MP Assembly Elections 2023: सत्ता के समीकरण बनाने में सहायक हैं नर्मदापुरम संभाग की 11 सीटें

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रवि अवस्थी,भोपाल। Narmadapuram Division नर्मदापुरम संभाग प्रदेश के मध्य क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा…जो स्वयं में विधानसभा की 11 और लोकसभा की दो सीटें समेटे है.. प्रदेश में सत्ता के समीकरण बनाने में यह अंचल हमेशा से सहायक की भूमिका अदा करता रहा है…अंचल के मतदाताओं का मिजाज शांत है…लेकिन अपने मत से वे लोकतंत्र की ताकत का अहसास कराते रहे हैं। यहां अपनी प्रभुता का गुमान रखने वाला टिकता नहीं और सेवाभावी कभी डिगता नहीं।

यानी होशंगाबाद की ही बात की जाए तो यहां का सेवाभावी रामलाल शर्मा परिवार एक बड़ा उदाहरण है… इस परिवार ने मप्र में मुख्य सचिव से लेकर विधानसभा अध्यक्ष तक का पद सुशोभित करने वाले लोकप्रिय लोक सेवक दिए..कहा जाए कि शर्मा परिवार नर्मदापुरम जिले का एक बड़ा नाम है तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगा..जिले की सियासत में इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता..

कुछ यही स्थिति अंचल के दूसरे जिला हरदा (Harda)में प्रदेश के दिग्गज नेता व प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल की है…हालांकि इन दोनों की छवि में फर्क है.. नर्मदांचल के दो जिले नर्मदापुरम व हरदा को भाजपा का गढ़ माना जाता है…अलबत्ता आदिवासी बाहुल्य जिला बैतूल(Betul) का सियासी मिजाज इनसे जुदा रहा है। बीते तीन दशकों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो शुरुआती दौर भाजपा के लिए यहां मुश्किलों भरा रहा…इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा..बीते दो दशक में हुए चार आम चुनाव व 2016 में घोड़ाडोंगरी के एकमात्र उपचुनाव में बीजेपी ने अपनी बढत कायम रखी..

वर्ष 1990 में तो इस अंचल से कांग्रेस (Congress) का सूपड़ा ही साफ हो गया था…लेकिन वर्ष 1993 में उसने वापसी की.. कांग्रेस ने तब अंचल की दस में से सात सीट पर जीत हासिल की..लेकिन इसके बाद इस अंचल में उसका ग्राफ लगातार गिरा…दिग्विजय शासनकाल के दूसरे चरण में ही उसे पचास फीसद यानी पांच सीटों से संतोष करना पड़ा …

वर्ष 2008 के चुनाव में भाजपा 11 में से 9 सीटें हासिल कर अंचल की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी…जबकि कांग्रेस को सिर्फ दो सीटों से संतोष करना पडा.. वर्ष 2018 के चुनाव  से पूर्व कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा किसानों के लिए की गई दो लाख रुपए तक के कर्ज माफी की घोषणा का असर इस अंचल में भी देखा गया..इसके चलते कांग्रेस दो सीटों की बढ़त बनाने में सफल रही..उसे नर्मदापुरम संभाग की 11 में से चार सीट पर जीत हासिल हुई..

माना जाता है कि पिछले चुनाव में आदिवासी मतदाता का बीजेपी से मोह भंग हुआ..अंचल के बैतूल जिले में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित घोड़ाडोंगरी व भैंसदेही सीटों पर भी यह देखा गया… ये दोनों सीटें कांग्रेस के खाते में रहीं..इस चुनाव में भाजपा को अंचल से तीन सीटों का नुकसान हुआ…इसकी भरपाई के लिए वह अब नए सियासी समीकरण तैयार करने में जुटी है…

वर्ष 2003 तक होशंगाबाद संभाग में सिर्फ दो जिले होशंगाबाद व हरदा तथा केवल 10 विधानसभा सीटें थीं। वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद होशंगाबाद जिले में सोहागपुर नई विधानसभा सीट बनी और शुरुआत से ही यह भाजपा के खाते में रही है…इस तरह देखा जाए तो समूचे अंचल में भाजपा का प्रभाव कांग्रेस की तुलना में कहीं अधिक रहा…

वर्ष 2023 के चुनाव के लिए अंचल में दोनों ही प्रमुख दलों ने अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दी है..कांग्रेस जहां अपनी मौजूदा चार सीटों के साथ अन्य सीटें पाने की जुगत में है … वहीं भाजपा क्लीन स्वीप की तैयारी में है..

इस कवायद में अंचल की कुछ सीटों पर इस बार उम्मीदवारों के चयन में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है…अंचल की 11 विधानसभा सीटों में से तीन सीटें घोड़ाडोंगरी ,भैंसदेही व टिमरनी अनुसूचित जनजाति तो दो सीट आमला व पिपरिया अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं..।

मतदाताओं की संख्या     25 लाख 20 हजार 411
नर्मदापुरम संभाग के जिले  03
विधानसभा सीटों की संख्या 11
लोकसभा सीटों की संख्या  02
अजा/अजजा आरक्षित सीट 05
वर्तमान दलगत स्थिति     भाजपा 7 कांग्रेस 4