मध्य प्रदेश से अब तक 7 निर्दलीय सांसद ही पहुंचे लोकसभा

23

सियासत की चकाचौंध ज्यादातर लोगों को प्रभावित करती है…जो किसी दल से नहीं जुड़े,वे निर्दलीय भी चुनाव में भाग्य आजमाकर पॉवर पाने की चाहत रखते हैं..मौजूदा लोकसभा चुनाव को लेकर भी मप्र में सियासी सरगर्मी तेज है..पहले चरण के चुनाव वाली छह सीटों पर ही तीन दर्जन से अधिक निर्दलीय अपना भाग्य आजमा रहे हैं..जबकि लोकसभा के लिहाज से मप्र में अब तक गिने—चुने निर्दलियों को ही चुनाव में सफलता मिल पाई है..

रवि अवस्थी,भोपाल (जनप्रचार.कॉम).
मध्य प्रदेश में पहले चरण की लोकसभा चुनाव वाली छह सीट से 88 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं..इनमें 37 प्रत्याशी किसी दल से नहीं जुड़े हैं..यानी वे बतौर निर्दलीय प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं..चुनाव लड़ने का संवैधानिक अधिकार देश के सभी नागरिकों को मिला हुआ है..लेकिन चुनाव में जीत हासिल करना कोई हंसी—खेल भी नहीं है..खासकर लोकसभा चुनाव इसके निर्वाचन क्षेत्र के लिहाज से सबसे बड़ा चुनाव माना जाता है..इसमें हर सीट से औसतन सात से आठ सीटों के लाखों मतदाताओं का साधना आसान नहीं है..मजबूत नेटवर्क रखने वाले राष्ट्रीय दलों को भी यह चुनाव पसीना ला देता है..ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशी के लिए तो यह और टेढ़ी खीर है..बावजूद इसके हर चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी अपना भाग्य आजमाने में पीछे नहीं रहते..लेकिन सफलता यदा—कदा भी इक्का—दुक्का प्रत्याशी को ही मिलती है..आंकड़े बताते हैं कि मप्र से अब तक सिर्फ 8 निर्दलीय ही संसद तक पहुंच सके..इनमें भी सर्वाधिक 4निर्दलीय वर्ष 1971 में चुने गए थे..

किस निर्दलीय का कब मिली सफलता…
………………………..

वर्ष      कुल सीट   विजयी निर्दलीय
1967     37           2
1971     37           4
1977     37           1
1989     40           1
………………….

महज चार चुनाव में सफलता पाने वाले 8 निर्दलीय सांसदों में भी कुछ नामी—गिरामी चेहरे रहे..जिन्हें अपनी पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर वे बागी बनकर चुनाव मैदान में उतरे..या फिर लंबे सामाजिक संघर्ष के बाद समाज में अपना मुकाम बनाया..इन्हीं में एक हैं,बालाघाट सीट से वर्तमान में बीएसपी प्रत्याशी कंकर मुंजारे..जिन्होंने वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में बालाघाट सीट से ही निर्दलीय चुनाव लड़ा व धमाकेदार जीत दर्ज कर सूबे के राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया..इस चुनाव में भारतीय जनसंघ्ज्ञ दूसरे व कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी..इसी तरह,ग्वालियर सिंधिया राजपरिवार के माधव राव सिंधिया ने भी वर्ष 1977 में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार गुना से जीत हासिल की..आपातकाल के बाद हुए इस चुनाव में तब जनता पार्टी की लहर थी..लेकिन इसके बीच भी सिंधिया जीत दर्ज करने में सफल रहे..ऐसा ही एक चौंकाने वाला नतीजा वर्ष 1971 में रीवा सीट का रहा.जब स्थानीय रियासत के महाराजा रहे मार्तंड सिंह इस चुनाव में बतौर निर्दलीय मैदान में उतरे व करीब दो लाख मतों से जीत हासिल की..
जाने मप्र से कौन कब चुना गया निर्दलीय सांसद..
………………………………..
वर्ष        सीट                विजयी निर्दलीय सांसद
1967   मुरैना                  आत्मादास
बस्तर                   जे सुंदरलाल
1971  बस्तर                   लंबोदर बलियार
रीवा                    मार्तंड सिंह
शहडोल               धन सिंह
सीधी                  रणबहादुर सिंह
1977  गुना                   माधवराव सिंधिया
1989  बालाघाट              कंकर मुंजारे
…………………………

लोकसभा हो या मप्र की विधानसभा निर्दलीय चुने गए प्रतिनिधि जरूरत पड़ने पर सरकार चलाने में जरूर मददगार साबित हुए…बावजूद इसके मतदाताओं ने किसी राजनीतिक दल से जुड़े प्रत्याशी पर ही अधिक भरोसा जताया..इसके चलते संसद में निर्दलीय सांसदों की संख्या चुनाव दर चुनाव कम होती गई..यहां तक कि बतौर निर्दलीय सांसद लोकप्रियता अर्जित करने वाले कुछ सांसदों ने बाद में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों का ही दामन थामा..मौजूदा लोकसभा चुनाव में ही महाराष्ट्र की अमरावती सीट से वर्ष 2019 में निर्दलीय सांसद चुनी गई नवनीत राणा अब बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं..इसी तरह,गुना से निर्वाचित हुए माधव राव सिंधिया ने भी चुनाव जीतने के दो साल बाद ही कांग्रेस का दामन थाम लिया था..समूचे देश की बात करें तो पहली व दूसरी लोकसभा में जहां निर्दलीय सांसदों की संख्या क्रमश: 37 व 42 थी..वहीं वर्ष 2019 यानी पिछले चुनाव में यह संख्या महज 4 रह गई.जबकि इस चुनाव में 8हजार 54 निर्दलियों ने अपना भाग्य आजमाया था..

लोकसभा में कब कितने निर्दलीय सांसद चुनकर पहुंचे…
वर्ष निर्दलीय सांसदों की संख्या
1951-52 37
1957 42
1962 20
1967 35
1971 14
1977 09
1980 09
1984 13
1989 12
1991 01
1996 09
1998 06
1999 06
2004 09
2009 09
2014 03
2019 04
………………………..

**मप्र में निर्दलियों का नहीं मिले ज्यादा मौके
**अब तक सात निर्दलीय सांसद ही चुने गए
**पार्टियों से जुड़े उम्मीदवारों को ज्यादा महत्व
**लोकसभा में कम होते गए निर्दलीय सांसद
**सर्वाधिक 42 निर्दलीय 1957 में चुने गए थे

इस तरह देखा जाए तो निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए कोई बहुत अधिक अवसर नहीं है..बावजूद इसके हजारों की संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में अपना भाग्य आजमाते हैं..भारतीय लोकतंत्र की यही खूबी है..इसमें देश के सभी नागरिकों को समान अवसर दिए गए हैं..फिर वह चुनावी रण हो या कोई और क्षेत्र..मप्र में चार चरण में होने वाले चुनाव में भी कई निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में है…इनमें कौन पहुंचेगा संसद व कौन गंवाएगा अपनी जमानत राशि..इसके लिए करना होगा चुनाव नतीजे आने तक इंतजार..।