बीएमएचआरसी के डॉक्टर्स ने ऑपरेशन निकली ढ़ाई किलो स्पलीन

भोपाल

भोपाल मेमोरियल अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में थैलेसीमिया से जूझ रहे मरीज का जटिल ऑपरेशन किया गया। 22 वर्षीय युवक के पेट से करीब 25 सेंटीमीटर बढ़ी तथा वजन 2.5 किलो वजनी स्पीलिन (तिल्ली) निकाली गई। अब मरीज को जल्दी जल्दी खून चढ़वाने की जरूरत नहीं होगी। बीएमएचआरसी के गैस्ट्रो सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ प्रमोद वर्मा ने बताया कि मरीज बचपन से ही थैलेसीमिया की बीमारी से पीडि़त है। उसकी उम्र 22 वर्ष है, लेकिन बीमारी की वजह से वजन सिर्फ 35 किलो ही था। मरीज को हर एक महीने में रक्त चढ़ाने की जरूरत होती थी लेकिन कुछ महीने पहले उसकी स्पीलिन बढऩा शुरू हुई। स्पिलिन के बढऩे के बाद मरीज को हर सप्ताह खून चढ़ाना पड़ रहा था। मरीज की जांच में पता चला कि स्पिलिन का आकार सामान्य से करीब आठ गुना हो गया है, ऐसे में ऑपरेशन ही अंमित विकल्प था।

डबल चैलेजिंग थी सर्जरी

डॉ. वर्मा ने बताया कि सामान्य मरीजों की तुलना में थैलेसीमिया ग्रस्त मरीजों के ऑपरेशन ज्यादा जोखिमभरे होते हैं। मरीज के शरीर में पहले ही ब्लड कम होता है, वहीं थैलेसीमिया की वजह से ज्यादा ब्लीडिंग (रक्तस्त्राव) होने का डर रहता है। एनेस्थीशिया विभाग में प्रोफेसर डॉ सारिका कटियार ने बताया कि मरीज का हीमोग्लोबिन स्तर 7.5 था, वहीं निकाली गई स्पिलिन में भी 500 एमएल रक्त था। ऐसे में बेहोशी के दौरान मरीज का हीमोग्लोबिन स्तर बनाए रखना ज्यादा चुनौतीभरा था।

डेढ़ महीने में चेंज होगा ब्लड

डॉ. वर्मा के मुताबिक अब मरीज को हर सप्ताह रक्त बदलने की समस्या से निजात मिल जाएगी। स्पीलिन ऑपरेट होने के बाद मरीज को अब एक से डेढ़ महीने में रक्त बदलवाने की जरूरत होगी।इंसान के शरीर में तिल्ली का काम पुरानी रेड ब्लड सेल को खत्म कर नई लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण करना होता है।

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