सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि मासिक धर्म (Menstrual Cycle) महिलाओं के जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है और इसे किसी नकारात्मक या कमजोर स्थिति की तरह प्रस्तुत करना ठीक नहीं है।
पेड मेंस्ट्रुअल लीव की मांग को लेकर याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि तीसरी बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।