गुजरात के लोगों के लिए संजीवनी साबित हुई 108 एंबुलेंस सेवा

गांधीनगर
2007 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस 108 एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की थी आज वह राज्य के लोगों के लिए संजीवनी साबित हुई है। कभी 57 एंबुलेंस के साथ लोगों की जिंदगियां बचाने की शुरुआत करने वाली 108 सेवा अब आपात परिस्थितियों में राज्य के लोगों के लिए लाइफलाइन बन चुकी है।
 

15 साल पहले शुरू हुई 108 एंबुलेंस सेवा आज 257 तालुका, 18,000 गांवों, 33 जनपदों और मेट्रो सिटी समेत पूरे राज्य में फैल चुकी है। आज यह इतनी बेहतरीन हो चुकी है कि घटना के बस कुछ ही मिनटों में 108 सेवा घटनास्थल पर पहुंच जाती है और घायलों, बीमार या पीड़ित को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराती है।
 
गुजरात में किसी भी जगह पर एक्सीडेंट होने की स्थिति में एंबुलेंस सेवा तत्काल घटनास्थल पर पहुंची है और घायल व्यक्ति को तुरंत इलाज मिलना शुरू हो जाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह वरदान साबित हुई है। यह सेवा ऐसी महिलाओं को प्रसव के लिए तेजी से अस्पताल पहुंचा रही है जिससे गर्भवती को बड़ी मदद मिली है। एंबुलेंस सेवा ने राज्य में 1.16 लाख महिलाओं को सुरक्षित प्रसव कराने में भूमिका अदा की है।

108 एंबुलेंस सेवा के शुरू होने के बाद से अब तक राज्य में 1.32 करोड़ लोग इस सेवा का लाभ ले चुके हैं। 108 एंबुलेंस कर्मियों की द्वारा समय से दी जाने वाली सेवा के चलते 12.14 लाख लोगों की जिंदगी बचाई जा चुकी है जो गंभीर स्थिति में थे। अनुमानतः राज्य में एंबुलेंस सेवा में 3000 कर्मचारी दिन रात अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

 

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