चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर ‘सनातन धर्म’ को लेकर विवाद भड़क गया है। डीएमके नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि “सनातन विचारधारा समाज को बांटती है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।”
उनके इस बयान के बाद भाजपा समेत कई हिंदू संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे करोड़ों लोगों की आस्था पर हमला बताया है।
तमिल संस्कृति बनाम सनातन पर बहस
उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में अभिनेता और तमिलगा वेत्री कझगम प्रमुख विजय के शपथ ग्रहण समारोह का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में पारंपरिक तमिल आह्वान गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ को प्राथमिकता नहीं दी गई।
स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु के किसी भी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में तमिल थाई वाझथु को सबसे पहले स्थान मिलना चाहिए, क्योंकि यह तमिल पहचान और संस्कृति का प्रतीक है।
इसी दौरान उन्होंने सनातन धर्म पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सामाजिक बराबरी में बाधा बनता है और लोगों को जाति व वर्ग के आधार पर विभाजित करता है।
2023 के बयान से शुरू हुआ था विवाद
उदयनिधि स्टालिन इससे पहले भी सितंबर 2023 में सनातन धर्म पर विवादित टिप्पणी कर चुके हैं।
उस समय उन्होंने कहा था कि “सनातन धर्म डेंगू, मलेरिया, बुखार और कोरोना जैसी बीमारी है, जिसे केवल विरोध नहीं बल्कि खत्म करना जरूरी है।”
इस बयान के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और कई राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थीं।
सफाई में बोले- हिंदू धर्म नहीं, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ
विवाद बढ़ने पर उदयनिधि ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका विरोध हिंदू धर्म से नहीं, बल्कि “सनातन व्यवस्था” से है।
उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु में पिछले सौ वर्षों से सामाजिक न्याय और समानता के लिए सनातन प्रथा का विरोध होता रहा है।
उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर और पेरियार के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता और सती जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई भी इसी सोच का हिस्सा रही है।
सुप्रीम कोर्ट भी जता चुका है नाराजगी
उदयनिधि के पुराने बयान को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। 4 मार्च 2025 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी।
अदालत ने कहा था कि एक संवैधानिक पद पर रहने वाले व्यक्ति को अपने शब्दों के प्रभाव को समझना चाहिए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना चाहिए।
भाजपा ने बताया आस्था पर हमला
उदयनिधि के ताजा बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि डीएमके लगातार हिंदू आस्था और सनातन परंपराओं को निशाना बनाकर राजनीतिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है।
वहीं डीएमके समर्थकों का कहना है कि पार्टी सामाजिक न्याय और समानता की विचारधारा पर कायम है और उसका संघर्ष जातिगत भेदभाव के खिलाफ है।
दक्षिण की राजनीति में फिर उभरा वैचारिक टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति और सनातन विचारधारा के बीच वैचारिक संघर्ष नया नहीं है।
लोकसभा चुनावों के बाद इस मुद्दे के फिर उभरने से दक्षिण भारतीय राजनीति में सांस्कृतिक और धार्मिक बहस तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।