सत्ता के गलियारे से …रवि अवस्थी, (Bhopal,11-08-2024)
** पूरे सौ नंबर का’पर्चा’
मप्र के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में 100-100 करोड़ रुपए तक के विकास कार्यों का रोडमैप बनाने को कहा है। चार सालों की इस कार्ययोजना में विधानसभावार 60 करोड़ रुपए सरकार देगी। शेष रकम की व्यवस्था विधायक को अलग-अलग निधियों से करनी है।
एमएसएमई लाओ,स्कूल,आंगनवाड़ी खोलो,पुल-पुलिया जो बनाना हो,लेकिन तय नियम व शर्तों के साथ। यानी पैसे लो,काम करके दिखाओ। बहानेबाजी आड़े न आए,इसके लिए सप्ताह में दो दिन मंत्रियों संग मुलाकात के भी तय कर दिए।
‘एक पंथ दो काज’ वाला यह नवाचारी पर्चा पूरे सौ अंकों का है। रिजल्ट चार साल बाद आना है। पास हुए तो विधायक के साथ सरकार की भी वाहवाही। फेल हुए तो आंख नहीं मिला पाएंगे। फिर यह संदेश तो है ही,कि विकास की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की ही नहीं निर्वाचित ‘माननीयों’की भी है।
** ‘ॐ शिवाय नम:’ के इतर भी ..’हुजूर’
मप्र में लगभग एक करोड़ किसान हैं। इनमें करीब 48 फीसद 1 हेक्टेयर वाले सीमांत व 27 फीसद 1—2 हेक्टेयर जोत
वाले लघु किसान हैं। एक परिवार में 5 का औसत माने तो करीब साढ़े तीन करोड़ आबादी। कृषि क्षेत्र में भी बड़ी मछलियों का दबदबा है। खेती तो छोड़िए,सरकारी सुविधा का लाभ लेने के मामले में भी यह तबका सबसे पीछे खड़ा नजर आता है।
दिन बहुरने के इरादे से उद्यानिकी का सहारा लेने वाले बड़े शहरों की मंडियों में सिंडीकेट के हाथों छले जाते हैं। यह एक ऐसा बड़ा वर्ग,जिसके कल्याण के लिए कुछ नया किया जाना,नजीर बनकर मप्र को अलग पहचान दिला सकता है।
मसलन,ग्रामीण इलाकों में नई उद्यानिकी मंडियों की स्थापना।उद्यानिकी,मोटे अनाज,अन्य खाद्य उत्पाद व जैविक खेती पर विशेष अनुदान आदि शामिल हैं। दूध पर 5 रुपए बढ़ाने का काम तो पड़ोसी राज्य पहले ही कर चुके हैं।
** नजीर बना मंत्री बंगले का नल कनेक्शन
नगर निगम एक हजार लीटर कच्चे पानी पर 3.90 रु.और शोधित जल के 17.60 रु.वसूलता है। भोपाल में स्वच्छ जल के 2.70 कनेक्शन हैं,लेकिन कच्चे जल का सिर्फ एक।
दरअसल,प्रदेश के पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल को अपने सरकारी बंगले में सिंचाई के लिए महंगे जल का उपयोग नागवार गुजरा तो उन्होंने निगम से अशोधित जल का कनेक्शन ले लिया।
पटेल बतौर केंद्रीय मंत्री लंबे समय दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र में रहे। वहां सिंचाई के लिए कच्चे पानी का ही उपयोग होता है। पटेल ने इसी अनुभव को नजीर बनाया। अब कितने लोग इस पर अमल करते हैं। यह देखना होगा।
** सांप हैं किधर?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक बयान में कहा कि बीजेपी जहरीले सांप की तरह है। जो आदिवासियों का डसने का काम कर रही है। इसी दिन,कांग्रेस के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को’आस्तीन के सांपों’ से बचने की सलाह दी।
इन परस्पर विरोधी बयानों से आम जन भ्रमित है। वह समझ नहीं पा रहा है कि सांप हैं किधर? कांग्रेस से जो पहले गए उन्हें भी पार्टी नेताओं ने यही उपमा दी थी तो क्या अभी और बाकी हैं?
** यह एडजस्टमेंट का मामला है
बीजेपी अपने दो लाख कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने सत्ता से जोड़ेगी। शुरुआत सहकारी संस्थाओं से करने की तैयारी है।
मप्र में 4,523 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति,28 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक,अपेक्स बैंक,विपणन समितियां,मार्कफेड जैसी संस्थाएं है।
कोशिश यही कि ज्यादा से ज्यादा लोग इनमें जुड़कर रोजगार पा जाएं। बकाया के लिए दीनदयाल अंत्योदय समितियां बनाने की तैयारी है। कांग्रेस काल में यह काम बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समितियों के जरिए होता था। 80 के दशक में निगम,मंडल भी इसी अवधारणा पर बने।
** गोविंद सिंह का दर्द
मप्र कांग्रेस ने एकजुटता दिखाने भिंड में एक बड़ी सभी की। इसमें एक,दो को छोड़ लगभग सभी गुट के नेता जुटे,लेकिन सुर्खियों में रहे पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह। जो अपने भाषण् के दौरान कई बार भावुक हुए। आरोप लगाया कि सरकार चुन—चुनकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित कर रही है।
इसी सभा में बात डॉ सिंह की लहार कोठी की भी उठी। जो उनकी वेदना की असल वजह बताई जाती है। आरोप है कि कोठी सड़क पर अतिक्रमणकर बनाई गई। सभा को अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया,लेकिन कोठी पर लगे आरोप को लेकर ज्यादातर चुप्पी साधे रहे। यानी एकजुटता सिर्फ मंच पर दिखी,दिलों में नहीं।
सज्जन क्यों कहलाए दुर्जन?
