भोपाल। बीती 31 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित सभा में मजमा जुटाने मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने करीब सवा 11 करोड़ रुपए खर्च किए। यह रकम उन गरीब महिलाओं के स्व-सहायता समूहों का हक मारकर खर्च की गई,जो बीते एक साल से सरकार से आर्थिक मदद की गुहार कर रही हैं।
प्रधानमंत्री की सभा का आयोजन लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के मौके पर किया गया। इसे महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन नाम दिया गया। यह आयोजन मुख्यत: प्रदेश के संस्कृति विभाग का था,लेकिन इसमें महिलाओं की भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी मप्र ग्रामीण राज्य आजीविका मिशन को सौंपी गई।
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समूहों का हक मारकर नंबर बढ़वाने की कवायद
प्रधानमंत्री की सभा में सिर्फ भीड़ जुटाकर अपने नंबर बढ़वाने के लिए जिम्मेदारों ने करोड़ों रुपए खर्च कर डाले। दूसरी ओर प्रदेशभर के स्व-सहायता समूह करीब एक साल से आर्थिक सहयोग की गुहार लगा रहे हैं,लेकिन उन्हें अब तक चवन्नी नहीं मिली। गत 15 अप्रैल की स्थिति में ही लगभग सभी जिलों से करीब 113 करोड़ रुपए के मांग पत्र लंबित थे। जाहिर है,बीते दो माह में यह रकम और अधिक बढ़ी है। बीते माह ही केंद्र सरकार ने समूहों की मदद के लिए दो हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए,लेकिन मप्र में समूहों के मांग पत्रों पर अब तक फैसला नहीं हो सका।
11 जिलों से बुलाई 75 हजार महिलाएं
सभा में महिलाओं की अधिकाधिक मौजूदगी दिखाने मिशन ने प्रदेश के 11 जिलों की 75 हजार महिलाओं को जुटाने का लक्ष्य तय किया। इसके लिए परियोजना के एसएनए खाते से आईबीसीबी-बी 2.2 मद में करीब 11 करोड़ 26 लाख 25 हजार रुपए मंजूर किए गए। वास्तव में इस मद में मिली रकम का उपयोग सिर्फ स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने के लिए किया जा सकता है।
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“ईआईसी” फंड से मंजूर की राशि: अवि प्रसाद
अलबत्ता,मिशन के प्रभारी सीईओ व मनरेगा आयुक्त अवि प्रसाद ने कहा कि महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन संस्कृति व पंचायत एवं ग्रामीण विकास का संयुक्त आयोजन था। इसमें महिलाओं की भागीदारी तय करने ईआईसी फंड का उपयोग किया गया। पीएम के कार्यक्रमों के लिए केंद्र सरकार इस तरह की व्यवस्था करती है।नंदन फलोद्यान योजना में एसएचजी की भागीदारी को लेकर उन्होंने कहा कि यह अभी प्रस्तावित है। प्रशिक्षण समेत जरूरी तैयारी कर ली गई है।

















