MP:जिन्हें नर्सिंग का ‘न’तक पता नहीं,उनकी परीक्षा कराना चाहते हैं,यह नहीं चलेगा: हाईकोर्ट

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भोपाल। हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने नर्सिंग फर्जीवाड़े को लेकर मंगलवार को फिर तल्ख टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि जिन्हें नर्सिंग का ‘न’ तक नहीं पता,उनकी परीक्षा करवा कर काले का सफेद करना चाहते हैं। सिर्फ सरकार के महाधिवक्ता कोर्ट में पेश हुए,इसलिए परीक्षा की अनुमति दें दे,यह नहीं चलेगा। इस टिप्पणी के साथ ही न्यायालय ने नर्सिंग मामले को लेकर महाधिवक्ता द्वारा पेश दस्तावेज भी जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिए

दरअसल,मध्य प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेज और नकली विद्यार्थी मामले को लेकर न्यायालय में सुनवाई चल रही है। यह घोटाला क्या है,यह हम बाद में बताएंगे। पहले आज की सुनवाई के दौरान न्यायालय के रुख के बारे में जानते हैं।

इस मामले में लगातार हो रही फजीहत के बाद मंगलवार को सरकार के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुए। तर्क दिया कि संबंधित सभी दस्तावेज वह न्यायालय के समक्ष पेश कर रहे हैं ,लिहाजा परीक्षा की अनुमति दी जाए।

यही नहीं महाधिवक्ता ने याचिकाकर्ता के बेकग्राउंड भी बताया लेकिन कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता क्या करता है, इससे हमें कुछ लेना देना नहीं है। ये जनहित का मामला है। इसलिए अब न्यायालय इसकी सुनवाई कर रहा है।

हाई कोर्ट की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हमसे ज्यादा मत सुनिये, ये नर्सिंग कालेज राजनीतिक संरक्षण में चल रहे हैं। हमें हैरत है कि ऐसे विद्यार्थियों को प्रवेश देकर परीक्षा कराई जा रही है, जो नर्सिंग का ‘न’ तक नहीं जानते हैं।

काले धब्बों को रातों रात सफेद कर दिया। अब सिर्फ सरकार का दबाव परीक्षा कराने की ओर है। अब वहां कुछ नहीं दिखेगा। कोर्ट में महाधिवक्ता पैरवी करने के लिए आए हैं, इतने मात्र से परीक्षा कराने की अनुमति नहीं दे सकते हैं।

कोर्ट के सवालों का दिया जवाब

कोर्ट के सवालों पर महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि मैंने पूरे दस्तावेज देख लिए हैं। उनमें कोई गड़बड़ी नहीं है। रिकार्ड भी लेकर आए हैं। कोर्ट ने कहा कि आपके ऊपर भरोसा है, लेकिन आपके अधिकारियों पर नहीं है। नर्सिंग कालेजों की मान्यता के संबंध में सबकुछ देख चुके हैं। मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल दस्तावेज भी पेश नहीं कर पाई थी।

बिना दस्तावेज के मान्यता व संबद्धता दी गई है। आप जो रिकार्ड लेकर आए हैं, उसका सीबीआइ से सत्यापन करा लेते हैं। महाधिवक्ता जो रिकार्ड लेकर आए थे, वह रिकार्ड सीबीआइ के अधिवक्ता राजू शर्मा को सुपुर्द कर दिए।

26 अप्रैल को सीबीआइ के अधिकारी को न्यायालय में उपस्थित रहने के लिए कहा है। कालेजों के रिकार्ड का सत्यापन सीबीआइ द्वारा कराया जाएगा। सीबीआइ कितने समय में रिकार्ड, विद्यार्थियों का सत्यापन कर सकती है, उस संबंध में समय बताना है। याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति रोहित आर्या व न्यायमूर्ति सतेंद्र कुमार सिंह ने की।

कोर्ट ने नर्सिंग कालेजों को लेकर यह कहा

-आज सुधरने की बात कर रहे हैं, यदि पहले ही सुधर जाते तो ऐसी नौबत क्यों आती। इतना बड़ा फर्जीवाड़ा भी नहीं होता। नर्सिंग कालेजों को मान्यता व संबद्धता देने में सब नियमों के तहत हुआ है, इसकी सीबीआइ से जांच करा लेते हैं। महाधिवक्ता ने सीबीआइ जांच का विरोध किया। कोर्ट ने कहा कि ये भी आपकी ही सरकार की एजेंसी है, तो डर किस बात का।

– हमारा सोचना है कि मध्य प्रदेश के साथ कोई खिलवाड़ न हो। जिस प्रदेश में इस तरह की धांधली हो, अब उस परिस्थिति में परीक्षा कराने की अनुमति नहीं दे सकते हैं।

– महाधिवक्ता ने याचिकाकर्ता पर आपत्ति की। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता क्या करता है, इससे हमें कुछ लेना देना नहीं है। ये जनहित का मामला है। इसलिए अब न्यायालय इसकी सुनवाई कर रहा है।

– महाधिवक्ता ने कहा कि 20 हजार विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है। इसलिए परीक्षा की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने कहा कि अब वास्तविक विद्यार्थी ही परीक्षा दे सकेंगे। वास्तविक कालेज ही संचालित होंगे। फर्जी विद्यार्थियों को परीक्षा नहीं देने देंगे।

एक नजर में नर्सिंग कालेज

– 2022-23 तक प्रदेश में 723 नर्सिंग कालेज संचालित हैं।

– हाई कोर्ट में 485 कालेजों का रिकार्ड दिया है।

– विवाद सत्र 2019-20 व 2020-21 की परीक्षा पर है।

– कालेजों ने प्रवेश पहले दिए और मान्यता संबद्धता 2022 में मिली है।

– कितने फर्जी कालेज व विद्यार्थी हैं, उन्हें चिह्नित किया जाना है।