारी बात कहनी थी, लेकिन अब मुझे नहीं कहना,सुनना है। जाते-जाते वह मंच संचालक को आइंदा पर्ची न भेजने की हिदायत देना भी नहीं भूले।

* * बढ़ सकती है झा की जिम्मेदारी
संजय कुमार झा मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति मेडल से सम्मा​नित झा को करीब छह माह पहले ही मप्र परिवहन आयुक्त की कमान सौंपी गई। इससे पहले वह नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के ​उप महानिदेशक, मप्र में विभिन्न् जोन के आईजी रह चुके हैं।

खास बात यह कि उनका पूरा परिवार यानी पत्नी,बेटी,दामाद सभी प्रमुख प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं। सूत्रों का दावा है कि परिवहन आयुक्त के साथ ही झा को जल्दी ही अन्य महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। इसे देखते हुए झा ने भोपाल में सरकारी बड़े बंगले की तलाश शुरू कर दी है।