‘उदन्त मार्तण्ड’ पर नया विवाद: पोस्टर को लेकर वरिष्ठ पत्रकार और पत्रकारिता विवि आमने-सामने

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भोपाल।

हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर देश के पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ को लेकर नया विवाद सामने आया है।

वरिष्ठ पत्रकार विजयदत्त श्रीधर ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय पर ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ और गलत तस्वीर उपयोग करने का आरोप लगाया है।

वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे किसी पोस्टर के अस्तित्व से ही इनकार कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए एक पोस्टर में ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशक पंडित युगल किशोर शुक्ल की जगह हिंदी साहित्यकार आचार्य शिवपूजन सहाय की तस्वीर प्रकाशित की गई। उन्होंने इसे गूगल आधारित अधूरी जानकारी और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ गंभीर लापरवाही बताया।

बाद में उन्होंने एक संशोधित सूचना जारी कर लिखा कि संबंधित संस्थान व लेखक ने अपनी गलती सुधार ली है।

कुलगुरु ने आरोपों को बताया गलत

 

विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ( Vijay Manohar Tiwari) ने जनप्रचार से चर्चा में कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में ऐसा कोई पोस्टर लगाया ही नहीं गया।

उनके मुताबिक, श्रीधर द्वारा साझा की गई जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है। कुलगुरु ने कहा कि उन्होंने स्वयं वरिष्ठ पत्रकार को वास्तविक स्थिति से अवगत करा दिया है।

उन्होंने कहा कि यह कोई खबर का विषय नहीं है।

श्रीधर बोले- फोटो साझा करूंगा

दूसरी ओर विजयदत्त श्रीधर अपने दावे पर कायम हैं। उनका कहना है कि वह फिलहाल राजधानी से बाहर है।

लौटने के बाद संबंधित पोस्टर का फोटो सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा कि अब तक उनकी किसी खबर का खंडन नहीं हुआ है।

गूगल और एआई आधारित जानकारी पर बहस
इस विवाद ने एक बार फिर गूगल और एआई आधारित अधूरी जानकारी के बढ़ते उपयोग पर बहस छेड़ दी है।

पत्रकारिता और इतिहास से जुड़े लोगों का मानना है कि बिना प्रमाणिक स्रोतों के तथ्यों का उपयोग भविष्य में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है।