Rajgarh Constituency: जहां प्रत्याशी बदलना पार्टियों की मजबूरी

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“देश की अनोखी सिंचाई परियोजना से राजगढ़ के खेतों में सिंचाई भले प्रेशर से हो रही हो…लेकिन राजगढ़ विधानसभा का मतदाता कभी किसी दल के प्रेशर में नहीं रहा..इसके चलते हर चुनाव में प्रत्याशी बदलना पार्टियों की अक्सर मजबूरी रही..जिसने प्रत्याशी को दोहराने का प्रयास किया तो वह दल ही सत्ता से बाहर हो गया…राजगढ़ विधानसभा का अब तक का चुनावी इतिहास तो यही कहता है..”

रवि अवस्थी,भोपाल। Rajgarh assembly election 2023

राजगढ़  मध्य प्रदेश का प्रमुख जिला..जल संसाधनों के मामले में प्रकृति इस जिले पर मेहरबान रही । कालीसिंध,नेवज,पार्वती,अजनार और गाड़गंगा जैसी प्रमुख नदियों का इस जिले से नाता है तो अनेक खूबसूरत झीलों की सौगात भी इसे हासिल है। यहां देश की पहली ऐसी सिंचाई परियोजना ,जिसमें भूमिगत पाइप लाइन के जरिए प्रेशर से सिंचाई हो सके।

यहां के खेतों में सिंचाई भले प्रेशर से हो रही हो…लेकिन राजगढ़ विधानसभा Rajgarh  का मतदाता कभी किसी दल के प्रेशर में नहीं रहा..इसके चलते हर चुनाव में प्रत्याशी बदलना पार्टियों की मजबूरी रही । जिसने प्रत्याशी को दोहराने का प्रयास किया तो वह दल ही सत्ता से बाहर हो गया।यहां का अब तक का चुनावी इतिहास तो यही कहता है..आइए जानते हैं,कैसा रहा है इस सीट का मिजाज..

राजधानी भोपाल से लगी राजगढ़  विधानसभी सीट Rajgarh assembly के अब तक के चुनावी इतिहास में सिर्फ दो मौकों को छोड़कर कोई भी विधायक लगातार दो चुनाव नहीं जीता..दूसरी बार में भी इन दोनों विधायकों के साथ कुछ ऐसा हुआ कि वे दोबारा विधायक तो बने,लेकिन उन्हें विपक्ष में बैठना पड़ा ..यानी संबंधित दल की सत्ता ही चली गई..

इनमें एक हैं जेएनपी से बीजेपी में आए जमनालाल गुप्ता..गुप्ता 1977 के चुनाव में जेएनपी से विधायक बने थे..दूसरी बार 1980 में बीजेपी से जीते लेकिन सत्ता में कांग्रेस आ गई..ऐसा ही कुछ 1990 व 93 में राजगढ़ से विधायक चुने गए बीजेपी के रघुनंदन शर्मा के साथ भी हुआ..

शर्मा पहली बार 1990 में जीते तो भाजपा की सरकार बनी..लेकिन दूसरी बार जीते तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आ गई और वह विपक्षी दल के सदस्य रह गए…  ग्राफिक्स के जरिए जाने.. अब तक कौन कब रहा राजगढ़ सीट का विधायक..
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साल/ विजयी रहे/ पार्टी
1951 /बैजनाथ/ कांग्रेस
1957 /रामकुमार दुबे /पीएसपी
1962 /शिव प्रकाश खुजनेरी /निर्दलीय
1967 /विजय सिंह /कांग्रेस
1972 /गुलाब सिंह/ कांग्रेस
1977/ जमनालाल गुप्ता /जेएनपी
1980 /जमनालाल गुप्ता /बीजेपी
1985 /गुलाब सिंह/ कांग्रेस
1990 /रघुनंदन शर्मा /बीजेपी
1993/ रघुनंदन शर्मा /बीजेपी
1998 /प्रताप सिंह मंडलोई /कांग्रेस
2003 /हरिचरण तिवारी/ बीजेपी
2008 /हेमराज कल्पोनी/ कांग्रेस
2013 /अमर सिंह यादव/ बीजेपी
2018 /बापू सिंह तोमर /कांग्रेस
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राजगढ़ विधानसभा Rajgarh Constituency के चुनावी इतिहास में कुछ अवसर ऐसे भी रहे कि जब बीजेपी हो या कांग्रेस इन्होंने प्रत्याशी को दोहराने का प्रयास किया तो मतदाताओं ने बदलाव कर दिया.. 2013 का चुनाव करीब 51 हजार मतों से जीते अमर सिंह यादव को बीजेपी ने पिछले चुनाव में दूसरी बार प्रत्याशी बनाया..

