इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हमारे कई काम को आसान बनाने के साथ ही बुरा प्रभाव भी डालते है

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 बढ़ती टेक्नोलॉजी ने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की संख्या में भी इजाफा किया है. अब तो हर रोज़ एक नया गैजेट लॉन्च हो जाता है. आज के समय में हम अपना अधिकतर काम गैजेट्स के सहारे से करते हैं. ऐसे में, गैजेट्स से हमारी लाइफस्टाइल भी काफी प्रभावित होती है. वैसे तो इलेक्ट्रॉनिक गैजेटस को लोगों का समय बचाने और कार्य को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन इसकी अधिकता हमारे शरीर पर नेगेटिव प्रभाव भी डाल सकती है.

आज के समय में यूजर्स मोबाइल, लैपटॉप, टीवी पर घंटों नजरे गड़ाए बैठे रहते है. वे यह बिलकुल नहीं सोचते की यह चीजें उनकी सेहत पर कितना बुरा प्रभाव डाल सकती है. आज की इस रिपोर्ट में हम इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से होने वाले बुरे प्रभावों के बारे में बताने जा रहे हैं

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के नेगेटिव प्रभाव

  •     इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से समय की बर्बादी होती है. इन गैजेट्स का सबसे ज्यादा बुरा असर बच्चों पर होता है. जिस उम्र में बच्चो को पढ़ना-लिखना और करियर पर ध्यान देना होता है उस उम्र में वे गैजेट्स से चिपके रहते है. बच्चो का पूरा दिन Facebook, Whatsapp, Instagram आदि के इस्तेमाल में चला जाता है. बच्चे इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर चैटिंग में अपना सारा टाइम बर्बाद कर देते हैं.
  •     इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का आंखों पर बुरा असर पड़ता है.दरअसल, लम्बे समय तक स्क्रीन पर देखने से लोगों की आँखे कमजोर होती जा रही है. लोग मोबाइल, लैपटॉप, टीवी की स्क्रीन से चिपके रहते है. इस वजह से कई लोगो की आँखे लाल होने लगती हैं, आँखों में से पानी भी आने लगता है, आँखे ड्राई भी हो जाती है. ऐसे में, जरूरी है कि इन चीजों से थोड़े-थोड़े समय से दूरी बनाते रहें.
  •     इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की वजह से युवा वर्ग वर्चुअल दुनिया में जीना सीख रहा है और रियल दुनिया यानी समाज से कट रहा है. आज के युवा के वर्चुअल दुनिया में अपने तौर तरीके से रहने का मौका मिलता है, जिससे वे इसी में सहज महसूस करने लगते हैं. ऐसे में, आज का युवा वर्ग समाज का हिस्सा बनने की जगह वर्चुअल दुनिया में अपना समय खराब कर रहा है.
  •     दिन का अधिक समय इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर बिताने के कारण लोगों के स्वभाव में चिडचिड़ापन आने लगता है. ऐसे में अगर आप इन लोगो से सिर्फ एक मिनट के लिए मोबाइल ले लेंगे तो यह इस तरह चिल्लाने लगते है जैसे इनसे इनकी जिंदगी ले ली हो. अगर मोबाइल से चार्जिंग खत्म होने लगे तो यह लोग चार्जिंग की तरफ ऐसे दौड़ते है जैसे इनकी सांस खत्म होने वाली हो. गैजेट्स के इस्तेमाल से लोगों के स्वभाव में अंतर आने लगता है. लोग थोड़ी सी बात पर चिढ़ जाते है और चिल्लाने लगते है.
  •     लम्बे समय तक मोबाइल, लैपटॉप, टीवी आदि का इस्तेमाल करने से लोगों की स्मरण पावर कमजोर होने लगती है. लोगो को आधा घंटे पहले की बात तक याद नहीं रहती. पढ़ाई में बच्चों और किशोरों का मन नहीं लगता है क्योंकि उन्हें कुछ भी पढ़ा हुआ याद नहीं रह पता है.