Shahdol: अमलाई का रेलवे पुल सुविधा की जगह बना मुसीबत

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पूजा बाधवानी,अमलाई शहडोल। Amalai’s railway bridge स्थानीय रेलवे स्टेशन पर बनाया गया नया ओवर ब्रिज स्थानीय रहवासियों व यात्रियों के लिए मुसीबत बन गया है। पुल की लंबी व बेतरतीब ऊंचाई वाली सीढ़ियां बुजुर्ग,रोगी व बच्चों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं।

दूसरी बड़ी समस्या स्थानीय स्टेशन पर लोकल ट्रेनों का स्टॉपेज न होना व टिकट बिक्री की व्यवस्था स्टेशन के सिर्फ एक ओर होने से पैदा हुई है।

अमलाई,शहडोल जिले का एक छोटा कस्बा है। जो देश के ख्यातिनाम उद्योग ओरिएंट पेपर मिल्स के लिए पहचाना जाता है। जिले की बरगवां नगर परिषद अंतर्गत इस कस्बे का भौगोलिक क्षेत्रफल कुछ इस तरह कि इसका एक हिस्सा अनूपपुर तो दूसरा शहडोल जिले की सीमा से लगा है।

अमलाई में एक प्रमुख उद्योग होने से इसे रेलवे स्टेशन की सौगात भी वर्षों पहले से मिली है। इसकी बसाहट भी रेलवे स्टेशन के दोनों और है। एक और प्रमुख बाजार है तो दूसरी और सिर्फ चंद बस्तियां।

रेल अमलाई वासियों के लिए आवागमन का प्रमुख माध्यम है। पूर्व में यहां लोकल ट्रेन के स्टॉपेज भी थे। वहीं स्टेशन के एक प्लेटफार्म से दूसरे तक आना जाना भी आसान था। मुसीबत तब शुरू हुई जब रेल प्रशासन ने बीते साल स्टेशन पर एक नया ओवर ब्रिज खड़ा कर दिया।

कहने को यह आमजन व रेल यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया,लेकिन हकीकत यह कि उसकी समूची इंजीनियरिंग ही दोषपूर्ण है। पुल की चौड़ाई के हिसाब से बनाई गई लंबी व खड़ी सीढ़ियों पर चढ़ना उतरना आसान नहीं।

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बुजुर्ग,महिला व बच्चों के लिए तो यह और भी दुरूह कार्य है। इस पर बड़ी समस्या यह कि जिस और टिकट विक्रय होता उधर के प्लेटफॉर्म पर यात्री गाड़ियां नहीं रोकी जाती। अब टिकट लेना हो या यात्री गाड़ी पकड़नी हो तो यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे तक दौड़ लगानी ही पड़ती है।

इस पर ओवर ब्रिज का सहारा लेना तो यात्री के लिए और भी मुश्किल काम होता है। यदि उसके साथ भारी सामान है,यात्री बीमार है,बुजुर्ग व छोटे बच्चे हैं तो यह समस्या और बढ़ जाती है।

रेल प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
आए दिन की इस समस्या से परेशान स्थानीय रहवासियों ने नगर परिषद बरगवां वार्ड 4 की पार्षद रंजना सोनी के नेतृत्व में एक ज्ञापन रेल अधिकारियों को सौंपा। इसमें अमलाई में लोकल ट्रेन के स्टॉपेज शुरू करने,बेतरतीब बनाए गए ओवरब्रिज की समस्या का निराकरण करने,लिफ्ट की व्यवस्था करने व टिकट विक्रय व्यवस्था स्टेशन के दोनों किनारों पर किए जाने की मांग रखी। स्थानीय रहवासी इस बारे में जल्दी ही रेल मंत्री को भी पत्र लिखकर अपनी समस्या से अवगत कराएंगे।

 होना क्या चाहिए

1.सीढ़ियों की लंबाई कम करने इनके बीच डिवाइडर वाली रेलिंग लगे।
2.सीढ़ियों का गेप कम करते हुए पुल पर समतल स्थल बढ़ाया जाए।
3.एस्केलेटर या लिफ्ट लगाई जाए।
4.टिकट विक्रय की व्यवस्था दोनों किनारों पर हो।
5.लोकल ट्रेनों के स्टापेज अमलाई में शुरू किए जाएं।

एक समस्या यह भी
इधर,जिले की ही ब्यौहारी तहसील सोन नदी पर बना पुल पदयात्रियों व दुपहिया वाहन चालकों के लिए आवागमन का जरिया बना हुआ है। यह पुल विजयसोता रेलवे स्टेशन के नजदीक है। स्थानीय रहवासियों की समस्या यह कि नदी पार करने के लिए रेलवे पुल या नाव ही एक मात्र माध्यम है।

वर्ना कोसों दूर से घूम कर नदी के दूसरी ओर पहुंचा जा सकता है। लंबे फेरे से बचने राहगीर पुल के बाजू से बने पांच फीट के गलियारे का इस्तेमाल करते हैं। इससे निकलकर पटरी पार करते हुए वे दूसरी ओर पहुंचते हैं।

कई बार दुपहिया वाहन बीच में फंसने से विवाद की स्थिति बनती है,लेकिन अन्य कोई पहुंच मार्ग नहीं होने से इसी समस्या से दो-चार होना उनकी मजबूरी बन गया है।

इस पुल से अनेक ट्रेन गुजरती हैं। इसके चलते यह जोखिम जानलेवा भी बना हुआ है। समस्या पुरानी है,लेकिन इसे रोकने में रेल प्रशासन की कोई रुचि नहीं