….मुझे तो आज भी गरीब को गले लगाने में आनंद आता है : शिवराज

20

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धन कभी सुख नहीं देता,दीन-हीनों की सेवा अहम है…अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा-मैं 64 साल का हो गया हूं..कितना जिऊंगा 10,12,15 साल..मुझे तो आज भी धूल​-​धूसरित और पसीने की बदबू वाले आदमी को गले लगाने में आनंद आता है। इसलिए जिन्हें ईश्वर ने सेवा का अवसर दिया..वे सच्चे मन से इसे करें..

मुख्यमंत्री ने यह बात शुक्रवार को राजधानी के नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आयोजित सिविल सेवा  दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने आला अफसरों से कहा –  यह घमंड नहीं होना चाहिए कि मैं तो IAS,IPS हूं..दो मिनट में सही कर दूंगा..

इस अहंकार से दूर ​रहना चाहिए..क्योंकि घमंडी ​का सिर आज नहीं तो कल नीचा होना है..हम जनता के सेवक हैं। मुख्यमंत्री हैं तो जनता की सेवा के लिए..हम सबको अहंकार शून्य होना चाहिए।

यह नहीं कि कलेक्टर हैं तो लाट साहब हो गए,कैसे मिलें।मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे खुशी है कि आज कलेक्टर और जनता के बीच की दूरी कम हुई। कई राज्यों में तो कलेक्टर से मिलना बडी बात होती है।

सबसे ज्यादा दीन-हीन तो यही

गरीब और अमीर का फर्क बताते हुए उन्होंने कहा कि एक वे ​आदिवासी हैं जो आज को जीते हैं और रोज उत्सव मनाते हैं..दूसरी ओर अनेक बडे उद्योगपति मेरे पास आते हैं। कहते हैं- सर ये छूट दे दीजिए। पहले मुझसे मिलेंगे, फिर अफसर से जाकर मिलते हैं। सबसे ज्यादा दीन-हीन यही लगते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा कार्य में कई बार कडी चुनौती भी आती है।

चौहान ने कहा ,कि मैं 15 महीने मुख्यमंत्री नहीं था। झोला लेकर निकल गया। आंदोलन किए। दोबारा जिन परिस्थितियों में मुख्यमंत्री बना तो भगवान से प्रार्थना करता था। भगवान से कहता . मदद करो!कोरोना कंट्रोल हो जाए। अफसरों – विधायकों के फोन आते थे- सर, ऑक्सीजन 15 मिनट की बची है। 10-12 दिन ऐसे थे, जब मैं भी विचलित हो गया था।

सीएम हेल्पलाइन का कुछ करना पड़ेगा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि CM हेल्पलाइन में अब सुधार की जरूरत है। कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर रहे हैं।

कई बार लोग परेशान करने के लिए जनप्रतिनिधियों, सरपंच की शिकायत करवा देते हैं कि जांच हो जाए। फंसेगा तो फिर उसे ब्लैकमेल करो। शिकायत बंद कराने के लिए ब्लैकमेल करने के लफड़े शुरू हो गए। हम टेक्नोलॉजी से दूर नहीं रह सकते, लेकिन विश्लेषण कर लेना चाहिए।

उत्साह की आग जलती रहना चाहिए
उन्होंने कहा कि मैं मप्र की टीम को बधाई देना चाहता हूं। हमने मध्य प्रदेश को विकसित और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कई बार सोचता हूं तो यहां केवल 71 हजार किमी टूटी सड़कें हुआ करती थीं।

आज मध्य प्रदेश का बजट 3 लाख 14 हजार करोड़ पहुंच गया है। हमारे पास संसाधन और रिसोर्स हैं। मप्र कभी बीमारू राज्य कहलाता था।

पिछले दिनों बुरहानपुर में परिस्थिति बनी थी, वहां के प्रशासन ने बड़ी समस्या को ढंग से निपटा दिया। कई बार हम अच्छा काम करते हैं, लेकिन राजनीतिक नजर, मीडिया की दृष्टि अलग होती है। नए अफसर शुरुआत में बहुत उत्साह से काम करते हैं, बाद में ढीले पड़ जाते हैं। उत्साह की आग जलती रहना चाहिए। अपने उदबोधन से पूर्व उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

मुख्य सचिव बोले- हमने मनन करें कि आगे क्या होंगे

कार्यक्रम में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने कहा- सिविल सर्विस की लंबी परंपरा देश में रही है। इसका इतिहास, उपलब्धियां और सफलता को सेलिब्रेट करने के लिए इस दिन का आयोजन करते हैं। ये दिन मूलत: लोकसेवा में हमारी उत्कृष्टता को दोहराने का दिन है। हमारी प्रशासनिक व्यवस्था डटकर हर चुनौती का मुकाबला करती है।

हमने हर टास्क को अपेक्षाओं पर खरा उतारा है। ऐसी योग्य और दक्ष टीम के साथ काम करने का मौका मिला। अब पब्लिक ऑडिट और स्क्रूटनी की बहुत मांग बढ़ी है। ऐसे में बहुत सी कमियां सामने आती हैं।

अपने अच्छे काम को प्रचारित करने और उसकी व्याख्या करने में हम कमजोर पड़ जाते हैं। नतीजा ये होता है कि कमियां दिखने लगती हैं और उपलब्धियां नजर नहीं आतीं। इसलिए जरूरी है कि हम इस बात पर मनन करें कि हम क्या थे, क्या हैं और आगे क्या होंगे।

ओबीसी से माफी मांग लेते तो यह सब कुछ होता ही नहीं…

सूरत कोर्ट द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने से इनकार के बाद कांग्रेस नेताओं द्वारा की जा रही टिप्पणियों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार किया।

भोपाल के प्रशासन अकादमी में सिविल सर्विस डे पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा- पता नहीं, कांग्रेस के मित्रों को क्या हो गया है।

बड़ा आसान था, राहुल जी OBC से माफी मांग लेते, लेकिन कोर्ट के फैसले पर टिप्पणियां की जा रही हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं, उंगलियां उठाई जा रही हैं। यहां तक कि न्यायाधीश के बारे में भी उल्टा – सीधा बोला जा रहा है।