एक साजिश, एक FIR : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, निवेशक ठगी मामलों में बदला नियम

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प्रमुख बिंदु

1.दिल्ली के एक कालोनाइजर पर जमीन व ​धन तिगुना करने के नाम पर 46 करोड़ की ठगी के आरोप।

2.प्रकरण में 1852 लोग हुए ​ठगी का शिकार।

3.साल 2019 में दिल्ली हाईकोर्ट ने बताई अलग—अलग एफआईआर की जरूरत।

4.सुप्रीम कोर्ट ने कहा— षड़यंत्र एक तो एफआईआर भी एक ही काफी।

5.शीर्ष कोर्ट का यह आदेश अन्य राज्यों के समान मामलों के लिए नजीर होगा।

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नई दिल्ली।
एक झूठे प्रलोभन,हजारों निवेशक और एक ही FIR! सुप्रीम कोर्ट ने निवेशक ठगी मामलों में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अब बड़ी संख्या में पीड़ितों के लिए अलग-अलग FIR दर्ज करने की जरूरत नहीं। अब एक FIR में सभी पीड़ितों के बयान जोड़कर केस को तेज़ और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

मामला नईदिल्ली के एक कालोनाइजर अशोक जड़ेजा व उसके ​साथियों से जुड़ा है। जड़ेजा पर आरोप है कि उसने 1852 निवेशकों से 46.40 करोड़ रुपये ठगी की। इस केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2019 में धोखाधड़ी के सभी प्रकरणों में अलग—अलग एफआईआर किए जाने का आदेश दिया था,लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—एक ही FIR काफी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही साजिश में हुए बड़े पैमाने के अपराध में एक FIR पर्याप्त है।अलग-अलग पीड़ितों की FIR दर्ज करने की जरूरत नहीं, 161 के बयानों से उन्हें जोड़ा जा सकता है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अब एक केस से जुड़ी एक FIR में सभी शिकायतों को केस डायरी या बयान के रूप में जोड़ना कानूनी है।

उदाहरण से समझें

उदाहरण: एक कॉलोनाइजर ने 1000 लोगों से पैसे लिए लेकिन कॉलोनी नहीं बनाई। अब इन सभी निवेशकों के लिए अलग FIR की जरूरत नहीं होगी। एक ही FIR में सभी 1000 लोगों के बयान दर्ज होंगे और वे गवाह बनेंगे।

अपराध की गंभीरता पर असर नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक FIR से अपराध की गंभीरता या दंड कम नहीं होगा।
यह व्यवस्था केवल मामलों को सुव्यवस्थित और तेज़ बनाने के लिए है।