इसमें न सिर्फ अमर सिंह 31 हजार से अधिक मतों से हारे,बल्कि बीजेपी ही सत्ता से बाहर हो गई..2008 में भी बीजेपी ने सिटिंग एमएलए हरिचरण तिवारी पर दांव खेला..लेकिन मतदाताओं ने कांग्रेस के हेमराज कल्पोनी को विजयी बनाया..

इसी तरह,1977 में कांग्रेस ने गुलाब सिंह Gulab Singh को रिपीट किया तो मतदाताओं ने विधायक जनता पार्टी के जमनालाल को बनाया…

देखा जाए तो बीते 66 साल के इतिहास में कोई भी राजनीतिक दल राजगढ़ के मतदाताओं का मूड नहीं भांप सका…प्रत्याशी दोबारा जीता तो सत्ता चली गई.सत्ता मिली तो राजगढ हार गए..उम्मीदवार बदला तो वोटरों का रुझान नहीं बदल सके..

अब ऐसे में 2023 के चुनाव में कौन होंगे उम्मीदवार और किसके सिर सजेगा राजगढ़ का ताज..चुनाव लड़ने में माहिर राज्य के दोनों ही प्रमुख दल भी पुख्ता तौर पर कुछ कहने की स्थिति में नहीं… अब तक के नतीजों पर गौर करें तो राजगढ़ सीट पर अब तक हुए 14 बार के चुनाव में छह बार कांग्रेस,5 बार बीजेपी,एक बार जेएनपी व दो बार निर्दलीय विधायक चुने गए…
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राजगढ़ के चुनाव नतीजे एक नजर में
वर्ष 1957 में हुआ था पहला चुनाव
14 चुनावों में छह बार जीती कांग्रेस
5 बार बीजेपी के खाते में रही सीट
2 दफा निर्दलीय,1 बार जेएनपी जीती
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हालांकि दोनों ही दलों में टिकट के दावेदारों की कमी नहीं है..कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रताप सिंह मंडलोई बीजेपी का दामन थाम चुके हैं..पूर्व विधायक हरिचरण तिवारी भी कतार में हैं..कमोबेश यही स्थिति कांग्रेस में है..

देखा जाए तो राजस्थान सीमा से लगे होने से राजगढ़ के चुनाव भी वहां के पैटर्न में होते रहे हैं.. पिछली बार कांग्रेस को यहां से जीत मिली तो इस बार भाजपा जीत की उम्मीद लगाए हुए है..मतदाताओं के मूड के आगे राजगढ़ की जातिगत समीकरण व विकास के मुद्दे भी गौण रहे हैं..राजगढ के जातिगत समीकरण कुछ इस तरह हैं..
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कुल मतदाता                    2,25,370
पुरुष मतदाता                   1,16,573
महिला मतदाता                 1,08797
तंवर                              32 -34 हजार
सोंधिया                          28-30 हजार
मुस्लिम                          12-13 हजार
राजपूत                          12-15 हजार
जैन                              10-12 हजार
ब्राह्मण                          18-20 हजार