कोलकाता।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सियासत अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मौजूदा कार्यवाहक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कहा कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी।
मौजूदा पश्चिम बंगाल सरकार का कार्यकाल 7 मई को खत्म हो रहा है। ममता के इस रुख ने राजनीतिक बहस को संवैधानिक टकराव की दिशा में मोड़ दिया है।
हार के बाद भी ‘नो इस्तीफा’ स्टैंड
मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) जनादेश से नहीं, बल्कि साजिश से हारी है।
उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वे इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाएंगी।
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नतीजों ने बदली सत्ता की तस्वीर
राज्य की 293 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने 200+ सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि TMC 80 सीटों तक सिमट गई।
करीब 15 साल बाद ममता सरकार सत्ता से बाहर हो गई है और भाजपा पहली बार सरकार बनाने जा रही है।
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आगे क्या संवैधानिक विकल्प ?
-अब नजर राज्यपाल की भूमिका पर है। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत:
.विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही सरकार का अधिकार समाप्त होगा।
.राज्यपाल इस्तीफा या बहुमत परीक्षण का विकल्प दे सकते हैं।
.सदन में बहुमत साबित न होने पर बर्खास्तगी संभव है।
आगे क्या होगी रणनीति,नहीं किया खुलासा
. टीएमसी चीफ ममता ने कहा- मेरे इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता। इसलिए राजभवन नहीं जाऊंगी। वे ऑफिशियली हमें हरा सकते हैं, नैतिक रूप से नहीं।
.हम चुनाव आयोग के खिलाफ कदम उठाएंगे। क्या करेंगे, यह अभी नहीं बताएंगे।
-दूसरी बात, हमने फैसला किया है कि 5 सांसदों समेत 10 लोगों की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई जाएगी।
सियासत के साथ बढ़ा तनाव
नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव भी बढ़ा है। कोलकाता में मंगलवार दोपहर एक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या का मामला सामने आया, जिससे माहौल और गर्म हो गया है।
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