सेम पित्रोदा,मणिशंकर अय्यर,सलमान खुर्शीद और मप्र में सज्जन सिंह वर्मा। इनके समय-असमय आने वाले बयानों को लेकर माना जाता है कि कांग्रेस को विरोधियों की जरूरत ही नहीं है। अब बांग्लादेश वाले मामले में ही लीजिए,खुर्शीद और वर्मा के बयानों ने पार्टी नेता राहुल गांधी व अन्य के प्रयासों पर भी पानी फेर दिया। बीजेपी को मौका मिला और उसने वर्मा को सज्जन नहीं दुर्जन व राष्ट्रविरोधी बता दिया।
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** सीएमओ का कसता शिकंजा
गुड गवर्नेंस व प्रशासनिक मामलों में कसावट के इरादे से बना मुख्यमंत्री सचिवालय ने अब विभागों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सचिवालय प्रमुख एसीएस डॉ राजेश राजौरा ने हाल ही में आधा दर्जन से अधिक विभाग के जिम्मेदार अफसरों को चेतावनी पत्र जारी किया। इसमें मुख्यमंत्री से जुड़ी घोषणाओं व निर्देशों का जानकारी पोर्टल पर जल्द अपडेट करने के दो टूक निर्देश दिए गए। चेताए गए विभागों में गृह,पंचायत एवं ग्रामीण विकास,राजस्व,लोक निर्माण,स्कूल शिक्षा,वन व जीएडी शामिल हैं।चेतावनी के बाद भी हालात नहीं सुधरे तो जिम्मेदारों पर गाज गिरना तय है।
** सोनाली की’उड़ान’
साल 1993 बैच की आईपीएस सोनाली मिश्रा भोपाल की बेटी हैं।अपनी दबंग कार्यशैली से उन्होंने अपने अब तक के सेवाकाल में खूब शोहरत हासिल की। बेदाग एकेडमिक कॅरियर के बदौलत उनकी बीएसएफ में सेवाएं ली गई। पहले दिल्ली,फिर कश्मीर और इसके बाद बतौर एडीजी पंजाब ईस्टर्न कमांड। लंबी प्रतिनियुक्ति के बाद बीते माह ही वह वापस मप्र लौटीं और एडीजी ट्रेनिंग भौंरी पदस्थ हैं। जानकारों की माने तो बीएसएफ में जल्द ही उन्हें एक बार फिर बेहतर दायित्व सौंपा जा सकता है। वह बतौर स्पेशल डीजी इम्पैनल्ड भी हो चुकी हैं।
बीएसएफ सेना के बाद देश की सुरक्षा में अहम भूमिका अदा करने वाला बल है। इसके डीजी नितिन अग्रवाल व स्पेशल डीजी योगेश बहादुर खुरानिया को हाल ही में उनके पद से हटाकर वापस उनके गृह नगर क्रमश: केरल व ओडिशा भेजा गया है।इस बदलाव के बाद सोनाली की बीएसएफ में पदस्थापना तय मानी जा रही है।
** सायबर ठगों ने बदला फोकस
मप्र में सायबर ठगी करने वालों का फोकस बदला हुआ है। बड़ा हाथ मारने के फेर में वे अब सत्ताधारी राजनेताओं व आला अफसरों को निशाना बना रहे हैं। बीते एक हफ्ते में ही प्रदेश पुलिस के महानिदेशक एस के सक्सेना सहित छह जिला कलेक्टर्स इनके शिकार बने।
इनमें तरुण भटनागर शहडोल,प्रियंक मिश्रा धार,दीपक सक्सेना जबलपुर,धर्मेंद्र कुमार जैन उमरिया,रविन्द्र चौधरी शिवपुरी व संस्कृति जैन सिवनी शामिल हैं। इनमें किसी की फेसबुक हैककर तो किसी का फोटो व्हाट्सएप डीपी पर लगाकर झांसा देने का जतन हुआ। जबलपुर कलेक्टर के रिश्तेदार तो ठगों के झांसे में आकर 25 हजार रुपए भी गंवा बैठे।
राजनेताओं में मंत्री रामनिवास रावत,राकेश सिंह,विधायक सरला रावत,योगेश पंडाग्रे ठगों के झांसे में आने से बाल-बाल बचे। मप्र में बीते 5 सालों में ही सायबर अपराध 7 हजार गुना बढ़े। इससे सायबर अपराधियों के बढ़ते हौसले व पुलिस की चिंता को समझा जा सकता है।
** चूक या सुनियोजित रणनीति
सागर में एक हादसे के बाद वहां के एसपी अभिषेक तिवारी को हटाया जाना चर्चा का विषय रहा। चर्चा एसपी के हटने से ज्यादा इस बात की,कि जो अफसर हादसे के वक्त सपरिवार अमेरिका में था,हादसे के लिए उसकी जवाबदेही कैसे तय हो सकती है। सूत्रों की माने तो यह एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। दरअसल,अभिषेक का चयन बीते मार्च में ही नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी एनटीआरओ में प्रतिनियुक्ति के लिए हो गया है।
















